बताया कि इसका नाश इंसानों की वजह से ही होगा. अपनी स्पीच में हॉकिंग ने आइंस्टाइन की थ्योरी से लेकर मौत और ईश्वर तक की स्टोरी पर बात की. उन्होंने कहा कि "यही तो सही टाइम है रिसर्च करने का. हमारे यूनिवर्स का माहौल पिछले पचास साल में एकदम बदल गया है. अगर इस बदलाव में मैं कुछ योगदान दे पाऊं तो मुझे बड़ी खुशी होगी."
"धरती के खतम होने या न रहने लायक होने में टाइम कम या ज्यादा हो सकता है. हजार साल से बढ़कर दस हजार साल लग सकते हैं. मगर होगा जरूर ऐसा. तो लास्ट डेट आने से पहले हमें स्पेस में निकल जाना चाहिए. तारे देखने चाहिए. प्लैनेट खंगालने चाहिए. तभी ह्यूमनिटी को बचाने में कामयाब हो पाएंगे."नासा तो 2009 से लगा है. धरती के जैसे ग्रह खोजने में. 4600 प्लैनेट मार्क कर लिए गए हैं. 2300 और निशाने पर हैं. हमारे सूरज जैसा तारा पहली बार खोजा गया था सन 95 में. हॉकिंग कहते हैं हमको सबसे पहले टेक्नॉलजी से पैदा होने वाली मुश्किलों का सामना करना होगा. बाकी बातें तो फिर होंगी.
स्टीफन हॉकिंग के बारे में सब कुछ: आदमी 3 साल नहीं झेल सकता स्टीफन 50 साल से झेल रहे हैं ये बीमारी













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