ईरान की सभ्यता खत्म करने की धमकी पर अमल करने से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान कर दिया. ट्रंप ने बताया कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से बात करके लिया गया. इसलिए वेस्ट एशिया की जंग रोकने का 'क्रेडिट' पाकिस्तान की तरफ जाता दिख रहा है. पाकिस्तान दोनों देशों के बीच एक बड़ा मध्यस्थ है. लेकिन दावा किया जा रहा है कि पर्दे के पीछे असली खेल चीन ने खेला, और उसके चलते ही आखिरी समय में बात सीजफायर तक पहुंची.
पाकिस्तान तो सिर्फ चेहरा है, सीजफायर के पीछे असल भूमिका तो चीन की निकली
US Iran Ceasefire: Donald Trump की ईरान की सभ्यता खत्म करने की धमकी ने हालात बड़ी और खुली जंग की ओर मोड़ दिए. ऐसे में वेस्ट एशिया की जंग को रोकना और ज्यादा जरूरी हो गया.


8 अप्रैल को डॉनल्ड ट्रंप के पोस्ट के साथ 40 दिन से चल रही वेस्ट एशिया की जंग थम गई. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान को परमानेंट एग्रीमेंट के लिए शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद आने की दावत दी है. हालांकि, खबर है कि पाकिस्तान को अमेरिका और ईरान को सीजफायर के लिए मनाने के लिए चीन की शरण लेनी पड़ी.
चीन ने कैसे खेल किया?न्यूज एजेंसी AFP से बात करते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने भी दबी जुबान में सीजफायर के पीछे चीन के रोल को माना. जब ट्रंप से ईरान के साथ नेगोशिएशन में चीन के शामिल होने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "हां, मैंने सुना है."
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग समेत खाड़ी के तनावपूर्ण माहौल से चीन गायब दिखा. लेकिन शतरंज की बिसात पर चीन अपनी चाल पूरी सावधानी और टाइमिंग के साथ चलता रहा. इस बीच, डॉनल्ड ट्रंप की ईरान की सभ्यता खत्म करने की धमकी ने हालात बड़ी और खुली जंग की ओर मोड़ दिए. ऐसे में चीन ने सीधे ईरान से बात की. ये बात चीन के दो अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी AP को बताई है. तब जाकर सीजफायर मुमकिन हुआ. इससे पता चलता है कि ईरान पर चीन का सीधा असर है, पाकिस्तान का नहीं.
सीजफायर से घंटों पहले चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में वीटो करके ईरान के खिलाफ आया प्रस्ताव रोक दिया. ये प्रस्ताव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने से जुड़ा था. चीन ने भले ही सीजफायर पर खुलकर टिप्पणी ना की हो, लेकिन पर्दे के पीछे उसकी भूमिका जरूर रही है.
इ़ंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि मंगलवार, 7 अप्रैल को चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान, इजरायल, रूस और खाड़ी के देशों को 26 फोन कॉल कीं. चीन का स्पेशल दूत भी वेस्ट एशिया में मुस्तैद था.
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डॉनल्ड ट्रंप ने वेस्ट एशिया में जो कथित रायता फैलाया, चीन ने सीधे उसमें उतरने से गुरेज किया. ब्रिटेन की 'द इकोनॉमिस्ट' मैगजीन के लेटेस्ट कवर पर इसका सही कारण भी दिखता है, "जब आपका दुश्मन गलती कर रहा हो तो उसे कभी ना टोको." अब अमेरिका और चीन का आपसी कंपटीशन किससे छिपा है. सीजफायर की टाइमिंग भी अहम है, क्योंकि डॉनल्ड ट्रंप अगले महीने चीन का दौरा कर सकते हैं.
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