तृणमूल कांग्रेस (TMC) का एक डेलिगेशन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने चुनाव आयोग के ऑफिस पहुंचा था. तभी मीटिंग में माहौल अचानक गरम हो गया. 10 बजकर 2 मिनट पर शुरू हुई मीटिंग सिर्फ 5 मिनट में खत्म हो गई. राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनसे ‘गेट लॉस्ट’ (get lost comment) कह दिया. बहस किस बात को लेकर शुरू हुई? चुनाव आयोग का क्या पक्ष है? शुरू से बताते है.
5 मिनट की मीटिंग में चुनाव आयुक्त ने कहा 'गेट लॉस्ट', डेरेक ओ ब्रायन के आरोपों पर EC का जवाब आया
Derek o Brien on Election Commissioner: 10 बजकर 2 मिनट पर शुरू हुई मीटिंग सिर्फ 5 मिनट में खत्म हो गई. राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनसे ‘गेट लॉस्ट’ कह दिया. इस मामले पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया भी आई है.


TMC से राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन का कहना है कि वो बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 9 लेटर लेकर गए थे, जिनके जवाब अब तक नहीं मिले हैं. एक तस्वीर भी दिखाई गई जिसमें चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर बीजेपी नेताओं के साथ नंदीग्राम में दिख रहे हैं. बड़े अफसरों और पुलिसवालों के तबादले का मुद्दा भी उठाया गया. उन्होंने बताया कि ज्ञानेश कुमार उनकी इन बातों से भड़क गए. TMC सांसद ने आगे बताया,
‘जब मैंने मुख्य चुनाव आयुक्त से पूछा कि क्या आप निष्पक्ष चुनाव करा पाएंगे? तो उन्होंने मुझे गेट लॉस्ट कह दिया.’
उधर, चुनाव आयोग ने उल्टा डेरेक ओ ब्रायन पर आरोप लगाए. चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन से कमीशन रूम में मर्यादा बनाए रखने को कहा था. लेकिन डेरेक चिल्ला रहे थे और उनका बर्ताव ठीक नहीं था. आयोग ने इस बीच एक ट्वीट कर लिखा,
‘पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव भय रहित, हिंसा रहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित, बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे.’
इसके बाद TMC डेलिगेशन का हिस्सा रहीं राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने ट्वीट कर चुनाव आयोग के दावे को साफ झूठ बता दिया. सागरिका घोष ने लिखा,
‘ऐसा कुछ नहीं कहा गया, जो चुनाव आयोग की तरफ से बताया जा रहा है. सिर्फ दो लाइनें कही गईं, पहली कि ऑथोराइज़्ड सिग्नेटरी कहां हैं? दूसरा दो शर्मिंदा करने वाले शब्द- GET LOST.'
एक TMC सांसद ने ये भी बताया कि मीटिंग रूम से बाहर निकलते वक्त डेलिगेशन के एक सदस्य ने ज्ञानेश कुमार से कहा कि आपको बधाई हो, आप भारत के पहले ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जिन्हें हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में नोटिस दिया गया.
बंगाल SIR में 90 लाख से ज्यादा वोट कटेबीते 7 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ज्यूडिशियल रिव्यू के बाद नई वोटर लिस्ट जारी कर दी. रिव्यू में 60 लाख से ज्यादा नाम हट गए हैं. पूरे SIR की बात करें, तो अब तक करीब 90.66 लाख मतदाताओं का नाम लिस्ट से बाहर हो चुका है. ज्यूडिशियल रिव्यू का सबसे ज्यादा असर मुर्शिदाबाद जिले में देखा गया, जहां सबसे ज्यादा नाम काटे गए. मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर 'बाबरी मस्जिद' का निर्माण करा रहे हैं.
ECI के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया 705 न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में पूरी की गई. सुप्रीम कोर्ट की भी इस पर नजर रही. 294 सदस्यों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा. वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी.
जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें आगे ट्रिब्यूनल में अपील करने का मौका मिलेगा, लेकिन अभी तक ये ट्रिब्यूनल पूरी तरह शुरू नहीं हुए हैं. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या पहले चरण यानी 23 अप्रैल को वोटिंग से पहले इनके मामलों का निपटारा हो सकेगा या नहीं.
वीडियो: क्या बंगाल चुनाव से पहले ओवैसी TMC का खेल बिगाड़ेंगे?






















