अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने हाल ही में बड़े जोश के साथ एक ऑपरेशन की घोषणा की थी. नाम था ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’. इसका मकसद था स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की नाकेबंदी को तोड़ना. लेकिन कुछ ही घंटों में ट्रंप ने इससे अपने हाथ खींच लिए. कहा कि हमें ईरान से एक अच्छी डील दिख रही है, उस दिशा में ‘बड़ी प्रगति’ हुई है.
प्रोजेक्ट फ्रीडम क्यों बंद हुआ? मनमानी कर रहे ट्रंप को सऊदी अरब ने तेवर दिखा दिए
Trump halted Project Freedom: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की घोषणा की थी. लेकिन बाद में वे इससे पीछे हट गए. अब दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से पता चला है कि अमेरिका ने सऊदी अरब से इस बारे में पहले से कोई बात ही नहीं की थी.


मगर सवाल उठा कि अचानक क्यों? आप तो जहाजों की मदद कर रहे थे. इसे मानवीय कदम बता रहे थे. लोगों की मदद कर रहे थे. फिर क्या हुआ? बाद में पता लगा कि यहां तो ट्रंप के बड़े सहयोगी ने ही साथ देने से इनकार कर दिया.
दरअसल, ट्रंप दुनिया के सामने ऑपरेशन फ्रीडम की बात रखने से पहले अपने सहयोगी देशों से ही को-ऑर्डिनेट करना भूल गए. बस, ये बात सऊदी अरब को नागवार गुजरी. और उसने अमेरिका को अपने हवाई अड्डे और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी.
NBC ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप के 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की घोषणा करने से सऊदी अरब नाराज हो गया था. सऊदी अरब ने अमेरिका को साफ बता दिया कि वो अमेरिका की सेना को प्रिंस सुल्तान एयरबेस से विमान उड़ाने की अनुमति नहीं देगा.
बताया गया कि ट्रंप और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच हुई फोन कॉल से भी ये मतभेद दूर नहीं हो पाए. नतीजा ये रहा कि मिस्टर प्रेसिडेंट को ऑपरेशन रोकना पड़ा. रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत ने भी इस प्रस्तावित मिशन के लिए वॉशिंगटन को अपने बेस और हवाई क्षेत्र इस्तेमाल करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया.
रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट के एक राजनयिक ने कहा, "अमेरिका ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के बारे में ऐलान करने से पहले ओमान के अधिकारियों से कोई तालमेल नहीं बिठाया था."
प्रोजेक्ट फ्रीडम ऑपरेशन 4 मई को शुरू हुआ था. ट्रंप ने इसे एक मानवीय कदम बताया. कहा कि वहां मौजूद हजारों नाविकों का खाना खत्म हो रहा है. इसलिए हमें उनकी मदद करनी होगी. मगर इस ऐलान के साथ ही ईरान की IRGC ने चेतावनी दी थी कि जो भी जहाज निकलेगा उस पर हमला होगा. हुआ भी ऐसा ही.
ईरान ने उन जहाजों पर क्रूज मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिन्हें अमेरिका सुरक्षा दे रहा था. अमेरिका के दोस्त UAE पर भी मिसाइलों और ड्रोन से हमले हुए. साउथ कोरिया के एक जहाज़ में आग लग गई. ऑपरेशन के तहत होर्मुज से सिर्फ दो जहाज सुरक्षित निकल पाए.
वीडियो: दुनियादारी: ईरान के किस 'मास्टरस्ट्रोक' पर ट्रंप ने प्रोजेक्ट फ्रीडम रोक दिया?






















