2015 में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों को लेकर कानून बनाने की मांग के साथ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी. तब कोर्ट ने ये टिप्पणी की थी. लेकिन केंद्र सरकार ने 10 अगस्त को राज्यसभा में एक बिल पेश कर दिया. इसका नाम है- 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, शर्तें और पद अवधि) विधेयक, 2023'. और यहीं से शुरू हो गया विवाद. विवाद इस कानून को लेकर ही नहीं है. ये बिल अभी टेबल हुआ है पास नहीं. दो बिल और हैं जिनको सरकार ने संसद से पास करा लिया है. जन विश्वास बिल और डेटा प्रोटेक्शन बिल. अब इन्हें देश के कानूनों की लिस्ट में गिना जाएगा. क्या है इन तीन बिलों का तिया-पांचा? क्यों इन पर विवाद हो रहा है?
दी लल्लनटॉप शो: क्या अब केंद्र सरकार चलाएगी चुनाव आयोग?
चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर बवाल क्यों मचा है?
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