ये कहानी एक पकवान की है. जिसे पकाने वाले भूखे छूट जाते थे. ग़ुलामों को उसे खाने की इजाज़त नहीं थी. फिर एक दिन बग़ावत हो गई. बाग़ियों ने शासकों का बोरिया-बिस्तर बांध दिया. आज़ादी की बेड़ियां टूट चुुकीं थी. उन्होंने पहली बार मन से अपना बनाया पकवान चखा. तब जाकर उन्हें उसका स्वाद पता चला. उस पकवान को नाम दिया गया, ‘द सूप ऑफ़ फ़्रीडम’. यानी, आज़ादी का शोरबा. आज जानेंगे, इस शोरबे का इतिहास क्या है? ये बनता कैसे है? और, आज के दिन हम इसकी चर्चा क्यों कर रहे हैं?
दुनियादारी: हैती की वो डिश जो उनकी आज़ादी का प्रतीक बन गई
इस डिस को 'द सूप ऑफ़ फ़्रीडम’ कहा गया.
Advertisement
Add Lallantop as a Trusted Source

Advertisement
Advertisement

.webp?width=80)


















