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क्या है 'Muda Scam' जिसमें CM सिद्दारमैया की पत्नी को जमीन देने पर विवाद है?

Siddaramaiah की पत्नी को MUDA ने अधिग्रहण के बदले दूसरी जगह जमीन दी. आरोप लगे कि जो जमीन दी गई उसकी कीमत मूल जमीन से बहुत अधिक है.

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MUDA से जुड़े आरोपों पर सदन में चर्चा की मांग की जा रही है. (तस्वीर: PTI/सोशल मीडिया)

कर्नाटक विधानसभा में BJP और JDS के विधायक रात में जम गए. तकिया और चादर लेकर वहीं सो गए. कारण था- विरोध जताना. ये सब सदन में कथित MUDA घोटाले पर चर्चा की मांग कर रहे थे. MUDA माने मैसूरु (मैसूर) शहरी विकास प्राधिकरण. BJP और JDS ने इस मामले में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया (Siddaramaiah MUDA case) की पत्नी पार्वती पर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि पार्वती ने इस घोटाले से अवैध रूप से लाभ उठाया है. राज्य के विपक्षी दलों ने सिद्दारमैया से इस्तीफे की मांग की है.

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इस कथित घोटाले पर चर्चा कराने के लिए राज्य के विधानसभा और विधान परिषद में जमकर हंगामा हुआ है. राज्य के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल ने कहा है कि इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं. जांच में सभी मुद्दों पर विचार किया जा रहा है और इसलिए इस पर चर्चा नहीं की जा सकती. इस घोटाले के कारण कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर सवाल उठ रहे हैं. दूसरी ओर सिद्दारमैया ने इस मामले में भाजपा पर आरोप लगाए हैं और इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है.

क्या है MUDA Scam?

मैसूर जिले के केसारे गांव में सिद्दारमैया की पत्नी पार्वती के नाम करीब 3 एकड़ जमीन थी. पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन ने उन्हें गिफ्ट में ये जमीन दी थी. MUDA ने इस जमीन का अधिग्रहण किया, विकास कार्यों के लिए. इसके बदले MUDA ने पार्वती को 2021 में विजयनगर में 38,283 स्क्वायर फीट का प्लॉट दिया. ये जमीन दक्षिण मैसूर के पॉश इलाके में है.

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आरोप लगा कि विजयनगर की जो जमीन पार्वती को दी गई, वो उनके केसारे वाली जमीन से कहीं अधिक महंगी है. इससे MUDA को नुकसान हुआ. हालांकि, ये पूरा लेन-देन साल 2021 में किया गया. तब राज्य में BJP की सरकार थी.

50:50 Incentive Scheme क्या है?

पार्वती को ‘50:50 प्रोत्साहन योजना’ के तहत जमीन दी गई. MUDA ने इसे साल 2020 में लागू किया था. इस योजना में जिनकी अविकसित जमीन अधिग्रहित की जाती है, उन्हें अधिग्रहित भूमि के 50 प्रतिशत के बराबर विकसित जमीन दी जाती है. हालांकि, इस योजना पर विवाद बढ़ा तो 2023 में शहरी विकास मंत्री बिरथी सुरेश ने इसे खत्म कर दिया. आरोप है कि इसके बाद भी जिन लोगों की जमीन का अधिग्रहण हुआ, उन्हें इसी योजना के तहत जमीनें दी गईं.

BJP ने बड़ा स्कैम बताया

कर्नाटक भाजपा ने आरोप लगाया कि इस योजना के तहत 85 हजार आवेदकों को जमीन नहीं मिली. इनमें मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास के आवेदक शामिल हैं. इसके बावजूद CM के परिवार को तुरंत जमीन दे दी गई. इस कथित घोटाला के संबंध में सिद्दारमैया की पत्नी, उनके भाई मल्लिकार्जुन और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है.

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BJP ने ये भी आरोप लगाया है कि कई प्रभावशाली लोगों को जमीनें दी गई हैं. आरोप है कि इससे सरकार को लगभग 4 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. 

Siddaramaiah ने क्या कहा है?

मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा,

"2014 में जब मैं मुख्यमंत्री था तब पत्नी ने मुआवजे के लिए आवेदन दिया था. लेकिन मैंने इनकार कर दिया. मैंने कहा कि जब तक मैं CM हूं तब तक मुआवजे के लिए आवेदन ना दें. फिर साल 2020-21 में भाजपा की सरकार आई. तब पत्नी ने मुआवजे के लिए आवेदन किया. उसके बाद सरकार ने उन्हें ये जमीन दी. BJP मेरे खिलाफ झूठा आरोप लगा रही है."

उन्होंने बताया कि जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया उसकी कीमत 60 करोड़ रुपये है. सिद्दारमैया ने आगे कहा,

"हमारी जमीन पर कब्जा हो गया था. इसलिए MUDA ने हमें दूसरी जमीन दी. हमने कोई स्पेशल एरिया नहीं मांगा था. हमारी जमीन पर पार्क बना दिया गया है. इसमें किसकी गलती है? राज्य में कौन सरकार चला रहे थे? क्या मुझे अपनी जमीन छोड़ देनी चाहिए."

जमीन वापस करने के लिए तैयार हैं CM

CM सिद्दारमैया, विजयनगर वाली जमीन को वापस करने के लिए तैयार हैं. लेकिन इसके बदले उन्होंने मुआवजे की मांग की है. उन्होंने कहा कि शहरी विकास मंत्री बिरथी सुरेश ने इस मामले में जांच के लिए दो IAS अधिकारियों को नियुक्त किया है. उन्होंने दावा किया है कि उनकी पत्नी का मामला गड़बड़ी का केस नहीं है.

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