पुणे (Pune) में ज़ीका वायरस के दो और मामले सामने आए हैं. इनमें से एक गर्भवती महिला है (Another pregnant woman tested positive for Zika virus infection). इन मामलों के बाद शहर में ज़ीका वायरस के मामलों की संख्या 6 हो गई है. अधिकारियों ने बताया कि महिला एरंडवाने के गणेश नगर की रहने वाली हैं. वो ज़ीका वायरस से संक्रमित पहली महिला के घर से महज 150 मीटर की दूरी पर स्थित हैं. वहीं मुंधवा के एक 22 साल के व्यक्ति में भी वायरस का टेस्ट पॉज़िटिव आया है.
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Pune में गर्भवती महिला समेत 2 और Zika virus के मामले मिले हैं. इसके बाद देश में इसके 6 मामले हो चुके हैं. ज़ीका वायरस के लक्षण, शुरुआत और फैलने की कहानी जान लीजिए.


पुणे नगर निगम (PMC) की स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कल्पना बलिवंत ने बताया कि इकट्ठे किए गए सैंपल्स में 12 एरंडवाने से थे. इनमें सात गर्भवती महिलाओं के थे. इनमें दो गर्भवती महिलाओं की रिपोर्ट पॉज़िटिव मिली है. मुंधवा से इकट्ठे किए गए 13 सैंपल्स में किसी भी गर्भवती महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं थी. ज़ीका से संक्रमित गर्भवती महिलाओं को ज़्यादा ख़तरा बताया जाता है. इसीलिए उनकी ज़्यादा जांच की जा रही है. प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है. पुणे में ज़ीका वायरस का फैलना चिंता की बात है, इसीलिए संक्रमण को रोकने की कोशिश की जा रही है.
इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, बलिवंत ने आगे बताया कि प्रभावित क्षेत्रों के रहने वालों को मच्छरों के काटने से बचने के लिए सावधानी बरतने और ज़ीका के किसी भी लक्षण के दिखने पर जांच कराने की सलाह दी गई है. पुणे में वायरस से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए PMC स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है. अफ़सरों ने आश्वासन दिया है कि वो स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं. साथ ही शहर में वायरस को नियंत्रित करने के लिए ज़रूरी उपाय किए जा रहे हैं.
इस वायरस के संपर्क में आने पर उसी तरह के लक्षण नज़र आते हैं जैसे डेंगू होने पर. जैसे- बुखार, सिरदर्द, आंखों में जलन और बदन दर्द. इसीलिए इसे डेंगू का कज़िन भी कहा जाता है. 2015 में ब्राज़ील में सामने आए माइक्रोसिफैली के मामलों से पहले वैज्ञानिक ये नहीं जानते थे कि ज़ीका से माइक्रोसिफैली भी हो सकती है. किसी बच्चे को माइक्रोसिफैली होने की संभावना तब होती है, जब कोई प्रेगनेंट औरत ज़ीका की चपेट में आए. माइक्रोसिफैली के अलावा ज़ीका से गुलियन बार सिंड्रोम और दूसरी न्योरोलॉजिकल बीमारियां भी हो सकती हैं.
कैसे पड़ा नाम ?ज़ीका की खोज युगांडा के ज़ीका जंगलों में 1947 में हुई थी. इसीलिए इसका नाम ज़ीका वायरस है. वैज्ञानिक युगांडा के बंदरों में येलो फ़ीवर पर रिसर्च कर रहे थे. तभी ये वायरस पहचान में आया था. इंसानों में इसके पहले केस 1952 में युगांडा और तंज़ानिया में मिले थे. साल 2015 में ज़ीका वायरस की वजह से दक्षिण अमेरिकी देशों में खास तरह के बच्चे पैदा होने से हड़कंप मच गया था.
फैलता कैसे है?अगर ज़ीका को डेंगू का कज़िन कहा जाता है, तो ये फैलता भी उसी तरह है. माने एडीज़ मच्छर के काटने से. यही मच्छर चिकन गुनिया भी फैलाता है. ये मच्छर नम और गर्म जगहों में पाया जाता है, इसलिए इक्वेटर के पास के इलाक़ों में इसके मामले ज़्यादा पाए जाते हैं. एक प्रेगनेंट मां से ज़ीका उसके बच्चे तक पहुंचता है. इसके अलावा ज़ीका सेक्स के दौरान भी एक पार्टनर से दूसरे तक पहुंच सकता है. WHO का कहना है कि इसका मतलब ये हुआ, कि ज़ीका ब्लड ट्रांसफ्यूज़न (एक व्यक्ति का खून दूसरे को चढ़ाने) से भी फैल सकता है.
वीडियो: ज़ीका वायरस क्या है जिससे केरल में 24 साल की गर्भवती महिला संक्रमित पाई गई






















