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शिंदे कैबिनेट में एक भी महिला नहीं, सुप्रिया सुले ने चंद्रकांत पाटिल से बदला ले लिया

प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मुद्दे को उठाया. वहीं उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणविस ने कहा, "पिछली सरकार वाले तो बोले ही न!"

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प्रियंका चतुर्वेदी ने ये फोटो ट्वीट की और तंज़ में लिखा, 'फोटो में महिलाएं ढूंढिए!'

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Maharashtra CM Eknath Shinde) ने बीती 9 अगस्त को अपनी नई सरकार के कैबिनेट का विस्तार किया. शपथ लेने के 41 दिन बाद सीएम शिंदे ने भाजपा के नौ और शिवसेना के उनके खेमे के नौ सदस्यों को मंत्रिमंडल में शामिल किया. इस नई कैबिनेट में एक भी महिला शामिल नहीं है. जाहिर है महिला राइट ग्रुप्स और राजनेताओं ने इस बात की ख़ूब आलोचना की है. NCP से सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने कहा है कि ये दिखाता है कि भाजपा वाले महिलाओं की कितनी इज़्ज़त करते हैं.

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मई के आख़िरी हफ़्ते में महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने NCP सांसद सुप्रिया सुले को राजनीति छोड़ घर जाकर खाना बनाने के लिए कहा था. इस बयान पर ख़ूब बवाल हुआ था. नई कैबिनेट में चंद्रकांत पाटिल को भी शामिल किया गया है. सो सुप्रिया सुले ने एक तरह से चंद्रकांत पाटिल से बदला ले लिया है. उन्होंने पाटिल का नाम लिए बिना उनके बयान पर तंज़ किया है. कहा कि कई बार उनकी पार्टी के लोगों ने कहा है कि महिलाओं को किचन में रहना चाहिए. अब ये काम में भी रिफ्लेक्ट हो रहा है. सुले ने कहा,

"ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक भी महिला को कैबिनेट में जगह नहीं मिली. महाराष्ट्र देश का पहला राज्य था, जिसने महिलाओं को आरक्षण दिया था. देश की आबादी का 50 फीसदी महिलाएं हैं और एक भी महिला का कैबिनेट में जगह न मिलना चौंकाने वाला है. ये फैसला दिखाता है कि वे (भाजपा) महिलाओं का सम्मान नहीं करते हैं."

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राज्य सभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस नए एक्सपैंशन में महिलओं की ग़ैर-मौजूदगी को हाइलाइट किया. प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया,

"समझ में नहीं आ रहा है कि बीजेपी में महिला नेताओं के साथ बराबरी के बजाय दूसरे दर्जे के नागरिकों की तरह व्यवहार करना ठीक क्यों है? कहां हैं अविचलित मंत्री जी? अब सन्नाटा क्यों? केवल शब्दों से महिला सशक्तिकरण का समर्थन करेंगे?"

इस पूरे बवाल पर महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मंत्रिमंडल में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा. फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए कहा,

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"नए मंत्रिमंडल में कोई महिला मंत्री न होने पर जो आपत्तियां हैं, उस पर जल्द ही ध्यान दिया जाएगा. हमारे मंत्रिमंडल में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा."

फडणवीस ने ये भी कहा कि पिछली सरकार में भी शुरुआत में पांच मंत्री थे और मंत्रिमंडल में कोई महिला नहीं थी, इसलिए उन्हें अब टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है.

संजय राठौड़ को शामिल करने पर विवाद

एक बवाल और हो रहा है. शिवसेना के बागी विधायक संजय राठौड़ को नई कैबिनेट में शामिल करने पर. संजय राठौड़ उद्धव ठाकरे की कैबिनेट में वन मंत्री थे. उन पर पुणे में एक 23 वर्षीय महिला की आत्महत्या के मामले से जुड़े होने का आरोप लगे थे. तब भाजपा ने उनका काफी विरोध किया था. इतना कि उस समय संजय को इस्तीफ़ा देना पड़ा था. अब नई सरकार की कैबिनेट में उनको शामिल करने पर फिर से विरोध हो रहा है.

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बीजेपी की सरकार बनने के बाद ये पहला मौक़ा है जब शिंदे और बीजेपी के बीच खींचतान हो रही है. BJP की राज्य उपाध्यक्ष चित्रा वाघ ने ट्वीट किया, 

"ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि महाराष्ट्र की बेटी पूजा चव्हाण की मौत का कारण बने संजय राठौड़ को फिर से मंत्री का पद दिया गया है. मैं उनके खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखूंगी, भले ही वह फिर से मंत्री बन गए हों."

उधर पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने फैसले का बचाव किया है. उन्होंने कहा,

"MVA सरकार के दौरान उन्हें (राठौड़) क्लीन चिट दे दी गई थी, इसलिए उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. पुलिस ने उन्हें क्लीन चिट दी थी. अगर किसी को इस पर और कुछ कहना है तो उसकी बात भी सुनी जा सकती है.''

फडणवीस ने इस मामले में भी कहा कि जिस पार्टी के दो पूर्व मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं, उन्हें हमारे मंत्रियों पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.

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