
मद्रास हाई कोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट के मदुरै बेंच ने सोमवार को केपीटी गणेशन के पीआईएल पर सुनवाई करते हुए सवाल उठाया कि केंद्र सरकार ने किस आधार पर नए नोटों में देवनागरी न्यूमेरिक का इस्तमाल किया है. और केंद्र सरकार से इसका जवाब मांगा है. साथ ही हाईकोर्ट ने फाइनेंस मिनिस्ट्री से भी इस मुद्दे पर क्लैरीफिकेशन मांगा है. मार्केट में आए 500 और 2000 के नए नोटों पर रोमन न्यूमेरिक के साथ देवनागरी न्यूमेरिक को भी प्रिंट किया गया है. जो कि पुराने नोटों पर नहीं थे. पुराने नोटों पर सिर्फ रोमन न्यूमेरिक का ही इस्तेमाल होता था.पेटिशनर गणेशन ने भारतीय संविधान के आर्टिकल-343 का हवाला देते हुए पेटीशन फाइल किया है. और कहा, "केंद्र सरकार केवल रोमन न्यूमेरिक ही ऑफिशियली यूज कर सकती है. और देवनागरी का इस्तेमाल भारतीय संविधान के खिलाफ है. यहां तक कि ऑफिशियल लैंग्वेज एक्ट 1963 के अनुसार राष्ट्रपति भी इस तरह देवनागरी के इस्तेमाल के फैसले पर अपनी मुहर नहीं लगा सकते." गणेशन ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि नए नोटों को “इनवैलिड” डिक्लेयर किया जाए.
2000 का नया नोट

500 का नया नोट
साथ ही गणेशन ने दावा किया कि "रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के तहत ऐसा कोई प्रावधान भी नहीं है जो सेंट्रल बोर्ड की सिफारिश के बिना 2000 रुपए के बैंक नोट छापने की अनुमति देता हो. इसलिए ये आवश्यक और न्याय संगत होगा कि 2000 के नोटों के इस्तेमाल को बैन किया जाए. जब तक कि केंद्र सरकार ऑफिशियल यूज के लिए कोई लॉ नहीं बनाती है."
गणेशन तमिलनाडु में मुख्या विपक्षी पार्टी डीएमके के कार्यकर्ताहैं. डीएमके तमिल नेशनलिस्टों की पार्टी मानी जाती है. जिसका हिंदी-विरोधी आंदोलन में लंबा इतिहास रहा है. अब देखने वाली बात ये है कि मद्रास हाई कोर्ट ने जो सवाल उठाए हैं, उस पर मोदी सरकार का क्या जवाब आता है. या अब सच में नए नोट भी बैन कर दिए जाएंगे !
















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