एक रूसी टीवी चैनल ने आर्कटिक और अंटार्कटिक रिसर्च इंस्टिट्यूट के प्रेस सचिव सर्गेई लिसेंकोव का हवाला देते हुए बताया, 'स्लज आइस और स्लॉब आइस करके पहले वहां एक घटना होती है. उसके बाद हवा, समुद्र तट और टेंपरेचर में एक तरह का एडजस्टमेंट होता है. जो बाद में बर्फ के गोलों का रूप ले लेता है.' Ura.ru एक वेबसाइट है. उसके मुताबिक, दिसंबर 2014 में ऐसी ही एक घटना फिनलैंड की खाड़ी में भी हुई थी. दिसंबर 2015 में मिशिगन झील में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला था.खुद ब खुद बर्फ के गोले बन रहे हैं, और लोग हैरान हैं
देखने में पत्थर जैसे हैं. समुद्र का एक किनारा कब्ज़ा रखा है इन गोलों ने.
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Source : BBC
जाड़े का मौसम आ गया है. वो अलग बात है कि ठंड अभी थोड़ी थोड़ी सी लगती है. मॉर्निंग शिफ्ट में ऑफिस जाने वाले लोगों को बस नहाने का मन नहीं करता. वैसे ये स्मॉग न, दिसंबर-जनवरी में पड़ने वाले ठंड का माहौल बनाने की कोशिश में है. खैर हम आपको बता रहे थे कि नॉर्थ-वेस्ट साइबेरिया में है ओब खाड़ी. उसके एक बीच पर ढेर सारे बर्फ के गोले मिले हैं. जिन्होंने वहां के लोगों को हैरान कर दिया है. बर्फ के इन गोलों ने समुद्र का एक किनारा पूरी तरह कब्जिया रखा है. ये गोले टेनिस बॉल से लेकर एक मीटर से भी बड़े हैं. बीबीसी के अनुसार न्याडा गांव आर्कटिक सर्कल के ऊपर यमाल पेनिंसुला पर है. वहां के रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्होंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा है. बताया जा रहा है कि बर्फ के गोले बनना एक एक्सट्रा ऑर्डनरी प्रोसेस है. इसमें बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े हवा और पानी के जरिए एक-दूसरे से चिपक लेते हैं और फिर बड़े गोले बन जाते हैं.
एक रूसी टीवी चैनल ने आर्कटिक और अंटार्कटिक रिसर्च इंस्टिट्यूट के प्रेस सचिव सर्गेई लिसेंकोव का हवाला देते हुए बताया, 'स्लज आइस और स्लॉब आइस करके पहले वहां एक घटना होती है. उसके बाद हवा, समुद्र तट और टेंपरेचर में एक तरह का एडजस्टमेंट होता है. जो बाद में बर्फ के गोलों का रूप ले लेता है.' Ura.ru एक वेबसाइट है. उसके मुताबिक, दिसंबर 2014 में ऐसी ही एक घटना फिनलैंड की खाड़ी में भी हुई थी. दिसंबर 2015 में मिशिगन झील में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला था.
एक रूसी टीवी चैनल ने आर्कटिक और अंटार्कटिक रिसर्च इंस्टिट्यूट के प्रेस सचिव सर्गेई लिसेंकोव का हवाला देते हुए बताया, 'स्लज आइस और स्लॉब आइस करके पहले वहां एक घटना होती है. उसके बाद हवा, समुद्र तट और टेंपरेचर में एक तरह का एडजस्टमेंट होता है. जो बाद में बर्फ के गोलों का रूप ले लेता है.' Ura.ru एक वेबसाइट है. उसके मुताबिक, दिसंबर 2014 में ऐसी ही एक घटना फिनलैंड की खाड़ी में भी हुई थी. दिसंबर 2015 में मिशिगन झील में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला था.Add Lallantop as a Trusted Source

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