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वेनेजुएला से अमेरिका की 'दुश्मनी' क्यों हो गई? पूरी कहानी जान लीजिए

US attacked Venezuela: अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करके पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है. ट्रंप का दावा है कि उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolas Maduro को पत्नी समेत पकड़ लिया है.

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अमेरिका और वेनेजुएला की लंबे समय से दुश्मनी चल रही है. (India Today)

वेनेजुएला पर शनिवार, 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी हमलों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बताया कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया है और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है. किसी भी देश के मौजूदा राष्ट्रपति को ऐसे पकड़ना दुनिया के इतिहास में एक दुर्लभ घटना है. हालांकि, ये एक दिन का बवाल नहीं है. लंबे समय से अमेरिका वेनेजुएला पर ‘शिकंजा कसने’ की कोशिश में लगा था. 

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मारिया कोरिना मचाडो के रूप में 2024 का शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वाले वेनेजुएला में अशांति के इस तूफान ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है. दोनों देशों के बीच ‘दुश्मनी’ की इस चरम अवस्था से वेनेजुएला में अव्यवस्था तो फैली ही है. उसके भविष्य पर भी आशंकाओं के बादल मंडराने लगे हैं. सवाल है कि ये पूरा झगड़ा शुरू कहां से हुआ था? क्या इसकी जड़ें सितंबर 2025 में वेनेजुएला के समुद्री तटों के पास अमेरिकी वॉरशिप की तैनाती से ही जुड़ी हैं या कोई पुराना 'क्लेश' है जो अब और ज्यादा गंभीर होकर सामने आया है?

चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.

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‘दी गार्डियन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते आज से नहीं बल्कि 1999 से ही खराब हैं, जब ह्यूगो शावेज वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने थे. एक स्कूल टीचर के बेटे शावेज खुद को समाजवादी और अमेरिकी साम्राज्यवाद का सबसे बड़ा विरोधी बताते थे. जब वो राष्ट्रपति बने तो उन्होंने अफगानिस्तान और इराक पर अमेरिकी हमलों का विरोध किया. इतना ही नहीं, क्यूबा और ईरान जैसे 'एंटी-अमेरिकन' देशों से दोस्ती भी बढ़ाई. संयुक्त राष्ट्र में अपने एक भाषण में तो उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को ‘शैतान’ बता दिया था.

साल 2002 में जब शावेज को राष्ट्रपति बने सिर्फ 3 साल हुए थे, तब कथित तौर पर अमेरिका पर उनकी सरकार गिराने की कोशिश के आरोप लगाए गए थे. ये आरोप शावेज ने ही लगाए थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका उनके तख्तापलट की कोशिशों का समर्थन कर रहा है.

इसने पहली बार बड़े पैमाने पर उनके अमेरिका के साथ रिश्ते बिगाड़े. अमेरिका के लोगों खासतौर पर रिपब्लिकन पार्टी के 'उग्रवादी' धड़े को लगने लगा कि वेनेजुएला की शावेज की समाजवादी सरकार भी क्यूबा की तरह ही अमेरिका की स्वाभाविक दुश्मन है. ये रिपब्लिकन पार्टी वही है, जिससे चुनाव लड़कर डॉनल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने हैं.

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अमेरिका ने शावेज सरकार पर आरोप लगाया कि उसने अपने विरोधियों पर दमन की कार्रवाई की और निजी कंपनियों को अपने कब्जे में लिया. इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया गया. हालांकि, बाद में दोनों देशों के रिश्तों में कभी-कभार सुधार भी हुआ लेकिन 2013 में ह्यूगो शावेज की मौत हो गई. उन्होंने अपने जीते जी ही निकोलस मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था. फिर क्या था. शावेज के बाद मादुरो सत्ता में आए लेकिन उनकी सरकार में अमेरिका से रिश्ते बनने की बजाय बिगड़ते ही चले गए क्योंकि उन्होंने भी अमेरिका के दुश्मनों से दोस्ती गांठने की शावेज की नीति जारी रखी.

अमेरिका के दुश्मनों से दोस्ती?

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 21वीं सदी की शुरुआत से ही वेनेजुएला ने उन देशों के साथ करीबी रिश्ते बनाने शुरू किए, जो क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अमेरिका विरोधी माने जाते हैं. लैटिन अमेरिका में उसके सबसे करीबी सहयोगी क्यूबा और निकारागुआ बने, जबकि इससे बाहर निकोलस मादुरो ने चीन और रूस जैसी दो बड़ी वैश्विक ताकतों के साथ वेनेजुएला के रिश्ते मजबूत किए. अमेरिका के एक और विरोधी देश ईरान के साथ भी वेनेजुएला ने पींगे बढ़ाना शुरू किया. ये सारी बातें अमेरिका को खुश तो नहीं करतीं. लिहाजा तनाव बढ़ता ही चला गया.

अमेरिका और वेनेजुएला सरकार के रिश्तों में बिगाड़ साल 2019 में तब साफतौर पर दिखा, जब डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने मादुरो की सरकार को ‘अवैध’ बता दिया था. मादुरो ने इस चुनाव में जीत दर्ज की थी. हालांकि, विपक्ष ने इस चुनााव में भारी गड़बड़ी के आरोप लगाए थे.

दावा किया गया कि मादुरो इस चुनाव में बुरी तरह हारे थे, लेकिन उन्होंने पद नहीं छोड़ा और दमन के जरिए राष्ट्रपति बने रहे. उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन थे. उनकी सरकार ने मादुरो के चुनाव को सही नहीं माना और विपक्षी उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज को वेनेजुएला के राष्ट्रपति चुनाव का विजेता मान लिया.

ट्रंप की वापसी पर गतिरोध बढ़ा

इसी बीच जनवरी 2025 में डॉनल्ड ट्रंप दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनकर वॉइट हाउस में वापस आ गए. अपने नए कार्यकाल की शुरुआत से ही उन्होंने मादुरो को अपना बड़ा निशाना बना लिया. वेनेजुएला सरकार पर लगातार दबाव बनाने की रणनीति अपनाई. इतना ही नहीं, अगस्त 2025 में उनकी सरकार ने मादुरो पर इनामी राशि बढ़ाकर 50 मिलियन डॉलर यानी करीब 370 करोड़ रुपये कर दी. अमेरिकी सरकार ने उन्हें दुनिया के ‘सबसे बड़े ड्रग तस्करों में से एक' बताया.

मार्च 2025 में दोनों सरकारों के बीच तनाव तब ज्यादा बढ़ गया जब अमेरिका ने 200 से ज्यादा वेनेजुएला के प्रवासियों को अपराधी बताकर अल सल्वाडोर के आतंकवाद नियंत्रण केंद्र में भेज दिया. वेनेजुएला ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘अपहरण’ करार दिया और उनकी वापसी की मांग की.

नावों पर कार्रवाई

सितंबर 2025 में अमेरिका ने नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के नाम पर कैरिबियाई सागर में अपने सैन्य जहाज और विमान तैनात कर दिए. तब अमेरिका ने उन नावों पर हमला किया, जिनके बारे में उसका दावा था कि वो उसके इलाके में नशीले पदार्थों की तस्करी करने की कोशिश कर रही थीं. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर तक कैरिबियाई सागर और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में कम से कम 30 शिप नष्ट किए गए थे, जिसमें 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. 

अमेरिका ने इसी बीच वेनेजुएला के तेल टैंकर भी जब्त करने शुरू किए और देश के चारों ओर अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी. साथ ही ट्रंप खुलकर वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन की बात करने लगे. नवंबर के आखिर में उन्होंने मादुरो को सत्ता छोड़ने का अल्टीमेटम और देश से सुरक्षित बाहर जाने का ऑफर भी दिया लेकिन मादुरो ने ये कहते हुए प्रस्ताव ठुकरा दिया कि वो ‘गुलामों वाली शांति’ नहीं चाहते.

मादुरो ने अमेरिका पर देश के तेल भंडार पर कब्जा करने की साजिश का आरोप लगाया. वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार में से एक है. वेनेजुएला तेल उत्पादक देशों के वैश्विक संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का संस्थापक सदस्य भी है.

ट्रंप प्रशासन के दबावों के बीच मादुरो अमेरिका को लेकर नरम भी पड़ते दिखे. वो बार-बार कहते रहे कि वेनेजुएला अमेरिका से युद्ध नहीं चाहता. इसी बीच वह छात्रों के साथ ‘नो वॉर, यस पीस’ गाने पर नाचते भी दिखे. अपनी कथित गिरफ्तारी से ठीक 2 दिन पहले यानी गुरुवार, 1 जनवरी 2026 को भी मादुरो एक इंटरव्यू में कहते दिखे कि वो अमेरिका के निवेशकों का देश के तेल सेक्टर में स्वागत करेंगे.

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