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पाकिस्तानी जवान ने कोहनी मारी तो इंडियन ने मुक्के बरसाए

इंडिया-पाकिस्तान बॉर्डर पर 'बीटिंग द रिट्रीट' सेरेमनी होती है ना! जिसमें दोनों तरफ के जवान पांव पटक-पटक के एग्रेशन दिखाते हैं. उसी सेरेमनी में मारपीट हो गई.

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Symbolic Image. Photo: Reuters
इंडिया-पाकिस्तान बॉर्डर पर 'बीटिंग द रिट्रीट' सेरेमनी होती है ना! जिसमें दोनों तरफ के जवान पांव पटक-पटक के एग्रेशन दिखाते हैं. उसी सेरेमनी में मारपीट हो गई.
एक वीडियो चल रिया है जी सर्वत्र. जिसमें इंडिया-पाकिस्तान के दो जवानों के बीच लड़ाई बज गी. पंजाब के हुसैनीवाला बॉर्डर पर 'बीटिंग द रिट्रीट' हो रही थी. शुरू में झंडे दिखाए जा रहे थे अपने-अपने. इसी टाइम पाकिस्तानी बंदे की कोहनी इंडियन बंदे को छू गई. हो सकता है उसने जान-बूझ के मार दी हो. एग्रेशन तो रहता ही है देशप्रेम का, मन मचल जाता है.
बस इसी बात पर साड्डा इंडियन औक्खा हो गया और पाकिस्तानी बंदे को दो-तीन गुट्ट धर दिए. पाकिस्तानी ने भी मारने की कोशिश की, पर हाथ हवा में ही घूमकर रह गया. बॉडी को नहीं छू पाया.
इंडिया वाले खुश हो गए कि देक्खो साड्डा वीरां कूट आया. बस फिर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया.
वैसे लड़ाई के तुरंत बाद दोनों साइड के जवान दौड़कर आए और माहौल ठंडा कराया. दोनों को तत्काल वहां से हटा दिया गया.
https://www.youtube.com/watch?time_continue=34&v=HlkKd-jhxd8
'बीटिंग द रिट्रीट' सेरेमनी में दोनों तरफ के दर्शक बैठे होते हैं साइड की गैलरी में. उन्ही में से किसी ने ये वीडियो बना लिया और यूट्यूब पर डाल दिया. वीडियो किसी ने वेरिफाई नहीं किया है, लेकिन इसी महीने का बताया जा रहा है.
भारत-पाकिस्तान सीमाओं पर रोज 'बीटिंग द रिट्रीट' सेरेमनी होती है. दोनों देशों के झंडे मिलिट्री स्टाइल में हर शाम इसी सेरेमनी के जरिये उतारे जाते हैं. लेकिन 'बीटिंग द रिट्रीट' के टाइम मारकुटाई का ये पहला मामला नहीं है. उस टाइम खून में इतना उबाल होता है कि छोटी-मोटी मुक्केबाजी और धक्कामुक्की हो जाती है. हालांकि लोकल अफसर ये सब तुरंत संभाल लेते हैं.
2011 में ठीक ऐसा ही वाकया हुआ था. झंडे दिखाए जाने के बाद दोनों देशों के दो जवान एक-दूसरे के उल्टी तरफ क्रॉस कर रहे थे. जगह कम थी तो कोहनियां टकरा गईं. इंडियन जवान गुस्सा गया और पाकिस्तानी को मुक्के जड़ दिए. ये खबर मीडिया में भी आ गई थी और बीएसएफ के आईजी ने कहा था कि पाकिस्तानी सैनिक ने जान-बूझकर कोहनी मारी थी.
https://www.youtube.com/watch?v=6Pa9G2XWpGw
इस सेरेमनी में बहुत सारे लोग आते हैं देखने. दर्शक-दीर्घा सजती है. दोनों तरफ से नारे गूंजते हैं. 'अल्लाह हू अकबर' बनाम 'भारत माता की जय'. कभी-कभी गाली-गलौज भी हो जाती है. लेकिन ये तो सब जानते हैं कि ये सेरेमनी नाटकीय होती है. जितना भी एग्रेशन है, वो दिखाने के लिए है. एक नियम के तहत. मिलिट्री का मिजाज ही यही है. लेकिन बाद में ये जवान भी लेते होंगे एक-दूसरे के घर का हाल-चाल.
एक तस्वीर ये भी. 2011 की. Reuters
एक तस्वीर ये भी. 2011 की. Reuters
कि उधर से आवाज़ आए, 'ओए सतबीरे, आज आवाज नीं निकल री तेरी. खाना नी खा के आया क्या?' और जवाब मिले, 'तुरई खा के आया हूं हाफिजे. झोले विच रखी ए. खाएगा?'
हाय! हम तो इस पर फिदा हैं जनाब. ये बंदे वर्दी वाले जरूर हैं, पर ये भी सुर मिलाते हैं, जब तुम इधर नहीं आते.

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