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बांग्लादेश ने भारत में काम कर रहे अपने 2 डिप्लोमैट्स हटाए, अब शेख हसीना का प्रत्यर्पण तय है?

जिन दो राजनयिकों Shaban Mahmud और Ranjan Sen को हटाया गया है, वो First Secretary (Press) के पद पर कार्यरत थे. इधर, Sheikh Hasina के प्रत्यर्पण को लेकर भी बातें हो रही हैं.

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Sheikh Hasina लगभग तीन सप्ताह से भारत में हैं. (फ़ाइल फ़ोटो - इंडिया टुडे)

बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार ने भारत में काम कर रहे अपने दो राजनयिकों को नौकरी से हटा दिया है. दोनों को कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म होने से पहले पद छोड़ने के लिए कहा गया है. इस बीच, इनमें से एक राजनयिक ने पद छोड़ भी दिया है. बताया गया कि ये आदेश 17 अगस्त से लागू हो गया है. वहीं, शेख़ हसीना (Sheikh Hasina) कब तक भारत मे रहेंगी, इस पर सस्पेंस जारी है.

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राजनयिकों शबान महमूद और रंजन सेन (दोनों फ़र्स्ट सेक्रेटरी (प्रेस) के पद पर कार्यरत) को कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म होने से पहले पद छोड़ने के लिए कहा गया था. सेन का कार्यकाल 2026 में ख़त्म होने वाला था. लेकिन, इससे पहले ही 24 अगस्त को उन्होंने पद छोड़ दिया. रंजन कोलकाता में बांग्लादेशी वाणिज्य दूतावास में थे. शेख हसीना सरकार ने उन्हें नियुक्त किया था. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक़, ढाका लौटने में उन्हें कुछ समय लग सकता है.

इससे पहले, अगस्त महीने की शुरुआत में भारत ने भी बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग में मौजूद कम ज़रूरी कर्मचारियों और राजनयिकों के परिवारों को बाहर निकाल लिया था. सरकार ने पड़ोसी देश में हिंसा की चिंताओं के चलते ये क़दम उठाया था. बताते चलें, हसीना लगभग तीन सप्ताह से भारत में हैं. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली कार्यवाहक सरकार द्वारा उनके राजनयिक पासपोर्ट और संबंधित वीजा विशेषाधिकारों को रद्द कर दिया है. ऐसे में उनके प्रत्यर्पण के अनुमान लगाए जा रहे हैं.

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बांग्लादेशी अखबार डेली स्टार ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि हसीना के पास रद्द किए गए राजनयिक पासपोर्ट के अलावा कोई दूसरा पासपोर्ट नहीं है. इससे बांग्लादेश और भारत के बीच प्रत्यर्पण संधि के कानूनी ढांचे के तहत उनके प्रत्यर्पण का अनुमान है. बांग्लादेश में शेख हसीना पर हत्या के 42 मामलों सहित 51 मामले चल रहे हैं. इधर, हसीना ने अभी तक भविष्य की अपनी योजनाओं पर कोई टिप्पणी नहीं की है. लेकिन उनके बेटे साजिब वाजेद जॉय ने संकेत दिया है कि वो लंबे समय तक भारत में रह सकती हैं.

इससे पहले, बड़े पैमाने पर छात्रों के प्रदर्शन का सामना कर रहीं शेख हसीना को 5 अगस्त को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफ़ा देने और देश छोड़कर भारत आने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

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