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32 साल की सरकारी नौकरी, 50 साल से पेंशन

जालौन के 105 साल के पेंशनर की कहानी

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प्रतीकात्मक तस्वीर.
जब नौकरी को लेकर मारामारी मची पड़ी हो, और कोई ये कहे कि नौकरी में बिताए दिनों से ज्यादा समय से वो पेंशन ले रहा है तो हैरानी ही होगी. ऐसी ही एक मामला यूपी के जालौन का है. यहां जिले के सबसे बुजुर्ग पेंशनर के साथ ऐसा ही है. जिले के सबसे उम्रदराज पेंशनर  जालौन जिले के ग्राम हरदोई राजा गांव में रहते हैं बाबूराम द्विवेदी. उम्र है 105 साल. नौकरी से ज्यादा पेंशन लेने वाले बाबूराम द्विवेदी जिले के सबसे उम्रदराज पेंशनर हैं. उन्होंने नौकरी तो केवल 32 साल की, लेकिन पेंशन 50 साल से ले रहे हैं. पिछली बार सबसे बुजुर्ग पेंशनर के रूप में उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है. 8 जनवरी 1915 को जन्मे बाबूराम द्विवेदी 5 अगस्त 1938 में राजस्व विभाग में भर्ती हुए थे. करीब 32 साल नौकरी करने के बाद अमीन के पद से 31 दिसंबर 1970 को रिटायर हुए. इसके बाद एक जनवरी 1971 से उन्हें पेंशन मिलनी शुरू हुई, जो अब तक जारी है. बेटे-बेटियां भी पेंशन पा रहे 105 साल के पेंशनर बाबूराम द्विवेदी के बेटे, बेटियां भी रिटायर होकर पेंशन पा रहे हैं. उनके सबसे बड़े बेटे रामनरेश 69 साल के हैं. शिक्षा विभाग में काम करते थे. अब रिटायर हो चुके हैं. दूसरे बेटे रमेश चंद्र हैं, जिनकी उम्र 67 साल है. एडीओ पंचायत के पद से रिटायर हो चुके हैं. 66 साल की छोटी बहू प्रभा भी स्वास्थ्य विभाग में सुपरवाइजर के पद से रिटायर हो गई हैं. देश की आजादी से पहले जन्मे बाबूराम द्विवेदी अपने एरिया के जाने-माने व्यक्ति है. लोग उनसे कई मसलों पर अक्सर सलाह-मशविरा करने पहुंच जाते हैं. वह भी अपने भरे-पूरे परिवार के साथ उन्हें राय देते हैं. उनका परिवार अब भी साथ ही रहता है.

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