इसका नतीजा ये है कि अब भी आम आदमी ट्रैफिक में फंसा रहता है और वीआईपी के काफिले की गाड़ियां सायरन बजाते हुए निकल जाती हैं. ट्रैफिक में फंसा हुआ आदमी पहले तो किसी से सवाल नहीं कर सकता है और अगर किसी ने ऐसा कर भी दिया, तो उसे पुलिस के थप्पड़ खाने पड़ते हैं. ताजा वाकया 8 जनवरी 2018 का है. नई दिल्ली के नेशनल हाईवे 8 पर हर रोज वीआईपी मूवमेंट होता है. इस रास्ते से निकलने वाले लोग ये मानकर चलते हैं कि उन्हें वीआईपी की वजह से 15-20 का समय ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. 8 जनवरी को भी ऐसा ही हुआ. नेशनल हाईवे 8 पर सदर बाजार इलाके के पास ट्रैफिक रुका हुआ था. 15-20 मिनट तक तो लोग खड़े रहे, लेकिन उसके बाद परेशान होना शुरू हो गए. करीब 4 किलोमीटर तक गाड़ियों की लंबी लाइन लग गई. इसी भीड़ में गुड़गांव से दिल्ली आ रहे जीतेश सहगल भी थे.

जीतेश सहगल पेशे से डॉक्टर हैं, जिनका दिल्ली और गुड़गांव में क्लिनिक है.
बकौल जीतेश जब 40 मिनट से भी ज्यादा हो गए, तो वो अपनी कार छोड़कर उतरे और पुलिसवालों से ट्रैफिक रोकने की वजह पूछी. पहले तो पुलिसवालों ने बताया कि मिलट्री वालों की गाड़ी खराब हो गई है. फिर बताया गया कि राष्ट्रपति का काफिला गुजरने वाला है, इसलिए ट्रैफिक रोका गया है. इसी दौरान और भी सवाल-जवाब हुए तो एक पुलिसवाला आगे आया. उसने अपना नाम इन्स्पेक्टर आनंद प्रकाश बताया, कहा जो करना है कर ले और फिर थप्पड़ जड़ दिया. जीतेश ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर फेसबुक पर अपलोड किया है, जिसे करीब 45 हजार लोग शेयर कर चुके हैं.
जीतेश एक डॉक्टर हैं, जिनका दिल्ली और गुडगांव में क्लिनिक है. उन्हें हर रोज इसी रास्ते से गुजरना होता है. हर रोज उन्हें करीब 20-25 तक ट्रैफिक में इंतजार करना पड़ता है. डॉक्टर जीतेश ने बताया कि उस दिन भी कई पेशेंट क्लिनिक में उनका इंतजार कर रहे थे. लेकिन पुलिस ने ट्रैफिक रोके रखा. इस दौरान और भी कई लोग थे, जिन्हें अस्पताल पहुंचने की जल्दी थी. लेकिन पुलिस ने किसी की भी नहीं सुनी. थोड़ी देर की कहासुनी के बाद पुलिसवालों ने बिना किसी के आए ट्रैफिक भी खोल दिया. इस जाम से आम लोगों को निकलने में घंटों लग गए. क्या आपने इसकी शिकायत पुलिस के किसी बड़े अधिकारी से की है के सवाल पर जीतेश कहते हैं कि उन्होंने अभी तक तो किसी से इस बात की शिकायत नहीं की है. लेकिन देश और दुनिया से उन्हें लोग मैसेज कर रहे हैं और शिकायत दर्ज करवाने के लिए कह रहे हैं.

लोगों ने हंगामा किया तो पुलिस ने बिना किसी वीआईपी के आए ट्रैफिक खोल दिया.
ये कहानी किसी एक शहर की नहीं है. हालत कमोबेश हर उस शहर की है, जहां वीआईपी लोग रहते हैं. यूपी की राजधानी लखनऊ हो या फिर बिहार की राजधानी पटना या फिर कोई और शहर, वहां के लोगों को इन दिक्कतों से दो चार होना ही पड़ता है. ऐसे में अगर किसी परेशान आम आदमी ने सवाल कर दिए, तो उसका जवाब थप्पड़ के रूप में सामने आता है.
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