इसके अलावा यूजर्स को ये भी लिखकर देना होगा कि उनका इरादा क्या है. यानी साइट पर रजिस्ट्रेशन क्यों करना है. लिख लो, हर कोई यही लिखेगा कि ब्याह करना है. बस जीते जी यही इरादा है. बता दें कि सरकार ने मैट्रीमोनियल साइट्स पर नजर रखने के लिए कुछ कर्रे कदम उठाने का फैसला किया है. ताकि कुछ लोग फेक आईडी बनाकर जो फर्जीवाड़ा करते हैं उनकी पकड़ाई और धुनाई की जा सके. रोक लगाई जा सके.ये जो नई गाइडलाइंस हैं, ये इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 से जुड़ी हुई हैं. जिसके बारे में जल्द ही डिपार्टमेंट ऑफ इलैक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी नोटिफिकेशन जारी करेगी. अच्छा अभी जो रूल्स हैं, उसके हिसाब से सिर्फ फोन से ऐसी साइट्स पर रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है. फोन नंबर हो तो प्रोफाइल बनाओ और साथी खोजो, पाओ. 2014 में वूमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट मिनिस्टर मेनका गांधी ने मेट्रीमोनियल साइट्स पर रोक को लेकर पहल शुरू की थी. सरकार ने इसको लेकर जो ड्राफ्ट तैयार किया है, उसमें मैट्रीमोनियल साइट्स के सलाहकार भी शामिल किए गए. एक बात और, अब जो लोग ऐसी साइट्स पर रजिस्टर करेंगे. उनके आईपी ऐड्रेस को भी नोट किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर लपेटे में लिया जा सके.
मैट्रीमोनियल साइट्स पर विवाह हेतू वर-वधू की ID प्रूफ चाहिए
फर्जी दूल्हे-दुल्हन सावधान हो जाएं.
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ब्याह करवाने का काम दुनिया में दो लोग ही संभाल रहे हैं. एक रिश्तेदार. दूजे नोटिफिकेशन से रिसती मैट्रीमोनियल वेबसाइट्स. एक बार बस रजिस्टर करने भर की देर है. कई बार कुछ कांडी लोग उम्र और तस्वीर गलत अपलोड करके झूठा खेला कर देते थे. लेकिन अब इनका भी 'वैरिफिकेशन बाण' इलाज पॉसिबल होगा. मैट्रीमोनियल वेबसाइट्स पर अब रजिस्ट्रेशन करने से पहले आईडी प्रूफ की कॉपी जमा करनी होगी. अगर आईडी प्रूफ जमा न किया तो 'वर-वधू चाहिए' टाइप विज्ञापन साइट्स पर न आ पाएंगे. तो अब मैट्रीमोनियल वेबसाइट्स पर वोटर आईडी, आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है. सरकारी आदेश है, मानना ही पड़ेगा.
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