The Lallantop

सलमोनेलोसिस: चॉकलेट के जरिये 100 से ज्यादा देशों में फैली इस बीमारी की वजह, लक्षण और इलाज क्या है?

'सलमोनेलोसिस' इंफेक्शन में पेट से जुड़ी दिक्कतें सबसे ज्यादा होती हैं.

Advertisement
post-main-image
अगर समय पर इलाज नहीं हुआ तो ये बीमारी जानलेवा भी हो सकती है. (सांकेतिक फोटो)

पिछले साल 27 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की तरफ से एक वार्निंग जारी हुई. वार्निंग में WHO ने कहा कि 100 से ज्यादा देशों में 'सलमोनेलोसिस' (Salmonellosis) नाम की एक बीमारी फैल गई है. इस वजह से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ने लगे. दुनियाभर में हड़कंप मच गया. WHO ने जांच के आदेश दे दिए. रिपोर्ट आई तब पता चला कि बेल्जियम की एक चॉकलेट के जरिए इस बीमारी का विस्फोट हुआ. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

दरअसल 'सलमोनेलोसिस' (Salmonellosis) की बीमारी एक बैक्टीरिया के कारण होती है, जोकि जानवरों की आंतों में पाया जाता है. और ये बैक्टीरिया इस चॉकलेट फैक्ट्री के उस टैंक में पाया गया जहां चॉकलेट बनती है. तो आज हम इसी बैक्टीरिया और इससे होने वाली बीमारी सलमोनेलोसिस के बारे में बात करेंगे. और डॉक्टर से जानेंगे कि सलमोनेलोसिस क्या होती है, कैसे फैलती है. इसका इलाज क्या है. साथ ही इससे बचाव कैसे करें.

'साल्मोनेला टाइफिम्यूरियम' क्या होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर विनीता टंडन ने.

Advertisement
( डॉ. विनीता टंडन, कंसल्टेंट इंटर्नल मेडिसिन, पुष्पावती सिंघानिया हॉस्पिटल, नई दिल्ली )

साल्मोनेला (Salmonella) एक ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया है. इस बैक्टीरिया की एक प्रजाति है साल्मोनेला एंटरिका (Salmonella Enterica). इसी प्रजाति से साल्मोनेला टाइफिम्यूरियम (Salmonella Typhimurium) बैक्टीरिया आता है. साल्मोनेला टाइफिम्यूरियम से इंसान और जानवर दोनों में इंफेक्शन होता है. इंसानों में होने वाले इंफेक्शन को सलमोनेलोसिस (Salmonellosis) कहा जाता है.

किस कारण से फैलता है 'साल्मोनेला टाइफिम्यूरियम'?

> ये बैक्टीरिया पालतू और जंगली जानवरों की आंतों में पाया जाता है.

> इन जानवरों के मीट को कच्चा या अधपका खाने से ये इंफेक्शन हो जाता है.

Advertisement

> दूषित पानी पीने से भी ये इंफेक्शन फैलता है.

> ये बैक्टीरिया हमारी आंतों में इंफेक्शन कर देता है.

> पालतू जानवरों के रख-रखाव में लापरवाही के कारण भी इस बैक्टीरिया से इंफेक्शन होता है.

> पालतू जानवरों के मल की सफाई के बाद हाथ न धोने से साल्मोनेला टाइफिम्यूरियम का इंफेक्शन होता है.

> इसके अलावा टॉयलेट जाने के बाद हाथ न धोने वाले लोगों को भी ये इंफेक्शन सबसे ज्यादा होता है.

लक्षण

> सलमोनेलोसिस इंफेक्शन में पेट से जुड़ी दिक्कतें सबसे ज्यादा होती हैं.

> बुखार, पेट दर्द, उल्टी, उल्टी जैसा मन होना, दस्त और कभी-कभी दस्त में खून आना आम लक्षण होते हैं.

> दूषित खाना या पानी पीने के 2 से 72 घंटे बाद ये लक्षण दिख सकते हैं.

> ये सभी लक्षण 2 से 7 दिन तक दिख सकते हैं. 

> ज्यादा उल्टी-दस्त होने के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है.

> पानी की कमी के कारण डिहाइड्रेशन के लक्षण भी दिख सकते हैं, जैसे कि लो बीपी, ड्राई स्किन, कम पेशाब आना और चक्कर आना.

इससे क्या-क्या रिस्क हो सकते हैं?

> इस इंफेक्शन से कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है.

> जैसे किडनी के मरीज, ट्रांसप्लांट और डायबिटीज के मरीज और दिल के मरीज.

> पांच साल से कम उम्र के बच्चे और बूढ़ों को भी इस इंफेक्शन से खतरा है.

> इंफेक्शन के ज्यादा फैलने से सेप्टिसीमिया (septicemia) का खतरा होता है. इससे जान का खतरा भी होता है.

> इस इंफेक्शन की पहचान करने के लिए खून और मल की जांच करनी पड़ती है.

इलाज

> अगर हालत गंभीर नहीं है तो ये अपने आप ठीक हो जाता है. सिर्फ ये ध्यान रखा जाता है कि शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए ORS दिया जाता है.

> आमतौर पर एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता, क्योंकि ये बैक्टीरिया एंटीबायोटिक रेजिसटेंट हो सकता है. यानी एंटीबायोटिक्स का इस पर कोई असर नहीं होगा.

> अगर मरीज के शरीर में पानी की कमी ज्यादा होती है तो उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है.

> मरीज को सेप्टिसीमिया होने पर या सभी अंगों में इंफेक्शन फैलने पर ही एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं.

बचाव

> साफ सफाई का ध्यान रखें.

> मीट और अंडे इस्तेमाल करने से पहले अच्छे से धो लें.

> कच्चा और अधपका मीट खाने से बचें.

> दूध को उबाल कर ही इस्तेमाल करें.

> किचन में भी साफ-सफाई रखें.

> एक ही चाकू से मीट और सब्जियां काटने से बचें.

> बाहर पानी पी रहें हैं तो फ़िल्टर पानी ही पिएं.

'साल्मोनेला टाइफिम्यूरियम' बैक्टीरिया और इससे होने वाला इंफेक्शन जानलेवा भी हो सकता है. अगर आपको पेट से जुड़ी समस्याओं और उल्टी-दस्त से बचना है तो साफ सफाई का ध्यान जरूर रखें. टॉयलेट जाने के बाद हाथ धोएं. फल-सब्जियों और मीट को धो कर इस्तेमाल करें. साथ ही पेट रखने वाले लोगों को साफ सफाई का ध्यान ज्यादा रखना चाहिए. इन छोटी-छोटी मगर अहम बातों का ख्याल रखने से आप इस इंफेक्शन से बचे रह सकते हैं. 

(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: जानिए कैसे फैलती है 'सलमोनेलोसिस'? उल्टी-दस्त से बचना है तो इन बातों का ध्यान रखें

Advertisement