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एग्ज़ाम सेंटर के बाहर लड़कियां रोती रहीं, पुलिसकर्मी उनके कपड़ों की आस्तीन काटती रहीं

राजस्थान के भरतपुर में पुलिस कॉन्स्टेबल परीक्षा चल रही है.

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तस्वीर: आज तक

प्रश्न- ऊपर दिख रही दो तस्वीरों में कौन सी चीज़ें समान (कॉमन) हैं?

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सरकारी नौकरी के लिए होने वाली परीक्षाओं में इस तरह के सवाल परीक्षार्थियों के दो से तीन मिनट तो खा ही लेते हैं. फिलहाल आप हमारे सवाल का जवाब ढूंढने में अपने कीमती मिनट बर्बाद करें उससे पहले हम ही इस प्रश्न का उत्तर दे देते हैं.

इन दोनों तस्वीरों में कॉमन है- कैंची और उस कैंची को लिए एक महिला पुलिसकर्मी, और लड़कियों की कटती हुई आस्तीन.

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तस्वीरें कहां से आई हैं, मामला क्या है?

राजस्थान में 13 मई से पुलिस (Police) कॉन्सटेबल भर्ती की परीक्षाएं शुरू हुई हैं. दोनों तस्वीरें राजस्थान के भरतपुर के एक एग्ज़ाम सेंटर से आई हैं. आज तक से जुड़े सुरेश फौज़दार के मुताबिक इस परीक्षा केंद्र पर आए अभ्यर्थियों पर जमकर सख्ती दिखाई गई. एग्ज़ाम सेंटर के गेट पर महिला पुलिसकर्मियों ने कई लड़कियों के कपड़ों पर कैंची चलाई. इस दौरान अपने कपड़ों को कटता-फटता देख कई महिला कैंडीडेट्स रोती रहीं लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी. सख्ती का आलम ये था कि पुलिस भर्ती की परीक्षा देने आईं कई महिलाओं के गहने तक उतरवा लिए गए.  चेकिंग के दायरे में मेल और फीमेल दोनों कैंडिडेट्स थे. भरतपुर में नकल रोकने के लिए किए गए इंतजामात पर एएसपी अनिल मीणा ने बताया-

“भरतपुर में करीब तीन हजार परीक्षार्थी भाग ले रहे हैं. सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए हैं. महिला अभ्यर्थियों और पुलिस अभ्यर्थियों की चेकिंग की अलग-अलग व्यवस्था की गई है. पूरी सुरक्षा के साथ परीक्षा का आयोजन हो रहा है.”

सेंटर के गेट पर पांव से बिछिया उतारती कैंडिडेट (तस्वीर: आज तक)

राजस्थान में पुलिस कॉन्सटेबल भर्ती की परीक्षा को फुलप्रूफ बनाने के लिए तगड़ी व्यवस्था की गई है. क्वेश्चन पेपर्स को सेफ रखने के लिए स्ट्रांग रूम बनाए गए हैं, एग्ज़ाम सेंटर्स पर सीसीटीवी लगे हैं, एक सेंटर से दूसरे सेंटर तक गश्त करने के लिए मोबाइल टीम भी बनाई गई है. परीक्षा केंद्रों पर तय समय से लेट आने वालों को भी सेंटर में एंट्री नहीं दी जा रही.

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एग्ज़ाम सेंटर पर लेट पहुंचने वालों को एंट्री नहीं मिली (तस्वीर:आज तक)
चेकिंग के नाम पर कपड़े फाड़ना कितना सही?

किसी भी परीक्षा में नकल को रोकने के लिए बंदोबस्त किया जाना सही है. लेकिन भरतपुर से आई तस्वीरों पर सवाल ये उठता है  कि पुलिसकर्मियों ने कैंडिडेट्स के कपड़े क्यों फाड़े? जिस बेतरतीबी से उनके कपड़ों का नक्शा बिगाड़ा गया क्या ये सही था? हालांकि, सरकार की तरफ से इस भर्ती परीक्षा के लिए पहले से ही गाइडलाइंस जारी की गई थीं जिसके मुताबिक किसी भी तरह का कोई उपकरण लाना और गहने पहनकर आने पर मनाही थी. इसके अलावा महिला और पुरुष सभी कैंडिडेट्स को आधी आस्तीन के कपड़े पहनकर आने को बोला गया था. गाइडलाइन्स के बाद भी कई अभ्यर्थी फुल आस्तीन के कपड़े पहन कर आए जिनकी आस्तीनें गेट पर ही काट दी गईं. फिलहाल ये साफ नहीं है कि गाइडलाइन्स का उल्लंघन करने पर कैंडिडेट्स के कपड़े फाड़ने की अथॉरिटी पुलिस को किसने दी.

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