चेन्नई से 170 किलोमीटर दूर विल्लुपुरम में SVS मेडिकल कॉलेज है. यहां स्टूडेंट्स के लिए बेसिक फैसिलिटी भी नहीं है और चोरकटई का लेवल ऐसा है कि जी घिना जाए. तीनों छात्राओं की लाश एक ही कुंए से मिली. पुलिस कॉलेज के मालिकों की खोज में लग गई है.
तीनों छात्राओं ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था, 'हम ने अपना सेकेंड ईयर भी पास नहीं किया है और कॉलेज वालों ने हमसे अब तक 6 लाख रुपये ऐंठ लिए हैं.''द इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज में क्लासरूम, लैब और टीचर्स हैं ही नहीं. कॉलेज में 100 के करीब स्टूडेंट्स हैं. कॉलेज प्रशासन एक स्टू़डेंट से करीब 5 लाख रुपये चार्ज करता है. पर बीते 8 सालों में कॉलेज से एक भी प्लेसमेंट नहीं हुआ है.

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आगे जानिए कॉलेज का पूरा हाल.
1. गवर्नमेंट ने कोर्स के लिए 30-55 हजार रुपये फिक्स की है. लेकिन कॉलेज मैनेजमेंट एक स्टूडेंट से करीब 95 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक ऐंठता था. पांच साल की पूरी फीस दो या तीन साल में ही वसूल ली जाती थी.
2. एक स्टूडेंट के मुताबिक, खाना बनाने के लिए घटिया सामान मुहैया कराया जाता था. मैनेजमेंट खाने को खूब तीखा बनाने के लिए कहता था. ताकि कम से कम खाने की खपत हो.
3. स्टूडेंट्स से टॉयलेट की सफाई भी करवाई जाती थी. कर्म योगा के नाम पर कैंपस की सफाई और रिपेयरिंग का भी काम करवाया जाता था.
4. कुछ सब्जेक्ट पढ़ाने के लिए कॉलेज मैनेजमेंट इंटर्न का इस्तेमाल करता था. ये वो इंटर्न होते थे, जिनको ओरिजिनल सर्टिफिकेट देने से इनकार करने के बाद मैनेजमेंट कॉलेज में पढ़ाने के लिए फोर्स करता था. एक स्टूडेंट ने कहा, 'मुझसे सीनियर बैच 100 स्टूडेंट्स के साथ शुरू हुआ था. और साल आखिर होते-होते बचे 10 स्टूडेंट.'
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कुकुरमुत्ते की तरह उगे प्राइवेट कॉलेजों ने गरीब परिवार के छात्र-छात्राओं को किस तरह का मानसिक तनाव दिया है, ये बात किसी से छिपी नहीं है. दिल्ली से तमाम VIP उड़ानें आज कल हैदराबाद तो पहुंच ही रही हैं. पर पता नहीं कोई जहाज यहां से 800 किलोमीटर दूर विल्लुपुरम भी पहुंचेगा या नहीं.
























