The Lallantop

चलती ट्रेन में हुई डिलिवरी, हिजड़े बन गए दाई

बच्चे होने पर नेग लेने नहीं गई थीं. खुद बच्चा पैदा कराया, नहीं तो जाने क्या होता. सुबह सवेरे पढ़ो हैप्पी स्टोरी.

Advertisement
post-main-image
Representative Image: Youtube
ट्रेन में अगर ताली बजाकर आय-हाय करता कोई आता है तो दुबक जाते हो न. पिछली बोगी में हों तो अगली बोगी वालों को पता चल जाता है कि हिजड़े उगाही करने आ रहे हैं. हिजड़ों के लिए अमूमन यही छवि हर दिमाग में है. लेकिन ये स्टोरी पढ़ो. तमिलनाडु के वेल्लोर में तीन हिजड़ों ने एक 25 साल की औरत की डिलिवरी कराई. जच्चा-बच्चा दोनों फिट हैं. पहुंच गए अस्पताल. पूरी कहानी ये है कि जरीना बेगम और उनके शौहर आलम मोहम्मद और उनके दो बच्चे ट्रेन में चढ़े. तिरुअनंतपुरम-गुवाहाटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस में. S10 बोगी में उनकी सीट थी. जोलरपेट्टै जंक्शन से चढ़े थे. गाड़ी चल दी. वाणियंबाडि स्टेशन क्रॉस हुआ. फिर जरीना के पेट में दर्द शुरू हो गया. लेबर पेन. अब मियां आलम की हालत खराब. अगल-बगल बैठी सवारियों की सिट्टी-पिट्टी गुम. करें तो क्या करें. सब प्लान करने लगे कि चलो ट्रेन की चेन खींच दें. लेकिन जब पता चला कि रास्ते में कोई मेडिकल सुविधा मिलेगी ही नहीं. तो प्लान ड्रॉप कर दिया. पुलिस वालों ने दन्न से फोन लगाया कटपड़ी स्टेशन कि सब इंतजाम करके रखो. लेकिन कहां वो स्टेशन 60 किलोमीटर दूर. यहां मामला हाथ से निकला जा रहा था. तब भैया हुई हीरो की एंट्री. मालती नाम की 26 साल की ट्रांसजेंडर, अपनी दो और साथियों को ले आई. एक श्यामलाऔर दूसरी सांकरी, दोनों की उम्र 50 के आस-पास. जोलरपेट स्टेशन से चढ़ीं थीं ये लोग. मालती ने सन 2009 में दो साल का डिप्लोमा किया था नर्सिंग का. गुडियट्टम के सरकारी अस्पताल में. सरकारी स्कीम के तहत. उन सबने टाइम से पहुंच कर जरीना बेगम को संभाल लिया. zarina सवेरे 7 बजकर 20 मिनट पर डिलिवरी हो गई. मालती ने बताया कि जो डिलिवरी डेट डॉक्टरों ने दी थी, दोनों उसकी प्लानिंग करके निकले थे. लेकिन बच्चा पहले हो गया तो क्या करें. फिर कटपड़ी स्टेशन आ गया. एंबुलेंस बुलाकर वेल्लोर के सरकारी अस्पताल में भेज दिया इनको. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक वो डॉक्टरों की देख-रेख में हैं, भले-चंगे हैं.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement