छोटे व्यापारियों ने बेजोस के खिलाफ कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन किया. इनका कहना है कि देश में ई-कॉमर्स साइट एमेजॉन की वजह से छोटे व्यापारियों को बुरी तरह से नुकसान हो रहा है. विरोध प्रदर्शन का आयोजन कर रहे अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ के प्रवीण खंडेलवाल BBC से बातचीत में कहा, एमेजॉन के 'कुटिल खेल और बुरे डिजाइन' ने भारत में दस हजार से ज्यादा छोटे व्यापारियों के बिजनेस को बर्बाद कर दिया.
बात यहीं खत्म नहीं होती. बेजोस के भारत आने से कुछ घंटों पहले ही रेगुलेटर कम्पटीशन कमीशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने एमेजॉन के बिजनेस प्रैक्टिस की जांच के आदेश दिए हैं. एमेजॉन के साथ ही फ्लिपकार्ट भी जांच के लपेटे में है. रेगुलेटर का कहना है कि सस्ती कीमत, मोबाइल के एक्सक्लूसिव लॉन्च, खूब छूट, ख़ास सेलर्स के लिए ख़ास ट्रीटमेंट जैसी चीजों की जांच की जाएगी. इस पर एमेजॉन ने अपने बयान में कहा,
हम इसको लेकर को-ऑपरेट करेंगे. जो आरोप लगाए गए हैं, उसकी जांच करेंगे. हमें इस बात का यकीन है कि हमने नियमों के मुताबिक़ ही काम किया है.एमेजॉन भारत में 60,000 से अधिक कर्मचारियों और पांच बिलियन डॉलर के निवेश के साथ, पांच लाख से ज्यादा विक्रेताओं के साथ काम करती है. (भारतीय कानून के तहत, साइट्स सिर्फ इंडिपेंडेंट सेलर्स के जरिये थर्ड-पार्टी माल बेच सकती है.) एमेजॉन का दावा है कि इसमें से आधे से अधिक विक्रेता छोटे शहरों से आते हैं. ये लोग लोकप्रिय त्योहारों के दौरान अमीर हुए हैं. भारत में अपने सबसे तेजी से बढ़ते बाजार में खुदरा विक्रेताओं को समर्थ बनाने के लिए हमने बहुत कुछ किया है.
बेजोस ने 15 जनवरी को घोषणा की कि एमेजॉन 2025 तक भारत से 10 बिलियन डॉलर (करीब 71 हज़ार करोड़ रुपये) का माल एक्सपोर्ट करने का लक्ष्य रख रही है. यहां छोटे और मध्यम बिजनेस को डिजिटलाइज़ करने में 1 बिलियन डॉलर (करीब 7100 करोड़ रुपये) का निवेश करने का वादा किया.

बेजोस ने सुबह राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और फिर मकर संक्रांति की दोपहर में पतंग उड़ाया.
भारत में करीब 1.2 करोड़ किराना की दुकानें हैं. ये सभी दुकानें अब धीरे-धीरे डेबिट-क्रेडिट कार्ड के जरिए पेमेंट ले रही हैं. इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के रिसर्चर्स के मुताबिक इन दुकानों पर करोड़ों डिजिटल ट्रांजेक्शन हो रहे हैं. लेकिन छोटे व्यापारी अपनी दिक्कतों को लेकर लगातार विरोध करते रहते हैं.
एमेजॉन को भारत से पहले भी कई देशों में जांच का सामना करना पड़ा है. पिछले साल यूरोपीयन यूनियन के एंटी-ट्रस्ट रेगुलेटर ने आरोपों के बाद जांच की थी. एमेजॉन पर आरोप था कि वह ऑनलाइन सामान बेचने वाले स्वतंत्र खुदरा विक्रेताओं के 'सेंसेटिव डेटा' का दुरुपयोग करती है. थर्ड पार्टी विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं के साथ रिश्तों को लेकर अमेरिका और यूरोप में भी एमेजॉन पर जांच जारी है.
भारतीय बाजार में बहुत संभावना है, लेकिन मुश्किलें भी हैं. भारत के छोटे व्यापारियों को राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है. इन्हें ऑनलाइन साइट्स से खतरा महसूस होता है. वहीं ऑनलाइन साइट्स द्वारा की जाने वाली तेज डिलीवरी और कम कीमतों से ग्राहक खुश नज़र आते हैं.
खस्ताहाल इकॉनमी से निपटने के लिए सरकार को फॉरेन इन्वेस्टमेंट्स की जरूरत है. रेगुलेटर और एमेजॉन के बीच मसले किस तरह सुलझेंगे, देखना इंटरेस्टिंग होगा.
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