मामला नालंदा जिले के इस्लामपुर इलाके का है. न्यूज 18 में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ 17 अप्रैल को 16 साल का लड़का बाज़ार में एक महिला का पर्स छीनकर भागा था. CCTV फुटेज की मदद से फिर उसे पकड़ा गया और उसी दिन उसे कोर्ट ले जाया गया. जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट मानवेंद्र मिश्रा ने जब उससे कारण पूछा, तो लड़के ने पूरी बात बताई.
लड़के के परिवार को जरूरत की सभी चीज़ें उपलब्ध करवाने के साथ साथ सरकारी योजनाओं की मदद पहुंचाने के निर्देश भी अदालत की तरफ से दिए गए. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)बच्चे ने बताया कि उसकी मां और भाई खटोलना बिगहा में एक कच्ची झोंपड़ी में रहते हैं. मां का मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं है. भाई छोटा है. पहले छोटा-मोटा काम करके कमा लेते था कुछ, और परिवार का पेट पाल रहा था. लेकिन लॉकडाउन की वजह से काफी दिक्कत आ गई. काम मिलना बंद हो गया. घर में कुछ खाने को नहीं था, इस वजह से चोरी करने निकला था.
ये सुनकर मानवेंद्र मिश्रा ने उसे बरी कर दिया. यही नहीं, अधिकारियों को आदेश दिए कि सभी सरकारी योजनाओं के तहत परिवार को जो भी राशन, आवास इत्यादि मिलना चाहिए, उसका प्रबंध किया जाए. जब अदालत से ये निर्देश मिले तो इस्लामपुर के BDO (ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रियदर्शी राजेश बच्चे के गांव पहुंचे. वहां सभी ज़रूरी दस्तावेज जैसे लड़के का आधार कार्ड, और परिवार का राशन कार्ड वगैरह बनवाने की बात कही. भोजन और जरूरी चीज़ें भी परिवार को दिलाईं.
पुलिस को आदेश दिए गए हैं कि चार महीने बाद वो जज को लड़के की प्रोग्रेस रिपोर्ट दे. ताकि इस बात का आंकलन किया जा सके कि उसका बर्ताव ठीक है या नहीं.
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