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उत्तरकाशी सुरंग में खुदाई पूरी, मजदूरों के पास पहुंची NDRF टीम, कितनी देर में बाहर होंगे मजदूर?

उत्तरकाशी सुरंग हादसे में फंसे 41 मजदूर बहुत जल्द बाहर निकाले जा सकते हैं. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने बचाव अभियान पर बड़ा अपडेट दिया है. मजदूरों के परिवार को भी तैयार रहने को कहा गया है.

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टनल में पाइप डालने का काम पूरा कर लिया गया है ये बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताई है (तस्वीर साभार: इंडिया टुडे)

उत्तरकाशी सुरंग हादसे (Uttarkashi Tunnel Collapse) में फंसे 41 मजदूरों को बचाने का अभियान अपने अंतिम चरण में है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक टनल में फंसे मजदूरों को किसी भी वक्त बाहर निकाला जा सकता है. सुरंग में खुदाई पूरी हो गई है. 800 मिमी व्यास का पाइप भी डाला जा चुका है. एनडीआरएफ की टीम पाइप के जरिए मजदूरों तक पहुंच गई है. ये टीम मजदूरों को पाइप के जरिए बाहर निकालने में मदद करेगी. उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही मजदूरों को बाहर निकाला जा सकता है. रेस्क्यू टीमों ने मजदूरों के परिजनों से उनके कपड़े और बैग तैयार रखने को कहा है. मजदूरों को निकालने के बाद उन्हें हॉस्पिटल ले जाया जाएगा.

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया है कि टनल में पाइप डालने का कार्य पूरा कर लिया गया है. बहुत जल्द मजदूरों को बाहर निकाल लिया जाएगा. उन्होंने सोशल मीडिया X (ट्विटर) पर लिखा,

"रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे सभी बचाव दलों के अथक परिश्रम के फलस्वरूप श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए टनल में पाइप डालने का कार्य पूरा हो चुका है. शीघ्र ही सभी श्रमिक भाइयों को बाहर निकाल लिया जाएगा."

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इससे पहले उत्तराखंड सरकार के सचिव नीरज खेरवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने बताया कि मलबे में 55.3 मीटर तक पाइप डाले जा चुके हैं. कुल 57-59 मीटर की दूरी है. उन्होंने बताया कि अब कुछ ही देर में मजदूरों तक पहुंचा जा सकता है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि 28 नवंबर की शाम तक रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो जाएगा.

सभी एम्बुलेंस को बुला लिया गया है | फोटो: इंडिया टुडे

नीरज खेरवाल ने आगे बताया कि कुल 86 मीटर की वर्टिकल खुदाई भी हो रही है जिसमें से 44 मीटर की खुदाई हो चुकी है. वहीं, रैट माइनर्स भी 57 मीटर की खुदाई में लगे हैं, जिसमें से 55.3 मीटर की खुदाई पूरी कर ली गई है. इतनी ही दूरी तक पाइप भी डाले जा चुके हैं.

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सुरंग के गेट पर तैनात एक एम्बुलेंस | फोटो: इंडिया टुडे

इससे पहले इस ऑपरेशन में जुटे माइक्रो टनलिंग के विशेषज्ञ क्रिस कूपर ने 28 नवंबर की सुबह को बताया था कि कल रात बहुत अच्छा काम हुआ है. 50 मीटर का फासला पार कर लिया गया है. उन्होंने कहा था कि बहुत सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहा है.

आपको बता दें कि बीते 12 नवंबर को उत्तराखंड की निर्माणाधीन सिल्क्यारा सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था. तब से ही वहां बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के 41 मजदूर फंसे हुए हैं. दो हफ़्ते से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है.

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