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अतीक-अशरफ मर्डर के बाद CM योगी पहली बार बोले- 'माफिया अब डरा नहीं सकता... '

योगी आदित्यनाथ इशारों-इशारों में बड़ी बात बोल गए...

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अतीक के मर्डर के बाद योगी की पहली स्पीच | फाइल फोटो: आजतक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अतीक और अशरफ अहमद के मर्डर के बाद पहला बयान आया है (Yogi adityanath first speech after atiq ahemed murder). लखनऊ में मंगलवार, 18 अप्रैल को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यूपी में अब कानून का राज है. कोई माफिया किसी को डरा नहीं सकता. साथ ही उनका कहना था कि यूपी में अब दंगे नहीं होते.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा,

“2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था खराब थी और प्रदेश दंगों के रूप कुख्यात था. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. अब कोई पेशेवर अपराधी और माफिया किसी उद्यमियों को डरा धमका नहीं सकता है… उत्तर प्रदेश आज आपको बेहतरीन कानून व्यवस्था की गारंटी देता है. इसके अलावा पहले कहा जाता था कि जहां सड़कों पर गड्ढे दिखें समझो उत्तर प्रदेश की सीमा आ गई है. लेकिन आज हम राज्य के अंदर की सड़कों को फोरलेन से जोड़ चुके हैं.”

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मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अतीक अहमद की हत्या के मामले पर जांच से संबंधित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. मामले की सुनवाई होगी 24 अप्रैल को.

दरअसल, अतीक और अशरफ की हत्या के बाद मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी की ओर से याचिका दायर की गई थी. इस पर वकील विशाल ने कहा था,

"भारत की सर्वोच्च अदालत के सामने मेरी ओर से एक याचिका दायर की गई है. इसमें उत्तर प्रदेश में साल 2017 से हुए 183 एनकाउंटर्स का जिक्र है. हाल ही में उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने मीडिया को बताया था कि पुलिस ने साल 2017 से 183 एनकाउंटर्स किए हैं. ऐसे में हमारी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया जाए. कमिटी इन एनकाउंटर्स की जांच करे. साथ ही, अतीक अहमद और अशरफ की पुलिस कस्टडी में हुई हत्या के मामले की भी जांच हो."

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अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के मामले में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने भी याचिका दायर की है. अमिताभ ठाकुर ने कहा है,

"भले ही अतीक अहमद और उसके भाई अपराधी हों लेकिन जिस प्रकार से उनकी हत्या हुई है उससे इसके राज्य पोषित होने की पर्याप्त संभावना दिखती है. साथ ही जिस प्रकार इस हत्या की पृष्ठभूमि है, उससे भी इस घटना के राज्य पोषित होने की संभावना बढ़ जाती है. इस हत्या के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले को कमजोर (ढीला) करने का प्रयास किया है. मामले में कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की है. इससे भी उच्च स्तरीय षडयंत्र की संभावना दिखती है."

अमिताभ ठाकुर ने मांग करते हुए कहा है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की निगरानी में ही की जा सकती है.

अतीक और अशरफ की हत्या के मामले में कई बातें सामने आई थीं. 15 अप्रैल की रात मीडिया से बातचीत के दौरान मीडियाकर्मी बनकर पहुंचे तीन आरोपियों ने अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी थी. हमलावरों - लवलेश तिवारी, मोहित उर्फ सनी, और अरुण मौर्य - ने मौके पर ही सरेंडर कर दिया था.

वीडियो: अतीक अहमद मर्डर पर मायावती ने योगी सरकार से क्या सवाल कर दिया?

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