भविष्य में जंग कैसे लड़ी जाएगी? इसके कई जवाब हो सकते हैं. मिसाइल से? फाइटर जेट्स से? या जंगी जहाजों से? ये सभी चीजें अपनी-अपनी जगह बेहतर हैं. लेकिन हालिया युद्धों ने हमें जो सिखाया है, उसे देख कर तो यही लगता है कि भविष्य की जंगों की दिशा 'ड्रोन्स' तय करेंगे. कम खर्चे में ज्यादा तबाही, दुश्मन के खेमे में ज्यादा कन्फ्यूजन और एयर डिफेंस को चकमा. इन सभी कामों में ड्रोन से बेहतर फिलहाल कुछ नहीं है. और अब चीन ने एक नया ड्रोन सिस्टम लॉन्च किया है जो भारत समेत पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन सकता है. इस सिस्टम का नाम 'एटलस' (Atlas Drone Swarm System) है.
300 सेकंड में ताबड़तोड़ निकलते हैं 96 स्मार्ट ड्रोन्स, चीन के 'एटलस' ने टेंशन बढ़ा दी
Atlas Swarm Drone System में एक ड्रोन के बीच लॉन्च का समय तीन सेकेंड से भी कम है. इसलिए, 300 सेकंड के अंदर, यह सिस्टम हमला करने, जासूसी करने या दुश्मन को भ्रमित करने के लिए सभी 96 ड्रोन लॉन्च कर सकता है. चीन का ये एटलस सिस्टम ताइवान और भारत के एयर डिफेंस को कंफ्यूज कर सकता है. इसे नष्ट करने के लिए भारत-चीन को इसके कई हिस्सों को बर्बाद करना पड़ेगा, जो इसकी स्पीड और कैमोफ्लाज क्षमता को देखते हुए मुश्किल जान पड़ता है.


स्वार्म शब्द का मतलब होता है झुंड. मधुमक्खियों के झुंड के लिए स्वार्म शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. इस तरह के ड्रोन्स एक साथ बड़ी संख्या में हमला करते हैं. इससे फायदा ये होता है कि दुश्मन का एयर डिफेंस कन्फ्यूज हो जाता है. वो समझ नहीं पाता कि किस ड्रोन को पहले रोकें. जब तक वो अपना टारगेट चुनता है, तब तक और भी ड्रोन्स आ जाते हैं. इससे एयर डिफेंस को पहले ही नाकाम करने में मदद मिलती है जिससे मिसाइल्स और फाइटर जेट्स के लिए कोई रुकावट नहीं रह जाती.
China का नया Atlas Swarm Drone Systemचीन का एटलस सिस्टम पहियों पर चलने वाले एक छोटे बैटलफील्ड नेटवर्क जैसा है, जिसमें ड्रोन को ट्रक से लॉन्च किया जाता है. इन ड्रोन्स और उनके लॉन्च को एक ही ऑपरेटर दूर से कंट्रोल करता है. ये एक बड़े इलाके में जासूसी, कम्युनिकेशन और एयर डिफेंस के लिए भ्रम पैदा करने का काम करता है. इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि यह एक बहुत ही छोटी यूनिट होती है जिसे छिपाना, कैमोफ्लाज में रखना और दूरदराज से ऑपरेट करना आसान है. एटलस सिस्टम एक साथ 96 छोटे और मीडियम साइज के तेज ड्रोन लॉन्च कर सकता है. ये ड्रोन्स जो बचाव और हमला, दोनों में बहुत काम आते हैं.
एक ड्रोन के बीच लॉन्च का समय तीन सेकेंड से भी कम है. इसलिए, 300 सेकंड के अंदर, यह सिस्टम हमला करने, जासूसी करने या दुश्मन को कन्फ्यूज करने के लिए सभी 96 ड्रोन लॉन्च कर सकता है. हाल के युद्धों को ही देख लें तो, ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान, सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर मौजूद अमेरिका के E-3 सेंट्री AWACS विमान को 29 ड्रोन्स के एक झुंड और कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों ने तबाह कर दिया था.
पूरे एटलस सिस्टम को देखें तो इसमें में तीन यूनिट्स होती हैं. इसमें एक Swarm-2 ग्राउंड कॉम्बैट व्हीकल, एक कमांड व्हीकल और एक सपोर्ट व्हीकल होता है. एक अकेला Swarm-2 ग्राउंड कॉम्बैट व्हीकल 48 फिक्स्ड-विंग ड्रोन लॉन्च कर सकता है. एक अकेला कमांड व्हीकल एक ही समय में एक झुंड में 96 ड्रोन्स को कंट्रोल कर सकता है. इसका आकार और इसकी स्पीड इसे जासूसी करने, इंटरसेप्शन करने और जरूरी टारगेट्स पर हमला करने के लिए बेहद उपयोगी बनाती है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेशनल जरूरतों के आधार पर Atlas को अपने हिसाब से कॉन्फिगर किया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए पहले जासूसी ड्रोन तैनात किए जा सकते हैं, जबकि दुश्मनों को दबाने के लिए हमलावर ड्रोन से पहले इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वाले ड्रोन भेजे जा सकते हैं. इससे अलग-अलग स्थितियों के अनुसार खास तरह से जवाब देना संभव हो जाता है. स्वार्म इंटेलिजेंस से लैस, लगभग 100 हाई-स्पीड ड्रोन मिशन के दौरान बहुत कम समय में सटीक फॉर्मेशन बना सकते हैं. वे हवा के बहाव में गड़बड़ी जैसी स्थिति में भी खुद को संभालने में सक्षम होते हैं.
एटलस सिस्टम ताइवान और भारत के एयर डिफेंस को कंफ्यूज कर सकता है. इसे नष्ट करने के लिए भारत-चीन को इसके कई हिस्सों को बर्बाद करना पड़ेगा, जो इसकी स्पीड और कैमोफ्लाज क्षमता को देखते हुए मुश्किल जान पड़ता है. इसके अलावा, सिस्टम की एल्गोरिदम से ऑपरेट होने वाली किल चेन और खुद से टारगेट की पहचान करने की क्षमता इसे और घातक बनाती है. खासकर भारत के मोर्चे पर, तिब्बत का उन्नत सड़क और रेल नेटवर्क इसकी तुरंत तैनाती और लॉन्च को सक्षम बनाता है. इन ड्रोन्स का इस्तेमाल भारत की फॉरवर्ड पोस्ट्स पर मौजूद चौकियों तक पहुंचने वाली सड़कों पर हमला करके भारतीय सेना की सप्लाई और बुनियादी ढांचे की लाइनों को ब्लॉक करने के लिए भी किया जा सकता है. चीन का दावा है कि इसे काउंटर-जैम करना काफी मुश्किल है क्योंकि खुद से लाइव मिल रही जानकारी के मुताबिक ये अपना फॉर्मेशन और टारगेट बदल लेते हैं.
वीडियो: ईरान जंग में ट्रंप ने अब कौन सा ड्रोन उतार दिया?






















