धनबाद से धनसार रेल रूट पर खेती हो रही है. और धनसार स्टेशन पर दुकानें चल रही हैं. रेलवे ऑफिस में पोल्ट्री फार्म खुला गए हैं. स्टेशनों के बीच की पटरियां, खंबे, फाटक और सिग्नल निकाल कर बेच दिए गए हैं. बंद पड़े इन स्टेशनों का इंफ्रास्ट्रक्चर सलामत था. लेकिन लोगों की कृपा से करोड़ों रुपयों की रेलवे संपत्ति गायब हो गई है. अनुमान लगाया जा रहा है कि रेलवे को तकरीबन 50 करोड़ का नुकसान हो चुका है.कमाल की बात ये है कि पूरी तरह चोरों के कब्जे में आ चुके झरिया स्टेशन के पीछे आज भी रिजर्वेशन काउंटर चल रहे हैं. जहां रोजाना सैकड़ों लोगों को ट्रेन में रिजर्वेशन दिया जा रहा है. धनबाद को देश की कोयला राजधानी माना जाता है. अंग्रेजों ने यहां 1905 में रेलवे ट्रैक बनवाया था. कोयले को इसी ट्रैक से ट्रांसपोर्ट किया जाता रहा है. और इस तरह ये देश के सबसे बिजी रेल रूटों में से एक हो गया था. लेकिन यहां जमीनी आग फैलने का खतरा रहता. इसलिए साल 2005 में रेलवे वालों ने ये रूट बंद कर दिया. लेकिन जो नुकसान आग न कर पाई वो चोरों ने कर दिया. लोकल लोगों का कहना है कि ये सब रेल अधिकारियों की मिली-भगत से हुआ है. लोगों ने बताया कि स्टेशनों की देखभाल करने वाला कोई है ही नहीं.
रेलवे स्टेशन चोरी हो गए, पूरे के पूरे
पटरियां, खंबे, फाटक, सिग्नल, सब गायब हैं. आप देख कर कह ही नहीं सकते कि यहां कभी स्टेशन हुआ करते थे.
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फोटो - thelallantop
रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में जगह-जगह एक लाइन लिखी रहती है. रेल आपकी अपनी संपत्ति है. अर्थ ये है कि आप इसे वैसे ही साफ़ रखें जैसे अपने घर को रखते हैं. लेकिन कुछ लोगों ने इसे लिटरली ले लिया. अपनी संपत्ति मान लिया. और 'साफ़' कर दिया. धनबाद-झज्जर-सिंदरी रेल रूट से एक समय बड़ी सारी ट्रेनें जाया करती थीं. दर्जनों स्टेशन पड़ते थे. लेकिन ये सभी स्टेशन अब ख़त्म हो चुके हैं. या यूं कहिए कि चोरी हो गए हैं. देख कर लगता ही नहीं कि यहां धनसार या झरिया नाम के स्टेशन कभी हुआ करते थे.
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