Tarique Rahman: 30 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया का इंतकाल हो गया. इसके ठीक 5 दिन पहले यानी 25 दिसंबर को उन्हीं खालिदा जिया के ‘डार्क प्रिंस’ 17 साल के ‘निर्वासन’ के बाद बांग्लादेश लौटे थे. हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के वीवीआईपी अराइवल लाउंज से जब वो बाहर निकले तो कार पार्किंग के पास एक छोटी-सी घास वाली जगह पर चले गए. अपने जूते उतारे और नंगे पांव जमीन पर अपना पैर रख दिया. ये देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह देश की सियासत में 17 साल पहले उखड़े अपने पांवों को फिर से रोपने का प्रतीकात्मक ऐलान कर रहे हों. उनके समर्थक कार्यकर्ताओं का हुजूम भी वहीं था जो ‘संकटग्रस्त’ देश में सब कुछ ठीक कर देने वाले ‘मसीहा’ के तौर पर उन्हें देख रहा था.
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे तारिक रहमान की पूरी कहानी
Tarique Rahman: तकरीबन 17 साल के निर्वासन से लौटने के करीब-करीब दो महीने बाद अब तारिक रहमान बांग्लादेश के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए हैं.
.webp?width=360)

निर्वासन से लौटने के करीब-करीब दो महीने बाद अब तारिक रहमान बांग्लादेश के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए हैं. उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने ताजा चुनावों में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है और ये एकदम तय माना जा रहा है कि इस सरकार के मुखिया तारिक रहमान होंगे. वही तारिक रहमान जिन्हें कभी ‘डार्क प्रिंस’ कहा गया तो कभी ‘शैडो पीएम’. अब न तो वह शैडो हैं और न ही प्रिंस. 17 साल में वक्त ऐसा बदला है कि रहमान उसी देश के सिंहासन के सबसे नजदीक जा पहुंचे हैं, जहां की अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. भ्रष्टाचार के आरोप में सजायाफ्ता ये 'कैदी' अब देश के प्रधानमंत्री पद का सबसे बड़ा दावेदार है.
कौन हैं तारिक रहमान?तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं. उन्होंने ढाका के बीएएफ शाहीन कॉलेज से शुरुआती पढ़ाई की. इसके बाद ढाका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग में एडमिशन लिया. हालांकि, ये पढ़ाई पूरी करने के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है. बांग्लादेश के चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में तारिक ने अपनी शैक्षणिक योग्यता 12वीं तक बताई है.
20 नवंबर 1968 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में पैदा हुए तारिक रहमान के बारे में कहा जाता है कि वह 4 साल की उम्र में ही पुलिस हिरासत में रहे थे. हुआ ये था कि 1971 में बांग्लादेश पाकिस्तान से अपनी मुक्ति के लिए लड़ रहा था. इस दौरान कई सैन्य अधिकारियों को परिवार सहित हिरासत में ले लिया गया था. तारिक के पिता जिया उर रहमान आजादी की जंग लड़ रही मुक्ति वाहिनी के सेक्टर कमांडर थे. ऐसे में पाकिस्तानी सेना ने उनकी पत्नी खालिदा जिया और उनके दो बच्चों को भी हिरासत में लिया था.
‘सबसे छोटा कैदी’जिया उर रहमान और खालिदा जिया के बड़े बेटे तारिक रहमान को जेल नहीं हुई. कुछ समय हिरासत में रखने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था. फिर भी उनकी पार्टी बीएनपी आज तक उन्हें मुक्ति संग्राम के ‘सबसे छोटे कैदी’ के तौर पर प्रचारित करती है.
बांग्लादेश को आजादी मिलने के 10 साल बाद जब तारिक रहमान सिर्फ 15 साल के थे, उनके पिता और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के संस्थापक जिया उर रहमान की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इसके बाद उनकी मां खालिदा जिया ने पार्टी की कमान संभाली. जिया उर रहमान की मौत के 10 साल बाद वह प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गईं. साल 1991 में वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. उनके बेटे तारिक रहमान की राजनीतिक एंट्री औपचारिक तौर पर साल 1988 में मानी जाती है लेकिन वो पार्टी में प्रभावशाली रूप से 2001 के बाद ही एक्टिव हुए.
साल 2001 से 2006 तक बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की मदद से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार थी. खालिदा जिया प्रधानमंत्री थीं. उस समय तारिक सत्ता का सबसे ताकतवर केंद्र माने जाते थे. खालिदा जिया पर आरोप लगते कि वह सिर्फ नाम की प्रधानमंत्री हैं. जबकि उनके जरिए शक्ति तारिक के ही हाथ में थी.
यही वो समय था जब पहली बार रहमान को ‘डार्क प्रिंस’ और 'शैडो पीएम' का नाम मिला. हालांकि, तब तक तारिक चुनाव से दूर थे. साल 2005 में विकीलीक्स की ओर से लीक किए गए अमेरिकी दूतावास की रिपोर्ट में बताया गया कि वह 2007 में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन उनकी ये योजना तब खटाई में पड़ गई, जब 11 जनवरी 2007 को सेना समर्थित अंतरिम सरकार ने देश में इमरजेंसी घोषित कर दी.
इसके बाद बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाया गया, जिसमें शेख हसीना से लेकर खालिदा जिया तक सब निशाने पर आए. इसी दौरान मई 2007 में तारिक रहमान को अंतरिम सरकार ने गिरफ्तार कर लिया. उन पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे. तकरीबन 18 महीने तक जेल में रहने के बाद साल 2008 में तारिक रहमान को रिहा कर दिया गया. रिहा होते ही वह परिवार के साथ लंदन चले गए. हालांकि, उनकी मां खालिदा जिया बांग्लादेश में ही रहीं.
कहते हैं कि रहमान की रिहाई के लिए उन्होंने सेना के साथ एक समझौता किया था, जिसमें ये शर्त रखी गई थी कि रहमान राजनीति से दूर रहेंगे. तब खालिदा जिया ने भी ये ऐलान किया था कि रहमान लंदन में पढ़ाई करेंगे और राजनीति नहीं करेंगे. इसी बीच लंदन में 2009 में रहमान ने अपने घर पर किसी विदेशी डिप्लोमैट को बताया कि गिरफ्तारी के दौरान जेल में उन्हें काफी प्रताड़ित किया गया था. इस वजह से उनकी रीढ़ की हड्डी चोटिल हो गई थी और उन्हें लंबे इलाज की जरूरत पड़ी. बीएनपी ने बांग्लादेश में इस मुद्दे को काफी जोर-शोर से उठाया और खूब हंगामा काटा था.
तारिक रहमान के 17 साल के निर्वासन की शुरुआत यहीं से होती है. हालांकि, लंदन में रहते हुए भी वह पार्टी की गतिविधियों से जुड़े रहे. वीडियो लिंक के जरिए कार्यकर्ताओं को संबोधित करना हो या विदेशी डिप्लोमैट्स के साथ मुलाकात हो, तारिक रहमान पार्टी के काम से पूरी तरह दूर कभी नहीं हुए.
कई आरोपों में सजाइधर बांग्लादेश में फिर से शेख हसीना की सरकार बनी और उनके 15 साल के शासन के दौरान तारिक रहमान के खिलाफ भ्रष्टाचार और आतंकवाद से संबंधित कई आरोपों पर मुकदमा चला. कई मामलों में सजा भी हुई. रहमान के समर्थकों का कहना है कि शेख हसीना सरकार मुकदमों के दम पर खालिदा जिया और उनके बेटे का राजनीतिक दमन कर रही थी.
इसी बीच 2018 में रहमान को ढाका की एक स्पेशल कोर्ट ने उनकी गैर मौजूदगी में ही आजीवन कारावास की सजा सुना दी. ये 2004 के एक मामले पर कोर्ट का फैसला था, जिसमें शेख हसीना पर ग्रेनेड अटैक किया गया था.
इसी साल यानी 2018 में खालिदा जिया को भी भ्रष्टाचार के एक मामले में सजा हुई तो तारिक रहमान पार्टी की ‘ड्राइविंग सीट’ पर भी बैठ गए. लंदन में रहते हुए भी वह पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष बने और पार्टी चलाने लगे. खालिदा जिया की तबीयत खराब होने के बाद से वह लगातार पार्टी में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे थे.
जुलाई 2024 के उग्र छात्र आंदोलन ने जब शेख हसीना की सरकार को उखाड़ फेंका, तब बांग्लादेश में कानूनी हालात में नाटकीय बदलाव आया. बाद के अदालती फैसलों ने रहमान की पिछली सजाओं को पलट दिया. इससे उनकी स्वदेश वापसी का रास्ता साफ हो गया.
अंतरिम सरकार वाले अस्थिर देश में उन्होंने 25 दिसंबर 2025 को 17 साल के निर्वासन को खत्म करते हुए वापसी की और इस एक चीज ने बीएनपी के कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी.
ये तय हो गया था कि शेख हसीना की आवामी लीग इस बार बांग्लादेश में चुनाव नहीं लड़ेगी. ऐसे में रहमान के आने से पहले जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी जैसी पार्टियों ने देशभर में रैलियां कर अपनी जगह बनाने की कोशिश की थी. लेकिन वापसी के बाद रहमान की सभाओं में जो भीड़ उमड़ी, उसने बाकी सारे दलों और नेताओं की रैलियों को फीका कर दिया. रहमान के आने से बांग्लादेश की राजनीति का संतुलन हिल गया. 30 दिसंबर को खालिदा जिया के निधन के बाद रहमान पार्टी की एकमात्र उम्मीद बन गए.
2024 के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में हुए आम चुनाव में रहमान पहली बार खड़े हुए. दो सीटों झाका-17 और बोगुरा-6 से उन्होंने चुनाव लड़ा और दोनों ही सीटों पर जीत दर्ज की.
उनके नेतृत्व में बीएनपी ने बड़ी जीत दर्ज की है. 299 सीटों में बीएनपी और उसके सहयोगी दलों ने 212 सीटें झटक ली हैं, जो पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए पर्याप्त से अधिक है. जेल और 17 साल का निर्वासन झेल चुके तारिक रहमान इस संख्याबल के साथ देश के सर्वोच्च पद को संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.
भारत से संबंध कैसे हैं?साल 2001 से 2006 के बीच जब बीएनपी सत्ता में थी, तब भारत और बांग्लादेश के संबंध अपने सबसे बुरे दौर में थे. पाकिस्तानपरस्त मानी जाने वाली जमात-ए-इस्लामी सरकार में बीएनपी की सहयोगी थी. वहीं, नई दिल्ली ने ढाका पर पाकिस्तान के आतंकी समूहों को नजरअंदाज करने और उत्तर-पूर्वी विद्रोहियों को पनाह देने का आरोप लगाया था. हालांकि उस समय तारिक किसी औपचारिक पद पर नहीं थे. फिर भी इन सबके पीछे उन्हें ही मास्टरमाइंड माना गया था.
हालांकि, बांग्लादेश में वापसी के बाद भारत को लेकर तारिक रहमान के सुर बदले हैं. अब उन्होंने पड़ोसी देश को लेकर काफी सकारात्मक रवैया दिखाया है. उन्होंने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ की अपनी नीति को आगे बढ़ाने की बातें कही हैं. साथ ही ऐसे इशारे भी किए हैं कि वह भारत, चीन और पाकिस्तान जैसी क्षेत्रीय शक्तियों से बराबर दूरी बनाए रखेंगे.
उनकी वापसी के बाद से ही बांग्लादेश के बदले हालात को भांपते हुए भारत ने भी रहमान के साथ संबंध बेहतर करने के प्रयास शुरू कर दिए थे. खालिदा जिया जब बीमार थीं तब पीएम नरेंद्र मोदी ने उनकी सेहत को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई थी और मदद की पेशकश की थी. खालिदा के निधन के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ढाका भी पहुंचे. 2024 के दंगों के बाद वह दुनिया के किसी देश के पहले ऐसे नेता रहे, जो बांग्लादेश गए. वहां उन्होंने तारिक रहमान से मुलाकात भी की.
शुक्रवार, 13 फरवरी को चुनाव में बीएनपी की बंपर जीत के बाद प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करके रहमान को बधाई दी है. पीएम मोदी तारिक को बधाई देने वाले दुनिया के सबसे पहले नेताओं में से एक रहे. उन्होंने कहा कि वह दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने के लिए रहमान के साथ काम करने के लिए तैयार हैं.
वीडियो: रणवीर सिंह और रोहित शेट्टी को लॉरेंश बिश्नोई गैंग ने क्यों दी धमकी?
















.webp?width=120)
.webp?width=120)




