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मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने कहां-कहां बना रखा है मिलिट्री बेस, यहां से क्या होता है?

Middle East में मौजूद मिलिट्री बेस का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है. ईरान ने भी अब इन अमेरिकी सैन्य अड्डों को तबाह करने का ऑपरेशन शुरू कर दिया है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कितने ठिकाने हैं और कहां-कहां है?

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मिडिल ईस्ट में अमेरिका के करीब 19 मिलिट्री बेस हैं. (फोटो: इंडिया टुडे)

इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद शनिवार, 28 फरवरी को ईरान ने भी पलटवार करते हुए अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें बरसाई हैं. कतर और कुवैत में अमेरिका ऐसे अड्डों पर ईरान ने हमला किया है. दरअसल, मिडिल ईस्ट में अमेरिका के ऐसे करीब 19 मिलिट्री बेस हैं, जिनमें कुछ स्थायी हैं और कुछ अस्थायी. इन्हीं मिलिट्री बेस का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है. सिर्फ मिडिल ईस्ट में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अमेरिका ने अपने सैन्य अड्डे बना रखे हैं. आज हम उनके बारे में आपको विस्तार से बताने वाले हैं.  

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कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 51 देशों में कम से कम 128 विदेशी मिलिट्री बेस ऐसे हैं, जिन्हें अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस (DOD) मैनेज या ऑपरेट करता है. इनमें से कुछ परमानेंट बेस हैं और कुछ कभी-कभार इस्तेमाल होने वाले अस्थायी अड्डे हैं. 

पेंटागन की परिभाषा के मुताबिक, परमानेंट मिलिट्री बेस, वे स्थायी सैन्य ठिकाने हैं जिनका इस्तेमाल बीते 15 सालों से लगातार किया जा रहा है और जिन पर यूएस मिलिट्री का कुछ हद तक ऑपरेशनल कंट्रोल है. जबकि अस्थायी (Temporary) मिलिट्री साइट्स वे जगहें हैं, जिन्हें अमेरिकी सेना जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकती है. 

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, CRS ने मिडिल ईस्ट में 8 परमानेंट मिलिट्री बेस और 11 टेम्परेरी मिलिट्री साइट्स की पहचान की है. ये मिलिट्री बेस यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अंडर काम करते हैं. आइए जानते हैं कि ये बेस कहां-कहां हैं?

US military bases in the Middle East
मिडिल ईस्ट में अमेरिका के करीब 19 मिलिट्री बेस हैं. (फोटो: आजतक)
कतर

ईरान ने शनिवार को अपनी जवाबी कार्रवाई में कतर में मौजूद अमेरिका के अल उदैद एयरबेस पर हमला किया था. 24 हेक्टेयर में बना यह एयरबेस यूएस सेंट्रल कमांड का फॉरवर्ड हेडक्वार्टर भी है. यह राजधानी दोहा के बाहर रेगिस्तान में है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बेस में करीब 10 हजार सैनिक हैं. CRS की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर ने 2003 से एयर बेस को डेवलप करने के लिए 8 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का कंट्रीब्यूशन दिया है. हाल ही में US को एयर बेस इस्तेमाल करने की इजाजत देने वाले एग्रीमेंट को और 10 साल के लिए बढ़ा दिया है.

बहरीन

समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, ईरान ने बहरीन स्थित मिलिट्री बेस को भी निशाना बनाया है. यहीं अमेरिका का पांचवां बेड़ा नौसैनिक अड्डा भी है. यह बेड़ा फ़ारस की खाड़ी, लाल सागर, अरब सागर और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों की सुरक्षा और निगरानी करता है.

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कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का इस ठिकाने से रिश्ता सन 1948 से है, जब यह इलाका ब्रिटेन की ब्रिटिश शाही नौसेना के कंट्रोल में था. रिपोर्ट बताती है कि बहरीन का बंदरगाह बहुत गहरा है, जहां बड़े युद्धपोत और विमान ले जाने वाले जहाज खड़े किए जा सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे ठिकाने पर लगभग 9 हजार अमेरिकी सैनिक और रक्षा विभाग के कर्मचारी मौजूद हैं.

कुवैत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कुवैत स्थित अल-सलेम मिलिट्री बेस पर भी हमला कर दिया है. अली अल-सलेम वायुसेना अड्डे पर अमेरिकी एयरफोर्स की एक बड़ी यूनिट तैनात है, जो पूरे इलाके में सैन्य बल और सप्लाई का केंद्र मानी जाती है. कुवैत में अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. CRS की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें कैंप आरिफजान सबसे अहम है, जो US आर्मी सेंट्रल (ARCENT) का फॉरवर्ड हेडक्वार्टर है. इसी तरह इस इलाके में सबसे बड़ी US एयर लॉजिस्टिक्स सुविधा कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर है. 

संयुक्त अरब अमीरात (UAE)

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी स्थित अल धाफरा बेस पर भी ईरान ने हमला किया है. CRS की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां अमेरिकी एयरफोर्स की कई स्क्वाड्रन तैनात हैं, जिनमें निगरानी ड्रोन भी शामिल हैं. यह अड्डा UAE की एयरफोर्स के साथ मिलकर इस्तेमाल किया जाता है और पूरे इलाके में अमेरिकी वायुसेना के लिए एक अहम केंद्र माना जाता है. अल धाफरा में गल्फ एयर वॉर ट्रेनिंग सेंटर भी है, जहां हर साल करीब दो हजार सैनिकों को ट्रेनिंग दी जाती है. 

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इराक

एजेंस फ्रांस-प्रेस (AFP) ने बताया कि अमेरिका के सैनिक कई इराकी इलाकों में फैले हुए हैं. इराक में ही अल-असद और एरबिल एयर बेस शामिल हैं. इस्लामिक स्टेट (ISIS) से लड़ने वाले एक इंटरनेशनल गठबंधन में 2,500 तक अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं. द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक 2011 में इराक पर अमेरिका का कब्ज़ा औपचारिक रूप से खत्म हो गया था, लेकिन अमेरिकी सैनिक इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों से लड़ने के लिए वापस आ गए, जिन्होंने उत्तर और पश्चिम में इराकी इलाके पर कब्ज़ा कर लिया था.

सऊदी अरब

CRS रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस है, जो रियाद से 60 किमी दूर है. यह बेस मिलिट्री एसेट्स को सपोर्ट करता है. जून 2024 में वाइट हाउस ने कहा था कि सऊदी अरब में 2,300 से ज़्यादा US मिलिट्री के लोग तैनात हैं, जिनमें से ज़्यादातर एयर बेस पर हैं. ये लोग सऊदी सरकार के साथ कोऑर्डिनेशन में काम करते हैं और US मिलिट्री ऑपरेशन्स को सपोर्ट करते हैं.

मिस्र

मिस्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी मुख्य रूप से ‘मल्टीनेशनल फोर्स एंड ऑब्जर्वर’ को समर्थन देने तक सीमित है. यह एक अंतरराष्ट्रीय शांति सेना है, जिसका काम मिस्र और इजराइल के बीच शांति समझौते की सुरक्षा शर्तों पर नजर रखना है. अमेरिका समय-समय पर मिस्र की सेना के साथ संयुक्त प्रशिक्षण और अभ्यास करता है, जिसमें काहिरा वेस्ट वायुसेना अड्डा भी शामिल है.

सीरिया

सीरिया में अमेरिका की मौजूदगी इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान से जुड़ी है. यहां अमेरिकी सैनिक अल-तन्फ ठिकाने और उत्तर-पूर्वी सीरिया के कुछ इलाकों में तैनात हैं. AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अप्रैल में पेंटागन ने ऐलान किया था की कि आने वाले महीनों में सीरिया में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाकर एक हजार से कम कर दी जाएगी.

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जॉर्डन

CRS रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी अम्मान से 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में मौजूद मुवफ़्फ़ाक अल साल्टी एयर बेस है. यहां आधुनिक लड़ाकू विमान रखे गए हैं. इसके अलावा, इराक और सीरिया की सीमा के पास ‘टावर 22’ नाम की जगह पर भी सैकड़ों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2023 तक जॉर्डन में कुल 3,188 अमेरिकी सैनिक तैनात थे.

इज़राइल

CRS रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका का इजराइल में कोई मिलिट्री बेस नहीं है, लेकिन वह 'इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा देने' के लिए इजराइली मिलिट्री के साथ समय-समय पर जॉइंट एक्सरसाइज करता है.

यमन

दिसंबर 2023 में बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, कुछ अमेरिकी सैनिक अरब पेनिनसुला में अल-कायदा और ISIS के खिलाफ ऑपरेशन करने के लिए यमन में तैनात हैं.

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