क्रांति के 42 बरस बाद. 22 फ़रवरी 2011. मुअम्मार गद्दाफ़ी एक बार फिर भाषण दे रहा था. इस बार स्टेट टीवी पर. उसके चेहरे से गुस्से के साथ-साथ डर भी झलक रहा था. वो अपने ही लोगों को धमका रहा था. गद्दाफ़ी ने अपने भाषण में ‘ज़ेंगा-ज़ेंगा’ शब्द का इस्तेमाल किया. हिंदी में इसका मतलब होता है - गली-गली. उसने कहा, ‘मेरे आदमी तुम्हें गली-गली में, घर-घर में घुसकर मारेंगे. मैं लीबिया को अपने हाथों से जाने नहीं दूंगा.’ये भाषण देने के बाद ही उसे भागना पड़ा. ऊपर नाटो सेना के फ़ाइटर जेट्स थे और नीचे जनता उसके ख़ून की प्यासी हो चुकी थी. एक समय क्रांति का नायक रहे मुअम्मार गद्दाफ़ी से लोगों का मोहभंग क्यों हुआ? उसे कुर्सी से उतारने के बाद लीबिया का क्या हुआ? और, आज के दिन हम लीबिया और गद्दाफ़ी की चर्चा क्यों कर रहे हैं? देखें वीडियो.
दुनियादारी: लीबिया में मुअम्मार गद्दाफ़ी की चर्चा फिर क्यों शुरू हो गई है?
एक समय क्रांति का नायक रहे गद्दाफ़ी से लोगों का मोहभंग क्यों हुआ?
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