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वाराणसी की स्वास्थ्य व्यवस्था का सच, मां को बेटे का शव ई-रिक्शा में ले जाना पड़ा

कोरोना काल में पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र का ये हाल है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर. (Pixabay)
कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने सरकारों, आम लोगों और स्वास्थ्य व्यवस्था को लाचार सा बना दिया है. देशभर से रोजाना ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो हमें और ज्यादा झकझोर जाती हैं. उत्तर प्रदेश के वाराणसी से ऐसी ही एक तस्वीर सामने आई है. इसमें ई-रिक्शा पर एक महिला अपने बेटे के शव के साथ दिख रही है. वो सीट पर बैठी है और बेटे का शव उसके पैरों के पास पड़ा हुआ है. सोशल मीडिया पर इस तस्वीर ने हंगामा मचाया हुआ है. कई ट्विटर यूजर्स और पत्रकारों ने इसे शेयर किया है. मौत के बाद एंबुलेंस तक नहीं मिली आजतक के रिपोर्टर बृजेश कुमार ने जो जानकारी दी है, उससे यूपी सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा होता है. उन्होंने बताया कि मृतक युवक का नाम विनीत सिंह था. जौनपुर का रहने वाला था. मुंबई में काम करता था. हाल ही में घर के एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए आया था. तभी से उसकी तबीयत खराब चल रही थी. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, विनीत को किडनी की समस्या थी. तबीयत बिगड़ने पर उसकी मां उसे इलाज के लिए वाराणसी ले आई थीं. लेकिन यहां इलाज छोड़िए किसी अस्पताल ने बीमार युवक को एडमिट तक नहीं किया. रिपोर्ट के मुताबिक, इलाज नहीं मिला तो युवक की हालत गंभीर हो गई. आखिरकार सोमवार (19 अप्रैल) को उसने दम तोड़ दिया. उस पर व्यवस्था की मार ये कि पीड़ित मां को बेटे का शव ले जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं मिली. सामान्य इलाज भी नहीं लल्लनटॉप से बातचीत में बृजेश कुमार ने बताया कि वाराणसी लाने के बाद विनीत की मां चंद्र कला उसे सोमवार (19 अप्रैल को) काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल चिकित्सालय ले गई थीं. लेकिन वहां विनीत को एडमिट नहीं किया गया. बृजेश के मुताबिक, चंद्र कला पहले भी बेटे को इस अस्पताल में लेकर गई थीं. तब भी उसे भर्ती नहीं किया गया था. बेटे की मौत के बाद मां को उसका शव भी ई-रिक्शा पर ले जाना पड़ा. सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर उसी समय की है. बृजेश के मुताबिक, कोरोना संकट के कारण वाराणसी की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है. अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों की भारी भीड़ है, जिसके चलते अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों को उपचार नहीं मिल पा रहा. यहां तक की सामान्य इलाज की सुविधा भी एक तरह से खत्म हो गई है. विनीत सिंह को इलाज और मौत के बाद एंबुलेंस भी ना मिलना इसकी मिसाल है. आंकड़ों से हाल बयान कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण वाराणसी की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए पैदा हुए संकट का अंदाजा लगाया जा सकता है. यहां अब तक कोरोना संक्रमण के 46 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से तकरीबन 22 हजार केस इसी महीने दर्ज किए गए हैं. बीते 24 घंटों की बात करें तो इस दौरान वाराणसी में 2668 लोग कोरोना संक्रमण से ग्रसित पाए गए हैं. वहीं, 10 लोगों की मौत हुई है. इससे मृतकों की कुल संख्या 525 हो गई है. कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण संकट में आई वाराणसी की स्वास्थ्य व्यवस्था, इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है. वे 2014 से यहां के सांसद हैं. इस वाकये के सामने आने के बाद कई लोगों ने योगी सरकार के साथ पीएम मोदी की भी आलोचना की है.

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