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ठंड आते ही सर्दी, ज़ुकाम, खांसी; आयुर्वेद के पास है तोड़

चाय में तुलसी के अलावा और क्या-क्या डालें कि गले को आराम मिल जाए?

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जब भी मौसम का मिजाज़ बदलता है, ठंड आती है तो ठंडी हवा नाक के रास्ते गले से होते हुए फेफड़ों तक जाती है
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

साक्षी 27 साल की हैं. उन्हें अस्थमा है. दिल्ली में रहती हैं. अब शहर का नाम सुनते ही आपको अंदाज़ा हो गया होगा कि इस मौसम में उनकी क्या हालत होती है. वैसे जो भी लोग नॉर्थ इंडिया में रहते हैं, वे सभी इस मुसीबत से जूझते हैं. मौसम बदला नहीं, ठंड आई नहीं कि आसमान छोड़िए, सामने की बिल्डिंग दिखना तक बंद हो जाती है. इतना प्रदूषण, इतना स्मॉग कि सांस लेना मुश्किल. गला खराब हो जाता है. खांसी, ज़ुकाम, बुखार भी हमला कर देता है. कुल मिलाकर ये मौसम आपकी सेहत का दुश्मन है.
अब वापस आते हैं साक्षी की कहानी पर. जब एक हेल्दी इंसान की इस मौसम में तबियत खराब हो जाती है तो उनको तो पहले से ही सांस की दिक्कत है. उनके लिए और मुसीबत. इसलिए साक्षी चाहती हैं कि हम इस मौसम में खांसी, ज़ुकाम, सांस की दिक्कत जैसी समस्याओं से निपटने का हल उनको बताएं. साथ ही कुछ ऐसी आयुर्वेदिक टिप्स दें, जो वो आसानी से घर पर कर पाएं. तो ये सब तो हम बताएगें ही. पर पहले ये समझ लेते हैं कि मौसम बदलने पर आपकी तबियत बिगड़ती क्यों है. सुनिए. मौसम बदलने पर, ठंड आने पर तबियत क्यों खराब होती है? ये हमें बताया डॉक्टर अंकित सिंघल ने.
Dr Ankit Singhal, Author at The Daily Guardian डॉक्टर अंकित सिंघल, पल्मोनोलॉजिस्ट, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली


-जब भी मौसम का मिजाज़ बदलता है, ठंड आती है तो ठंडी हवा नाक के रास्ते गले से होते हुए फेफड़ों तक जाती है.
-ऐसे में नाक से लेकर फेफड़ों तक शरीर के अंदर सूजन आ जाती है.
-इससे खांसी, सांस फूलना और गला खराब हो सकता है.
-आमतौर पर जो लोग पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित हैं, उनको ये परेशानी ज़्यादा होती है.
-बड़े-बुज़ुर्ग, बच्चे जो ठंडी हवा के संपर्क में आते हैं उनको खांसी, ज़ुकाम, सांस फूलना जैसी दिक्कतें ज़्यादा होती हैं.
-इस मौसम में वायरल इन्फेक्शन, ख़ासतौर पर फेफड़ें का इन्फेक्शन, जैसे निमोनिया हो सकता है. क्या सावधानियां बरतें? -जो भी लोग दवाइयां खाते हैं, ख़ासतौर पर फेफड़ों की बीमारी के लिए, उन्हें दवाई सख्ती से लेते रहना चाहिए.
-डॉक्टर से मिलते रहें.
-पानी पीते रहें. शरीर में पानी की मात्रा कम न होने दें.
Delhi pollution: Air quality deteriorates to 'severe' category आमतौर पर जो लोग पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित हैं, उनको ये परेशानी ज़्यादा होती है


-रोज़ कम से कम 3-4 लीटर पानी पीजिए.
-अच्छी डाइट लें जिसमें प्रोटीन, विटामिन सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड हों.
-जब इस मौसम में घर से बाहर निकलते हैं तो मास्क ज़रूर पहनें.
-कपड़े का मास्क या N95 मास्क लगा सकते हैं.
ठंड के मौसम में, स्मॉग में तबियत अक्सर ख़राब क्यों हो जाती है ये तो समझ में आ गया. अब आते हैं अपने अगले ज़रूरी सवाल पर. इससे निपटने के लिए क्या किया जाए.
आयुर्वेद में सर्दी, ज़ुकाम, खांसी और इस मौसम में होने वाली हेल्थ प्रॉब्लम्स से निपटने का तोड़ मौजूद है. कुछ बहुत ही आसान चीज़ें हैं जो आप घर पर कर सकते हैं? अब क्या हैं वो टिप्स, जानते हैं आयुर्वेद एक्सपर्ट से. आयुर्वेद की मदद से इस मौसम में बीमारियों से कैसे बचें? ये हमें बताया डॉक्टर शीशपाल हीरा ने.
Dr. Sheeshpal Heera - Book Appointment, Consult Online, View Fees, Contact Number, Feedbacks | Ayurvedic Doctor डॉक्टर शीशपाल हीरा, बाम्स, हीरा आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र, पालमपुर


-गर्म पानी का इस्तेमाल करें.
-गर्म पानी का इस्तेमाल करने से कई तरह के वायरल इन्फेक्शन से भी बचा जा सकता है.
-गर्म पानी से गला साफ़ रहता है, खांसी से भी आराम मिलता है.
-तुलसी की चाय पिएं.
-अपनी चाय में तुलसी के पत्ते ज़रूर डालें.
-मुलेठी ज़रूर डालें.
-काली मिर्च ज़रूर डालें.
-अगर किसी को सर्दी, खांसी, ज़ुकाम यहां तक कि कोविड भी है तो ये बहुत उपयोगी योग है.
NDA government is trying to align Ayurveda with modern knowledge | The Indian Express आयुर्वेद में सर्दी, ज़ुकाम, खांसी और इस मौसम में होने वाली हेल्थ प्रॉब्लम्स से निपटने का तोड़ मौजूद है


-च्यवनप्राश लें. इसमें वो सभी जड़ी-बूटियां होती हैं जो इम्युनिटी मज़बूत करती हैं.
-आयुर्वेद में च्यवनप्राश को टीबी से लेकर खांसी, ज़ुकाम और चेस्ट इन्फेक्शन में इस्तेमाल किया जाता है.
-अश्वगंधा चूर्ण खुद में एक बहुत बड़ा इम्युनिटी बूस्टर है.
-अश्वगंधा चूर्ण साइनस और एलर्जी को ठीक करने में मददगार साबित होता है.
-मास्क ज़रूर पहनें. मास्क कोविड से लेकर वायरल इन्फेक्शन और प्रदूषण से बचने में मदद करता है.
-कई लोग मास्क उतार चुके हैं, ये बहुत ग़लत है.
-क्योंकि कोविड और फ्लू ड्रॉपलेट इन्फेक्शन से फैलते हैं, ऐसे में मास्क उनको रोकने में मदद करता है.
-इसलिए खांसी, ज़ुकाम, वायरल इन्फेक्शन से बचने के लिए मास्क पहनें.
इस मौसम में एलर्जी, खांसी, ज़ुकाम जैसी दिकत्तों से बचना है तो डॉक्टर साहब ने जो टिप्स बताई हैं, उनको फॉलो करिए. बहुत आराम मिलेगा..

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