24 फरवरी 2022. पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचे. उनकी यह यात्रा महीनों पहले से तय थी, लेकिन संयोग से उसी दिन रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया. इमरान खान ने अपना दौरा रद्द नहीं किया और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. अमेरिका चाहता था कि पाकिस्तान इस हमले की निंदा करे. लेकिन इमरान खान ने इस जंग पर निष्पक्ष रुख अपनाया, जिससे अमेरिका बेहद नाराज हो गया. कुछ ही हफ्तों के भीतर, इमरान पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव हार गए और उन्हें पद से हटा दिया गया.
इमरान खान के तख्तापलट के पीछे अमेरिका? सीक्रेट डॉक्यूमेंट लीक, पाकिस्तान में बवाल तय
क्या Pakistan के प्रधानमंत्री Imran Khan को सिर्फ इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने नेशनल असेंबली में समर्थन खो दिया था, या फिर पर्दे के पीछे अमेरिका का कुछ और ही खेल चल रहा था? अब एक लीक दस्तावेज ने ये अटकलें फिर तेज कर दी हैं.


तब से लेकर अब तक चार साल से ज्यादा का समय बीत चुका है. 18 मई को अमेरिका की खोजी पत्रकारिता वेबसाइट 'ड्रॉप साइट न्यूज' ने एक लीक दस्तावेज शेयर किया. तब से एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इमरान खान को सिर्फ इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने असेंबली में समर्थन खो दिया था? या फिर पर्दे के पीछे कुछ ही खेल चल रहा था?
क्या है इस दस्तावेज में?इस कूटनीतिक दस्तावेज (Diplomatic Cable) को ‘साइफर’ भी कहा जाता है. यह राजदूतों और उनके देश के विदेश मंत्रालय के बीच होने वाला एक सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड मैसेज होता है, जिसे आम जनता के लिए जारी नहीं किया जाता. इसे पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत असद मजीद खान ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन से इस्लामाबाद भेजा था.
इस दस्तावेज में 7 मार्च, 2022 को अमेरिकी राजनयिक डॉनल्ड लू और पाकिस्तानी राजदूत के बीच हुई बातचीत का ब्योरा है, जिसमें कथित तौर पर इमरान खान को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाने की बात कही गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में इमरान के रूस दौरे पर अमेरिका की गहरी नाराजगी दिखी और यह भी कहा गया कि अगर इस्लामाबाद में राजनीतिक हालात बदलते हैं तो अमेरिका के साथ रिश्ते बेहतर हो सकते हैं.
वाशिंगटन को गुस्सा क्यों आया?इमरान खान की मॉस्को यात्रा की टाइमिंग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही बेचैनी थी. पश्चिमी देशों ने यूक्रेन पर हमले के बाद रूस को तेजी से अलग-थलग करना शुरू किया. लीक हुए दस्तावेज के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी डॉनल्ड लू ने पाकिस्तान के राजदूत के साथ अपनी बैठक में साफ तौर पर वाशिंगटन की नाराजगी जताई. उन्होंने कथित तौर पर कहा,
“इसने (इमरान की रूस यात्रा ने) संबंधों में पहले ही एक दरार पैदा कर दी है. चलिए, हम बस कुछ दिनों का इंतजार करते हैं और देखते हैं कि क्या राजनीतिक स्थिति बदलती है. अगर ऐसा होता है, तो इसका मतलब होगा कि इस मुद्दे पर हमारे बीच कोई बड़ा मतभेद नहीं रहेगा और यह दरार बहुत जल्दी भर जाएगी.”
डॉनल्ड लू ने यह भी कहा कि अगर अविश्वास प्रस्ताव फेल हो गया, तो ‘आगे बढ़ना मुश्किल होगा.’ लू ने कथित तौर पर आगे कहा,
"मुझे नहीं लगता कि यूरोप इसे कैसे देखेगा, लेकिन मुझे शक है कि उनकी प्रतिक्रिया भी वैसी ही होगी."
अफगानिस्तान मामले पर अमेरिका की नाराजगी
साल 2021 में जब अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी सेना हटा रहा था, तब अमेरिकी खुफिया एजेंसी (CIA) अफगानिस्तान पर नजर रखने के लिए पाकिस्तान के भीतर सैन्य अड्डे चाहती थी. एक अमेरिकी टीवी इंटरव्यू में जब इमरान खान से पूछा गया कि क्या वह इसकी इजाजत देंगे, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा था- "एब्सोल्यूटली नॉट"
अगस्त 2021 में काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद इमरान खान ने बयान दिया था कि अफगानिस्तान ने ‘गुलामी की जंजीरें तोड़ दी हैं.’ इस बयान और सैन्य मदद न देने के फैसले को अमेरिकी प्रशासन ने एक बड़े झटके के रूप में देखा. इस इनकार के बाद वाशिंगटन और इस्लामाबाद के रिश्ते इतने ठंडे हो गए कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री इमरान खान को एक बार भी फोन तक नहीं किया.
इमरान सरकार का पतन
10 अप्रैल, 2022 को पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव हार गए और उन्हें पद से हटा दिया गया. शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने तर्क दिया कि आर्थिक संकट, महंगाई और बिगड़ते शासन के कारण इमरान सरकार ने संसद में समर्थन खो दिया था. जबकि इमरान ने अपने हटाए जाने के पीछे विदेशी ताकतों का हवाला दिया.
उन्होंने मार्च 2022 में एक जनसभा में एक कागज लहराते हुए दावा किया कि इसमें उनकी सरकार के खिलाफ एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश के सबूत हैं. अब इस कथित दस्तावेज के लीक होने के बाद इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थकों ने नाराजगी जताई है. उनके लिए यह कथित 'साइफर' इस बात का सबूत बन गया कि वाशिंगटन ने इमरान को उनकी स्वतंत्र विदेश नीति के वजह से हटाया.
हालांकि, आलोचकों के लिए यह साइफर विवाद एक राजनीतिक नाटक था. उनके मुताबिक, इमरान ने संसदीय बहुमत खो देने के बाद जनता का समर्थन जुटाने के लिए यह नाटक रचा था.
जेल कैसे पहुंचे इमरान खान?
सत्ता से हटने के बाद इमरान खान पर इस गोपनीय राजनयिक दस्तावेज (साइफर) को सार्वजनिक करने और उसका गलत इस्तेमाल करने का मुकदमा चला. इसे 'साइफर केस' नाम दिया गया, जिसमें उन्हें जनवरी 2024 में विशेष अदालत ने 10 साल जेल की सजा सुनाई थी. हालांकि, जून 2024 में इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया. लेकिन ‘तोशाखाना-2’ भ्रष्टाचार मामले और जमीन भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने के कारण इमरान जेल में बंद हैं.
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अमेरिका के साथ कूटनीतिक सुधार
इमरान खान के हटने के बाद शहबाज शरीफ के नेतृत्व में नई गठबंधन सरकार (PDM) बनी. शहबाज शरीफ सरकार ने आते ही अमेरिका के साथ बिगड़े रिश्तों को सुधारने पर जोर दिया. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी इस सरकार का स्वागत किया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बैठकों का दौर फिर से शुरू हुआ. पाकिस्तान जब इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा था और उस पर डिफॉल्ट (दिवालिया) होने का खतरा था, तब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लोन दिलाने में अमेरिका ने पर्दे के पीछे से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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