ममता बनर्जी का कहना है कि अमर्त्य सेन एक ख़ास विचारधारा से सहमति नहीं रखते, इसलिए उनको टारगेट किया जा रहा है. (फाइल फोटो- PTI)
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को एक पत्र लिखा है.
“मैं अपनी हैरत और गुस्सा जताने के लिए ये पत्र लिख रही हूं. मैंने मीडिया में ख़बरें पढ़ीं, जो शांतिनिकेतन में आपकी पैतृक संपत्तियों की तरफ कुछ इशारा कर रही थीं. हम सब जानते हैं कि आपके परिवार का शांतिनिकेतन से गहरा और पवित्र रिश्ता रहा है.”
इसके बाद लेटर में ममता ने एक डायरेक्ट सा इनडायरेक्ट निशाना साधा. दरअसल गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्वभारती यूनिवर्सिटी ने इस बरस 100 साल पूरे किए हैं. इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 24 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय के एक समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया था. अब ममता के लेटर का अगला हिस्सा पढ़िए.
“विश्वभारती के कुछ नए-नए घुसपैठियों ने आपकी पैतृक संपत्तियों को लेकर हैरत भरे और निराधार आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं. मुझे इससे गहरा दुख हुआ है. बहुसंख्यकवादियों के ख़िलाफ इस लड़ाई में मैं आपके साथ हूं. ये लड़ाई, जिसने आपको उन झूठी ताकतों का दुश्मन बना दिया है.”
ममता ने बातों को कन्क्लूड करते हुए लिखा कि असहिष्णुता के ख़िलाफ इस लड़ाई में मुझे अपनी बहन मानें, दोस्त मानें. दरअसल कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कथित तौर पर ये बताया गया था कि विश्वभारती विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार को एक चिट्ठी लिखी है. आरोप लगाया है कि उसकी ज़मीन पर कब्जा जमाया गया है. कहा गया कि ऐसे लोगों की एक लिस्ट भी है, जिसमें अमर्त्य सेन का भी नाम है. इसी के बाद ममता ने सेन को ये पत्र लिखा है. अब देखने वाली बात ये होगी कि क्या ये ख़त चंद महीनों दूर खड़े पश्चिम बंगाल चुनाव पर भी कोई असर डालेगा, कोई नया समीकरण बनाएगा?