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तो क्या सोनारिका को बीच पर 'पार्वती' अवतार में जाना चाहिए?

वो चाहे तो न्यूड फोटोशूट कर सकती है. चाहे तो लहंगे में बीच पर जा सकती है. उसकी मर्ज़ी है.

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फोटो - thelallantop
धार्मिक होना अच्छी बात है. लेकिन उसके साथ-साथ बेवकूफ होना खराब बात है. वो भी इस हद तक, कि टीवी शो में भगवान का रोल करने वाले लोगों को भगवान मान लेना. और उस एक्टर पर रियल लाइफ में भी 'भगवान' जैसा होने का नैतिक दबाव बनाना.
जिन्हें पता नहीं, उन्हें बता दें कि ऊपर वाली तस्वीर में सोनारिका भदौरिया हैं. वो एक्टर, जिन्होंने 'देवों के देव महादेव' नाम के एक एपिक शो में देवी पार्वती का किरदार निभाया था. किसी भी नॉर्मल इंसान की तरह ये छुट्टी पर थीं. मॉरिशस से अपनी तस्वीरें इन्स्टाग्राम पर लगाईं. जिनमें वो बिकिनी में हैं. और लोगों ने इनकी नाक में दम कर दिया.
सोनारिका ने लिखा:
मुझे लगा हमारी उम्र के लोग इतने समझदार हैं कि एक एक्टर की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को अलग-अलग देखना जानते होंगे. वो समझते होंगे कि हमारी भी अपनी जिंदगी होती है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सिर्फ इसलिए कि मैं एक लड़की हूं, और एक देवी का किरदार किया, आप फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन के नाम पर मुझे कुछ भी कहते रहेंगे? लोग कहते हैं कि ये सब एक सेलेब्रिटी की जिंदगी का हिस्सा होता है. लेकिन लोगों को ये समझना चाहिए कि मैं भगवन नहीं, इंसान हूं. मेरे अंदर संवेदनाएं हैं, मुझे बुरा लगता है.
एक समय 'राम' का किरदार निभाने वाले गुरमीत चौधरी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. जैसे ही उनका शो रामायण ख़त्म हुआ, अपने अगले शो में वो अपनी 'बेयर बॉडी' के साथ नज़र आए. लड़कियों ने उन्हें देखा. लोगों ने उनसे फिट रहने की प्रेरणा ली. इसी तरह शिव का रोल करने वाले मोहित राणा को सबने सेक्सी शिव, हॉट शिव कहा. फिर लड़की के केस में इस तरह की 'slut shaming' क्यों?
slut shaming और body shaming के बारे में बात करें, तो सोनारिका वो पहली सेलेब्रिटी नहीं हैं, जिसके साथ ऐसा बर्ताव किया गया. लोगों ने कभी ज़रीन खान को 'मोटा' कहा तो कभी सोनम कपूर को 'फ्लैट चेस्ट'. लेकिन यहां समस्या कुछ बड़ी हो जाती है. क्योंकि मसला लोगों की 'भावनाओं' का है.
sonarika bikini
Source: Instagram

चूंकि एक्टर ने एक भगवान का रोल निभा लिया है, उसको पूरी लाइफ के लिए ड्रामा कंपनी बन जाना चाहिए. सोनारिका को हर जगह पार्वती अवतार में जाना चाहिए. बीच पर या पूल में गहने पहन कर उतरना चाहिए.
रामानंद सागर की रामायण में 'राम' बनने वाले अरुण गोविल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो चेन स्मोकर थे. लेकिन एक बार राम बनने के बाद कभी पब्लिक में सिगरेट नहीं पी सके. क्योंकि लोगों को यकीन ही नहीं होता कि जिसे वो भगवान मानते हैं वो सचमुच सिगरेट जैसी चीज को हाथ लगा सकता है. सिगरेट आपकी हेल्थ के लिए खराब हो सकती है. लेकिन सिगरेट पीना या न पीना किसी का निजी फैसला है. कोई किसी व्यक्ति पर सिगरेट छोड़ने का सामाजिक और नैतिक दबाव कैसे डाल सकता है? 
उसी देश ने , जो सोनारिका को बिकिनी पहनने के लिए लताड़ रहा है, ने साल 2015 में गूगल पर सबसे ज्यादा सनी लियोनी को सर्च किया है. सनी लियोनी खूबसूरत हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह सोनारिका भदौरिया हैं. क्योंकि हम खूबसूरती को माप नहीं सकते. लेकिन पब्लिक कभी सनी लियोनी और 'पार्वती' जैसे पवित्र कैरेक्टर को एक निगाह से नहीं देखेगी. क्योंकि हमारी निगाह औरतों को केवल दो रूपों में देखने के लिए ट्रेन की गयी है: 'देवी', जो त्याग की मूर्ति और होती है, या 'रंडी', जिसे आप अंग्रेजी में स्लट कहकर कूल महसूस करते हैं. जब 'देवी', 'रंडी' वाले कपड़े पहन लेती है तो हमारा दिमाग उसे अपना नहीं पाता. क्योंकि इन दो तरह की औरतों का मेल हो सकता है, या इनके बीच कोई तीसरी तरह की औरत भी हो सकती है, ये हमारी सोच के दायरे से बाहर होता है.
सोनारिका ही नहीं, किसी को भी न अपने कपड़े बदलने की जरूरत है. न अपनी तस्वीरें डिलीट करने की. ज़रुरत लोगों को अपनी सोच का दायरा बढ़ाने की है.
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