
2007 में एड्स अवेयरनेस कार्यक्रम के दौरान रिचर्ड, शिल्पा और सनी देओल की तस्वीर
2007 में हुई इस घटना के बाद, राजस्थान के मुंडावर जिले के एक जूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास एफआईआर दर्ज की गई. जिसमें शिल्पा शेट्टी और रिचर्ड गेयर दोनों के खिलाफ़ सामाजिक कार्यक्रम के दौरान अश्लीलता फैलाने का आरोप शामिल था. इस एफाईआर को जूडिशियल मजिस्ट्रेट से अनुमति मिलने के बाद मामला कोर्ट में गया.
एफआईआर में शिल्पा और रिचर्ड पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 292, 293, 294 (अश्लीलता) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी और महिलाओं का अश्लील प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था.
साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को रज़ामंदी देते हुए इसे मुंबई ट्रांसफर कर दिया था . शिल्पा ने कोर्ट में की थी अपील

शिल्पा ने कोर्ट में अपील दर्ज की
इस मामले के बाद शिल्पा शेट्टी ने केस को मुंबई की अदालत में ट्रांसफर करने की याचिका दर्ज की थी. जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में अनुमति दे दी. इसके बाद केस की सुनवाई मुंबई के बैलार्ड पियर में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा की जा रही थी.
शिल्पा ने ऐडवोकेट मधुकर दलवी की मदद से IPC की धारा 239 (पुलिस रिपोर्ट और डॉक्युमेंट्स पर विचार करने के बाद केस से बरी ) और धारा 245 (सबूत पर विचार करने के बाद केस से बरी ) के तहत आरोपमुक्त करने की अपील की थी.
शिल्पा की तरफ़ से कोर्ट में दिए एप्लीकेशन में कहा गया है कि उनके खिलाफ आरोप केवल इतना है कि उन्होंने रिचर्ड गेयर द्वारा किस किए जाने पर विरोध नहीं किया, इस आधार पर उन्हें अपराध की साजिश करने , या अपराधी साबित नहीं किया जा सकता.15 साल बाद आया फैसला
धारा 239 के तहत शिल्पा का एप्लीकेशन कोर्ट में स्वीकार कर लिया गया. मुंबई की अदालत ने 24 जनवरी को, केस दर्ज होने के लगभग 15 साल बाद शिल्पा शेट्टी शेट्टी के केस से बरी किया.
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक , मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट केतकी चव्हाण ने कहा,अदालत के आदेश में कहा गया कि
"ऐसा लगता है कि आरोपी शिल्पा शेट्टी, पहले आरोपी रिचर्ड गेयर के कथित कृत्य की शिकार हैं। शिकायत में किसी भी कथित अपराध के लिए कोई भी पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं. "
"अंतिम रिपोर्ट के साथ अटैच कोई भी कागजात इस बात की पुष्टि नहीं करते कि कथित आरोपी ने आईपीसी की धारा 34 के तहत कोई आरोप किया है. "कोर्ट ने यह आदेश बीते सोमवार यानी 24 जनवरी को दिया.
क्या है लोगों के रिएक्शन ?
इस खबर के बाहर आते ही लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर करनी शुरू कर दी. प्रतिक्रियाएं बहुत मिली - जुली हैं. कुछ प्रतिक्रियाएं देखिए :
एक यूजर ने लिखा,
"उन जजेस को एक बार सोचना चाहिए जो ऐसी शिकायतें दर्ज करने वालों पर बिना कोई जुर्माना लगाए, इन केसेस को डिसमिस नहीं करते. सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों को नियुक्त और खारिज क्यों नहीं कर सकता. और अपने जजेस को ऐसे केसों को पब्लिसिटी के नाम पर खारिज करना क्यों नहीं सिखाता. "
" शिल्पा शेट्टी को डिस्चार्ज करने वाले इस सोचे - समझे फैसले का स्वागत है. वह सच में विक्टिम हैं. अगर शिल्पा ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई होती तो रिचर्ड गेयर असली मुसीबत में पड़ जाते. "
एक अन्य यूज़र ने लिखा ,
"इस तरह के हास्यास्पद मामलों के लिए भी इस देश के ऐलीट क्लास को न्याय पाने के लिए 15 साल इंतजार करना होगा! कल्पना कीजिए कि आम लोगों के लिए यहां न्याय पाना कितना मुश्किल होगा. "
"अश्लीलता शब्द की व्याख्या की कमी के हर चीज़ में अश्लीलता देखने की इजाज़त देता है. यह केस के जज पर भी निर्भर करता है कि वो अश्लीलता को कैसे देखते हैं ? ऐसा कोई कानून नहीं है जो बिकनी और हॉट पैंट को भी अश्लील कहे जाने से बचाता हो. "
ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि शिल्पा शेट्टी या किसी ऐक्ट्रेस को बिना उसकी मर्ज़ी के पब्लिकली किसी ने किस किया हो. ऐसा ही एक वाकया पहले भी हो चुका है. उनकी एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें एक मंदिर के पुजारी उन्हें किस करते हुए नजर आए थे. इसको लेकर भी सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाता है.

तस्वीर में शिल्पा के साथ मौजूद पंडित ने उन्हें चूमा था
इस पूरे मामले में न केवल ये सोचने लायक है कि अश्लीलता को कैसे परिभाषित किया जाए. बल्कि ये भी समझने वाली बात है कि इतने वर्षों में हम 'कंसेंट' यानी महिला छुए या चूमे जाने से सहज है भी या नहीं, के मायने जान नहीं पाए हैं.














