यूक्रेन को सोवियत संघ से आज़ाद हुए 30 साल हो चुके हैं. हालांकि रूस अभी भी उसको अपना हिस्सा मानता है. इस साल 24 अगस्त को यूक्रेन अपनी आज़ादी की 31 वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है. लेकिन इस बार उसकी आज़ादी का जश्न फीका रहने वाला है. वजह रूस के हमले का डर. यूक्रेन ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजधानी कीव में होने वाले सभी कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया है.
यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बमबारी का खतरा क्यों बना हुआ है?
राजधानी कीव में होने वाले सभी कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.


यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस आज़ादी के मौके पर कुछ ग़लत कर सकता है. कार्यक्रमों पर ये प्रतिबंध सोमवार 25 अगस्त तक रहेगा.
रूस-यूक्रेन से जुड़ा एक और अपडेट है. 20 अगस्त को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाने वाले अलेक्जेंडर डूगिन को मारने की कोशिश की गई. इस कोशिश में उनकी जान तो बच गई लेकिन उनकी बेटी डारया डूगिना मारी गईं. मामले को लेकर अपडेट ये है कि रूस ने डूगिना की मौत का ज़िम्मेदार यूक्रेन को बताया है. रूसी सुरक्षा एजेंसी FSB का कहना है कि ये हत्या एक प्लान के तहत की गई है.
एजेंसी ने कहा कि एक यूक्रेनी महिला जुलाई में अपनी बेटी के साथ रूस आई थी. ये महिला असल में यूक्रेनी जासूस थी. उसने डूगिना मारी की बिल्डिंग में ही एक अपार्टमेंट किराये पर लिया. वो डूगिना मारी को पीछा करती थी. उसने इसके लिए एक छोटी गाड़ी भी ली थी. उसने गाड़ी में तीन अलग-अलग लाइसेंस प्लेटों का इस्तेमाल भी किया. पूरा प्लान बनाने के बाद उसने डूगिना की हत्या कर दी.
यूक्रेन ने रूस के इन आरोपों को नकार दिया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के एक सलाहकार ने कहा कि FSB की ये कहानी एक काल्पनिक दुनिया की लगती है. ये महज़ एक रूसी प्रचार है. हमारा इस हत्या से कोई लेना देना नहीं है.
अब बात करते हैं बांग्लादेश की.बांग्लादेश में बिजली संकट बढ़ता जा रहा है. अब सरकार ने बिजली कटौती का फ़ैसला किया है. कटौती के तहत, सरकारी दफ्तरों में काम के घंटों को कम किया जाएगा. इतना ही नहीं, अब बांग्लादेश में स्कूल में एक दिन की एक्स्ट्रा छुट्टी भी रहेगी. बांग्लादेश के स्कूलों में आमतौर पर शुक्रवार को छुट्टी होती थी, लेकिन अब शनिवार को भी स्कूल बंद रहेंगे. सरकारी दफ्तर पहले 8 घंटे खुले रहते थे अब इनमें केवल सात घंटे काम होगा. हालांकि, प्राइवेट ऑफ़िसों को अपने मुताबिक काम करने की आज़ादी दी गई है.
बांग्लादेश में बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है, लेकिन सरकार उसकी पूर्ति नहीं कर पा रही है. हालात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई इलाकों में दिन में केवल दो घंटे की बिजली मिल रही है.
अब समझते हैं कि ये संकट आया कैसे?बांग्लादेश अपनी अधिकतर बिजली, नेचुरल गैस वाले प्लांट में बनाता है. ज़रूरत की गैस का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से मंगवाया जाता है. दूसरे नंबर पर डीजल है. रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते ईंधन के दामों पर अच्छा-खासा फर्क पड़ा है. बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं. अगस्त की शुरुआत में पेट्रोल और डीजल के दाम डेढ़ गुणा तक बढ़ गए हैं. इसके ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट भी हुए थे. जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में बिजली संकट और बढ़ सकता है. अगर सरकार ने सही कदम नहीं उठाए तो हालात बिगड़ सकते हैं.
अब हंगरी का हाल जानते हैं.हंगरी में मौसम का अनुमान लगाने वाले दो अधिकारियों को उनकी नौकरी से निकाल दिया गया है. उनके ऊपर आरोप था कि उन्होंने मौसम का ग़लत अनुमान लगाया. लेकिन कहानी इतनी भी सीधी नहीं है. दरअसल हंगरी में शनिवार की शाम को सेंट स्टीफंस डे मनाया जा रहा था. इस मौके पर आतिशबाज़ी होनी थी. और आतिशबाज़ी भी छोटी-मोटी नहीं, बल्कि बड़े लेवल पर. इतना बड़ा कि इसे ‘यूरोप के सबसे बड़े आतिशबाज़ी प्रदर्शन’ के रूप में प्रोजेक्ट किया गया. राजधानी बुडापेस्ट में डेन्यूब नदी के पास 240 ऐसे पॉइंट बनाए गए थे जहां से 40 हज़ार से भी ज़्यादा फायरवर्क छोड़े जाते. सब कुछ तय था. तैयारियां हो चुकी थी. कि तभी मौसम विभाग की तरफ से चेतावनी आई. कार्यक्रम के 7 घंटे पहले ख़राब मौसम की आशंका जता दी गई. वक्त बीता लेकिन मौसम वैसा का ही वैसा रहा. इसमें कोई बदलाव नहीं आया. लेकिन सरकार ने चेतावनी के कारण पूरा कार्यक्रम हफ्ते भर के लिए स्थगित कर दिया. बाद में मौसम विभाग ने इसके लिए अपने फेसबुक पेज से एक माफीनामा भी शेयर किया. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
मौसम की बात चल ही रही है तो जाते-जाते तो चीन की भी ख़बर जान लीजिए. चीन के कई हिस्सों में इन दिनों सूखा पड़ा हुआ है. तापमान बढ़ रहा है. सूखे और गर्मी की वजह से फसलें भी प्रभावित हुई हैं, चीन की यांगत्सी नदी काफ़ी अहम मानी जाती है. गर्मी की वजह से वह भी सूख रही है. इसकी वजह से जलमार्ग से होने वाला यातायात बाधित हो गया है.
चीन के सिचुआन प्रांत में बड़ी मात्रा में बिजली, हाइड्रो पावरप्लांट के ज़रिए बनाई जाती है. लेकिन यहां भी सूखे की वजह से नदियों का जल स्तर नीचे चला गया है, जिससे जलप्रवाह में कमी आई है. जिससे प्लांट सही ढंग से काम नहीं कर पा रहे हैं और बिजली की कमी हो रही है. चीनी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार बारिश के लिए बादलों में रसायन का छिड़काव करने की तैयारी में है, ताकि फसल को बचाया जा सके.
चीन जे कर्ज के जाल में फंसे आलोस की कहानी




















