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पुलवामा हमले का जश्न मनाने वाला बरी होना चाहता था, कोर्ट ने तगड़ी सजा देकर बुरा हाल किया

छात्र के वकील ने अच्छे व्यवहार के आधार पर बरी करने की अपील की थी, कोर्ट ने जवाब देकर चुप करा दिया.

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पुलवामा हमले की तारीफ करते हुए फैज राशिद ने पोस्ट किए थे . (फाइल फोटो: आजतक)

14 फरवरी, 2019. पुलवामा हमले की तारीख. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. उसके कुछ घंटे बाद बेंगलुरु में इंजीनियरिंग के एक छात्र फैज राशिद ने इस घटना को लेकर फेसबुक पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए. इनमें दुःख और श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि इस हमले को लेकर ख़ुशी जताई गई थी. पोस्ट पर बवाल हुआ, मामला पुलिस को पता चला, गिरफ्तारी हो गई.

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पुलिस ने फैज पर IPC की धारा 153A (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 124A (देशद्रोह), 201 (अपराध के सबूतों को गायब करना) और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया. उसने जमानत के लिए कई अर्जी दीं, जिन्हें कोर्ट ने खारिज कर दिया. यानी गिरफ्तारी के बाद से ही वो जेल में है.

अब कोर्ट ने सजा सुनाई

बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने सोमवार, 31 अक्टूबर को इस मामले में सजा का ऐलान किया. उसने फैज राशिद को पुलवामा आत्मघाती बम विस्फोट का जश्न मनाने का दोषी ठहराया और 5 साल साधारण कैद की सजा सुनाई. फैज पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. विशेष अदालत के न्यायाधीश सीएम गंगाधर ने कहा कि दोषी अगर जुर्माना नहीं भर पाता तो उसे छह महीने और कैद में रहना होगा.

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कोर्ट ने जघन्य अपराध क्यों माना? 

सुनवाई के दौरान फैज के वकील ने जेल में उसके अच्छे व्यवहार के चलते अदालत से उसे रिहा करने की अपील की. कोर्ट ने इस अपील को खारिज करते हुए कहा,

'आरोपी कोई अनपढ़ या सामान्य व्यक्ति नहीं है. अपराध किए जाने के समय वह इंजीनियरिंग का छात्र था. उसने जानबूझकर अपने फेसबुक अकाउंट पर पुलवामा अटैक को लेकर पोस्ट किया. उसने पुलवामा अटैक के शहीदों की मौत पर खुशी मनाई.'

कोर्ट ने आगे कहा कि इन बातों को ध्यान में रखते हुए आरोपी का अपराध इस देश के खिलाफ और जघन्य है.

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