AFSPA के तहत सेना को विशेष अधिकार मिला हुआ है. कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि सत्ता में आने के बाद इस कानून की समीक्षा करेंगे. इसके बाद से ही बीजेपी ने इसे मुद्दा बना दिया और आलोचना शुरू कर दी. लेकिन अब केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी AFSPA के मुद्दे पर बोल पड़े हैं. केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के चुनाव प्रचार के दौरान नोएडा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा-
AFSPA को हटाकर कांग्रेस सेना को कमजोर करना चाहती है. त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों और मेघालय से सरकार पहले ही AFSPA हटा चुकी है. कश्मीर में स्थिति सामान्य होते ही, वहां से AFSPA वापस कर देंगे. अशांत क्षेत्रों में जहां माओवादी और आतंकी सक्रिय हैं सरकार ने AFSPA को लागू कर सेना को मजबूत किया है. कांग्रेस के लोग सेना को कमजोर करना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे.AFSPA है क्या ? ये वही कानून है, जिसके खिलाफ मणिपुर की इरोम शर्मिला ने 16 साल भूख हड़ताल की थी. इस कानून को 1958 में पास किया गया था. इसके तहत पूर्वोत्तर में सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार मिले थे. जुलाई 1990 के बाद इसे कश्मीर में भी लागू किया गया. इसके तहत आर्मी बिना वॉरंट किसी को अरेस्ट कर सकती है. गाड़ियों को जांच के लिए रोक सकती है. किसी जगह पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर वहां की जांच कर सकती है. किसी ने सेना की संपत्ति पर कब्जा किया है, तो उसे भी जब्त कर सकती है. कुछ लोग इसे काला कानून कहते हैं. सैन्य बर्बरता के इल्जाम लगाते हैं. जो लोग इस कानून के पक्ष में हैं, उनकी दलील है कि अशांत इलाकों में AFSPA का होना जरूरी है. इसे हटाना खतरनाक होगा. ये फौज की ताकत को कम कर देगा. जब सरकारों को लगता है कि AFSPA में छूट दी जानी चाहिए तो सरकारें जरूरी कदम उठाती हैं.

AFSPA के खिलाफ मणिपुर की इरोम शर्मिला ने 16 साल भूख हड़ताल की थी.
कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में AFSPA के समीक्षा की बात कही है. विवाद के बाद कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा AFSPA जहां महत्वपूर्ण है, वहां लागू रहेगा. जहां उसमें ढील देने की जरूरत है, दी जाएगी. लेकिन बगैर सेना से पूछे ऐसा नहीं किया जाएगा.
2015 में बीजेपी-पीडीपी सरकार ने AFSPA की समीक्षा की बात कही थी
ऐसा नहीं है कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पहली बार AFSPA पर कुछ बोला है. बीजेपी 2015 में भी AFSPA पर वादे कर चुकी है. वो दौर तब का था जब 2015 में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मिलकर कश्मीर में सरकार बनाई थी. दोनों पार्टियों ने गठबंधन में सरकार चलाने के लिए एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाया था. AFSPA पर दोनों पार्टियों का नजरिया अलग-अलग होने के बाद भी वादा किया गया था कि इस प्रोग्राम के तहत कश्मीर के लोगों के हितों का ध्यान रखते हुए AFSPA की समीक्षा की जाएगी.

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का कहना है कि AFSPA को लेकर कांग्रेस जो वादा इस बार के लोकसभा चुनाव में कर रही है. बीजेपी उसे पहले ही कर चुकी है.
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी ट्वीट कर कहा था कि पीडीपी ने बीजेपी के साथ अपने गठबंधन के एजेंडे में जिस मुद्दे को शामिल किया था, उसका समर्थन करके कांग्रेस ने बड़ा साहस दिखाया है. इसका मतलब साफ है कि AFSPA को लेकर कांग्रेस जो वादा इस बार के लोकसभा चुनाव में कर रही है, बीजेपी उसे पहले ही कर चुकी है.
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