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अमेरिकी एजेंसी ने भारत में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी का जो आंकड़ा बताया है, वो शर्मसार करने वाला है

रिपोर्ट के मुताबिक, सभी राज्यों की साइबर पुलिस को अलर्ट जारी किया गया है.

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आंकड़े डरावने हैं लेकिन दुनिया की बेहतरीन एजेंसियों ने मिलकर जुटाए हैं. क्या ये आंकड़ा भी नए भारत की तस्वीर में शामिल होगा?

पिछले पांच महीनों में भारत के सोशल मीडिया पर 25 हज़ार से ज़्यादा चाइल्ड पॉर्नोग्राफी कंटेंट अपलोड किए गए हैं. ये बात किसी को भी चौंका सकती है. लेकिन यूएस की एजेंसी National Center for Missing and Exploited Children (NCMEC) और भारत के National Crime Records Bureau (NCRB) ने मिलकर ये आंकड़े जुटाए हैं. रिपोर्ट बताती है कि इन मामलों में कंटेंट अपलोड करने वालों पर FIR और उनकी गिरफ़्तारी की भी पूरी तैयारी कर ली गई है.

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The Indian Express में छपी एक ख़बर के मुताबिक़, गृह मंत्रालय को यूएस की ये रिपोर्ट मिलने के बाद भारत में सभी राज्यों की साइबर पुलिस को अलर्ट जारी किया गया है.

# क्या है पूरा मामला?

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National Center for Missing and Exploited Children (NCMEC) 1984 में यूएस कांग्रेस की बनाई हुई ग़ैर-लाभकारी संस्था है. इसका काम है बच्चों के यौन शोषण को रोकना. ये संस्थान चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को रोकने और ट्रैक करने के लिए अपने बनाए हुए सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करता है. NCMEC दुनियाभर की कानूनी संस्थाओं को अपनी रिपोर्ट भेजता है. साल 2018 में यूएस की इस संस्था के साथ भारत की National Crime Records Bureau (NCRB) ने एक करार किया. इसके तहत यूएस से भारत को रिपोर्ट मिलनी थी. 23 जनवरी, 2019 तक भारत को चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के 25 हज़ार मामलों की रिपोर्ट मिल चुकी है, जिन्हें सोशल साइट पर अपलोड किया गया. ये सारे मामले सिर्फ़ पिछले पांच महीनों के ही हैं.

चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के मामले में दिल्ली देशभर में सबसे ऊपर और इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल हैं. NCRB की तरफ़ से सभी राज्यों को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है. जांच के बाद आरोपियों पर FIR की जाएगी.

जांच अधिकारियों का कहना है कि सभी मामले Geo-Tagged हैं. सभी राज्यों को आरोपियों की Excel sheet दी गई है. इस रिपोर्ट के आधार पर कुल 7 FIR अब तक दर्ज हो चुकी है. बाक़ी FIR करने की प्रक्रिया चल रही है. अकेले मुंबई में ही इस तरह के 500 मामले जांच के लिए आए हैं.

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# कैसे पता चलता है?

चाइल्ड पॉर्नोग्राफी की जांच करने वाली एजेंसियां कई तरह के सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करती हैं. इनमें से एक सॉफ्टवेयर होता है, जो नग्नता और बच्चे के चेहरे पर आए तनाव को मापता है. इससे तय होता है कि ये वीडियो या तस्वीर चाइल्ड पॉर्नोग्राफी में गिनी जाएगी या नहीं. सॉफ्टवेयर के मार्क करने के बाद अधिकारी इसकी जांच करते हैं कि इस तस्वीर या वीडियो में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी क्या सामग्री है. इसके बाद तस्वीर या वीडियो को इस्तेमाल करने वाले सर्वर से अपलोड करने वालों का पता लगाने के लिए जांच एजेंसियों को नाम आगे भेज दिए जाते हैं. इसके बाद जांच एजेंसियां और सबूत जुटाती हैं और आरोपी पर FIR करती हैं. गिरफ़्तारी के लिए आधार पर्याप्त हो, तो आरोपी गिरफ़्तार किया जाता है.

# क्या है चाइल्ड पॉर्नोग्राफी

जून 2018 में Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) (Amendment) Bill लाया गया था. इस बिल में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के दायरे को और बढ़ाया गया है. अब चाइल्ड पॉर्नोग्राफी में कोई भी ऐसी तस्वीर, वीडियो, डिजिटल या कम्प्यूटर जनरेटेड कंटेंट, जिसमें बच्चा हो और उसे सेक्सुअली इस्तेमाल किया गया हो, चाइल्ड पॉर्नोग्राफी कहलाएगा. इनमें एनिमेशन भी शामिल हैं.


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