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विदेश में दिन-रात मेहनत कर कोरोना की वैक्सीन टेस्ट कर रही हैं ये इंडियन हीरो

ऑक्सफ़ोर्ड की टीम में हैं चंद्रा दत्ता.

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ऑक्सफ़ोर्ड की टीम में वैक्सीन की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी चंद्रा पर ही है. वहां के जेनर इंस्टिट्यूट ने ये वैक्सीन बनाई है. (तस्वीर साभार: eisamay.indiatimes,com/ Pexels)
ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम जोर शोर से कोरोनावायरस की वैक्सीन बनाने में लगी हुई है. इसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेज दिया गया है. अगर इसका असर दिखाई देता है, तो फिर वैक्सीन बड़ी संख्या में बनानी शुरू की जाएगी.
इस पूरे प्रोसेस में एक नाम उभर कर सामने आया है. वो है चंद्रा दत्ता का. कोलकाता की चंद्रा वैक्सीन बनाने वाली टीम में क्वालिटी एश्योरेंस मैनेजर के पद पर हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक़ वो यूनिवर्सिटी की क्लिनिकल बायोमैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में काम करती हैं. ये फैसिलिटी पूरी वायरल इंफेक्शंस के लिए बनने वाली वैक्सीन्स का क्लिनिकल ट्रायल करती है.
Chandra Dutta Linkedin चंद्रा पिछले दिसंबर में अपने मम्मी-पापा से मिलने आई थीं. उनके पेरेंट्स भी चंद्रा की इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं. (तस्वीर साबहर: चंद्रा दत्ता LinkedIn Profile)

कोलकाता से UK तक का सफ़र
चंद्रा कोलकाता के टॉलीगंज से हैं. हेरिटेज इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से उन्होंने इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक की डिग्री ली. 2009 में UK चली गई थीं. वहां की लीड्स यूनिवर्सिटी से बायोसाइंस में मास्टर्स की डिग्री लेने के लिए.
चंद्रा का मुख्य काम है ये देखना कि वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया में सभी नियम-कायदों का ढंग से ध्यान रखा जा रहा है या नहीं. कहीं कोई गलती या कमी तो नहीं रह गई है. उन्होंने बताया,
जब मैं पूरा पेपरवर्क चेक कर लेती हूं, तो क्वालिटी प्रोफेशनल वैक्सीन के बैच को सर्टिफिकेशन देते हैं. कि अब उसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजा जा सकता है. ये चीज़ COVID 19 की वैक्सीन के साथ बुधवार (22 अप्रैल) को हुई. ये हमारे लिए एक बड़ा दिन था. हमने सेलिब्रेट किया. ज़ूम ऐप पर साथ में वाइन पी और केक खाया. अपने अपने घरों में बैठे हुए.
उन्होंने बताया कि पहले वैक्सीन पर काम कॉन्फिडेंशियल तौर पर चल रहा था. इस वजह से इसके बारे में बात नहीं की जा रही थी और सब पर बहुत प्रेशर था. ट्रायल पास होने से पहले पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट में वैक्सीन बनानी शुरू कर दी जाएगी ताकि जैसे ही ट्रायल पास हो, इसे लोगों में बांटा जा सके. अभी तक 600 वैक्सीन बनाई जा चुकी हैं. 1000 बन जाने के बाद बड़ी मात्रा में उसे बनाना शुरू किया जाएगा.
ऑक्सफ़ोर्ड की टीम अगले महीने 800 वालंटियर्स को वैक्सीन देने की कोशिश में लगी है. अगर UK में ट्रायल सफल रहेगा, तो उसके बाद केन्या को अप्रोच किया जाएगा. आम तौर पर किसी भी वैक्सीन को बनने में तीन से चार साल का समय लगता है. वहीं COVID 19 की वैक्सीन जल्द से जल्द बनाने की कोशिश की जा रही है. मार्च के तीसरे हफ्ते में अमेरिका में भी 45 वालंटियर्स को ट्रायल वैक्सीन का शॉट दिया जा चुका है. देखना ये है कि जिन लोगों पर इसका ट्रायल किया गया, उनके ऊपर वैक्सीन कैसा असर करती है. आगे वैक्सीन से जुड़ी सारी डेवेलपमेंट इस बात पर निर्भर करेगी.


वीडियो: साइंसकारी: जानिए कोरोना वायरस की वैक्सीन कब आएगी और इसको बनाने का प्रॉसेस क्या है?

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