
एएसपी ग्रामीण की यही फोटो खूब शेयर की जा रही है.
फोटो को देखकर गुस्सा ही आएगा. कैसे कोई पुलिस वाला एक महिला को ऐसे बाल पकड़कर घसीट सकता है. हमने इस पर खबर करने की सोची. पता किया. तो एएसपी सतीश कुमार के मुताबिक इसका एक दूसरा पहलू भी है.

फोटो में बाईं तरफ पिंक टीशर्ट में महिला कॉन्सटेबल है. उसे इस महिला से बचाने के लिए ही एएसपी ने हाथ उठाया था.
उनका कहना है कि जिस वक्त उन्होंने उस महिला को खींचा. वो एक महिला कॉन्सटेबल की गर्दन अपने पैरों से दबाए थी. सतीश ने उस महिला कॉन्सटेबल का नाम सरिता सोनकर बताया है. सतीश बोले, 'अगर मैं तुरंत जाकर उस महिला को नहीं हटाता तो महिला कॉन्सटेबल की जान जा सकती थी. उसका सिर पहले ही फूट चुका था. उस महिला को हटाकर तुरंत महिला पुलिस के हवाले कर दिया. ये चंद सेकंड के लिए था. मगर इतने में ही किसी ने फोटो क्लिक कर ली और वो वायरल हो गई.'
ऐसी और भी कई तस्वीरें हैं, जो बताती हैं कि आंगनबाड़ी वर्कर्स ने भी पलटवार करते हुए पुलिस पर हमला बोला था. फोटो देखिए-

महिला कॉन्सटेबल्स पर आंगनबाड़ी वर्कर्स ने भी हमला बोला था.
18 सितंबर से चल रहा था धरना-प्रदर्शन
आंगनबाड़ी वर्कर्स राज्य कर्मचारी बनाने समेत कई मांगों के लिए 18 सितंबर से लखनऊ में प्रदर्शन कर रही थीं. वैसे तो उनकी कई मांगें हैं. मगर मेन मांग राज्य कर्मचारी का दर्जा और 18,000 रुपये मानदेय की है. बाकी मांगें नीचे पढ़ लीजिए-

आंगनबाड़ा वर्कर्स की प्रमुख मांगें.
23 अक्टूबर को सभी आंगनबाड़ी वर्कर्स हजरतगंज पर आ गईं. दोनों तरफ की मेन रोड ब्लॉक कर दी. इससे दो दिन लखनऊ में जाम की स्थिति बनी रही. फिर रात को पुलिस ने किसी तरह हल्का बल प्रयोग कर एक तरफ की रोड खाली करवाई. 12 नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. इससे आंगनबाड़ी वर्कर्स नाराज हो गईं. 24 अक्टूबर को सुबह पुलिस इनसे बातचीत करने पहुंचीं तो हंगामा होने लगा. इस बीच किसी ने पुलिस पर पानी की बोतल फेंकी. फिर लंच पैकेट फेंके जाने लगे. इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने लाठीचार्ज के आदेश दे दिए. लाठीचार्ज में घायल 15 से अधिक आंगनबाड़ी वर्कर्स को सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.

आंगनबाड़ी वर्कर्स ने मेन सड़क को ही बिस्तर बनाके घेर रखा था.
हमें नहीं पता कि पुलिस की तरफ से जो कहा गया, उसमें कितनी सच्चाई है. हो सकता है कि उनका कहा सही हो. लेकिन जो तस्वीरें हैं, उन्हें कोई नकार नहीं सकता. बेहतर होता कि इसमें से किसी चीज की नौबत ही न आती. सरकार पहले ही उनकी सुन लेती.
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