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शहीद स्क्वाड्रन लीडर की पत्नी ने कहा - सोशल मीडिया के योद्धाओ, जंग चाहिए तो बॉर्डर पर जाओ

लड़ाई छेड़ने की बात करने वालों को वो जरूर जानना चाहिए, जो शहीद की पत्नी ने कहा...

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स्क्वॉर्डन लीडर निनाद की पत्नी विजेता ने मीडिया से बात करते हुए सोशल मीडिया पर जंग का पक्ष ले रहे लोगों के नाम एक अपील जारी की है. निनाद जम्मू-कश्मीर के बडगाम में हुए एक प्लेन क्रैश में शहीद हो गए थे.
मैं जनता जनार्दन तक, जहां तक ये बात फैले, वहां तक फैलाना चाहती हूं. निनाद कुछ चीजों के लिए बहुत पर्टिकुलर था. वो केवल फौजी ही नहीं था, बहुत अच्छा इंसान भी था. वो चीजें मैं आप तक पहुंचाना चाहती हूं. आप हर जगह आवाज लगाते हैं, नारे लगाते हैं. वो मुर्दाबाद, ये जिंदाबाद, इसको मारो उसको काटो. उसकी जगह पर अगर आप सच में कोई चेंज लाना चाहते हैं- मेरे निनाद के लिए, विंग कमांडर अभिनंदन के लिए, और भी जितने लोग शहीद हुए हैं उनके लिए कुछ करना चाहते हैं सच में, तो एक छोटा सा काम कीजिए. आप खुद या अपने परिवार वालों को फौज जॉइन करवाइए. 
ये कहा है विजेता मांडवगणे ने. शहीद स्क्वॉड्रन लीडर निनाद मांडवगणे की पत्नी. कैसे हुई निनाद की शहादत? जम्मू-कश्मीर के बडगाम में वायु सेना का एक एम-17 विमान क्रैश हुआ. इसमें सात लोगों की मौत हुई. एयर फोर्स के छह अधिकारी और एक आम आदमी. इनमें एक निनाद भी थे. 1 मार्च को नासिक में पूरे सैन्य सम्मान के साथ निनाद का अंतिम संस्कार किया गया. निनाद का परिवार, उनकी पत्नी और दो साल की बेटी निया सब थे यहां. विजेता और उनके परिवार ने जो खोया है, उसकी कोई भरपाई नहीं है. विजेता अपने नुकसान का वजन जानती हैं. इसीलिए सोशल मीडिया पर जंग मांग रहे लोगों के नाम उन्होंने एक मेसेज दिया है. कहा है-
हम नहीं चाहते जंग हो. आपको पता ही नहीं कि जंग के नुकसान क्या हैं. हम नहीं चाहते कि और निनाद जान गंवाएं. सोशल मीडिया के वीरों, प्लीज रुक जाइए. अगर आपको जंग चाहिए, तो बॉर्डर पर जाइए.
विजेता ने और क्या कुछ कहा? 14 फरवरी को पुलवामा में CRPF के काफिले पर हमला हुआ. 40 जवान शहीद हुए. इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने खूब लिखा. कि पाकिस्तान से जंग करो. दिन-रात. लगातार. खूब बढ़-चढ़कर. विजेता ने जो कहा, वो ऐसे ही युद्ध-युद्ध करने वालों के नाम संदेश है. उनका कहा पढ़िए, समझिए और रट लीजिए-
अगर आप सेना जॉइन नहीं कर सकते, तो कम से कम अपने आस-पास छोटे-छोटे ऐसे बदलाव लाइए जो हमारे देश का भला कर सकें. आप साफ-सफाई रख सकते हैं, साफ-सफाई रख सकते हैं. सड़क पर चलती गाड़ी से कचरा मत फेंकिए. यहां-वहां खुले में शौच या पेशाब मत कीजिए. लड़कियों को रास्ते में मत छेड़िए. वो भी इंसान हैं, आप भी इंसान हैं. कम्यूनल हेट्रेड (सांप्रदायिक नफरत) मत फैलाइए. अगर आप अपने अंदर ये बदलाव ला सकते हैं, इंसानों जैसा बर्ताव कर सकते हैं तो जरूरी नहीं कि आप फौज जॉइन करके ही देश की सेवा कर सकें. ऐसे काम कीजिए कि हमारे देश के सैनिक गर्व महसूस कर सकें. वो वॉट्सऐप या फेसबुक के मेसेज नहीं पढ़ सकते श्रीनगर में बैठकर.  हम जंग नहीं चाहते. आपको जंग के नुकसान नहीं मालूम. हम और निनाद नहीं खोना चाहते. सोशल मीडिया के योद्धाओं, प्लीज रुक जाइए. अगर आपको जंग चाहिए, तो बॉर्डर पर जाइए.
विजेता ने ये भी कहा कि वो जंग नहीं चाहतीं. जो जंग की बात करते हैं, वो जंग से होने वाले नुकसान नहीं जानते. सोशल मीडिया पर बैठकर जंग का पक्ष लेने वाले लोग अगर इतना ही वॉर चाहते हैं, तो उन्हें खुद बॉर्डर पर जाना चाहिए. विजेता सही हैं. जंग आखिरी रास्ता हो, तब भी दुखद ही होता है. जो खोते हैं, वो जानते हैं. जो खोते नहीं हैं, वही खौफ नहीं खाते.
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