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यूपी पंचायत चुनाव में तैनात शिक्षक अधिकारियों से मिन्नतें करता रहा, मौत के बाद कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई

पीड़ित ने अधिकारियों से कई बार विनती की थी कि उसे चुनाव ड्यूटी से हटाया जाए.

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कोरोना की दूसरी लहर के बीच यूपी में पंचायत चुनाव कराए गए. बैलेट बॉक्स ले जाते अधिकारी. (तस्वीरें- पीटीआई और पिक्साबे)
उत्तर प्रदेश में एक तरफ कोरोना वायरस की जबर्दस्त दूसरी लहर चल रही है तो दूसरी तरफ पंचायत चुनाव कराए जा रहे हैं. कई लोगों ने आपत्ति जताई है कि इतने बड़े स्वास्थ्य संकट के बीच चुनाव क्यों कराए जा रहे हैं. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोरोना काल में पंचायत चुनाव कराने के तरीकों को लेकर सख्त टिप्पणी की है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर कर चुनाव रुकवाने की मांग की गई है. इन सबके बीच यूपी पंचायत चुनाव में तैनात एक शिक्षक की तबीयत बिगड़ने के बाद मारे जाने की खबर सामने आई है. जांच रिपोर्ट में मृतक शिक्षक को कोरोना संक्रमित पाया गया है.
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित का नाम सुरेशचंद्र त्रिपाठी है. वो यूपी के सुल्तानपुर के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त थे. प्रशासन ने पंचायत चुनाव में उनकी ड्यूटी लगाई थी. अखबार ने बताया कि कुछ दिन पहले ड्यूटी करते हुए सुरेशचंद्र की तबीयत बिगड़ गई थी. उन्होंने उस समय चुनाव अधिकारियों से विनती की थी कि उन्हें ड्यूटी से हटाया जाए. लेकिन तब उनकी बात नहीं सुनी गई. बाद में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. वहां सुरेशचंद्र की मौत हो गई. जांच में उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव निकली तो हड़कंप मच गया.
Panchayat Election
कोरोना संकट के बीच कानपुर में पंचायत चुनाव की वोटिंग के समय की एक तस्वीर. (साभार- पीटीआई)
अधिकारियों से की कई मिन्नतें अखबार ने बताया है कि ड्यूटी के दौरान तबीयत खराब होने पर सुरेशचंद्र ने कई बार टेस्ट कराने की कोशिश की. लेकिन उनकी जांच नहीं की गई. इस दौरान वो अधिकारियों से बार-बार कहते रहे कि उनकी चुनाव ड्यूटी काटी जाए. अखबार का कहना है कि अधिकारियों ने ना तो सुरेशचंद्र को ड्यूटी से राहत दी और ना ही उनकी जांच करवाई. सोमवार (19 अप्रैल) को ड्यूटी के दौरान हालत बिगड़ने से पीड़ित शिक्षक मौत हो गई. कुछ अन्य मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि सुरेशचंद्र के परिवार में 3 बेटियां और एक बेटा है. उनके जाने से परिवार समेत उनके गांव कोथरा में दुख का माहौल है. पहले भी मामले सामने आए ये पहली बार नहीं है, जब यूपी पंचायत चुनाव में ड्यूटी कर चुके किसी शिक्षक की तबीयत खराब होने के बाद मौत हुई है. दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पंचायत चुनाव कराकर लौट रहे कई शिक्षक बीमार पड़ रहे हैं. इनमें से कइयों में कोविड-19 के लक्षण भी दिखे हैं. जांच के बाद उनमें कोरोना होने की पुष्टि हुई है. अखबार के मुताबिक, बीते रविवार (18 अप्रैल) को प्रयागराज में ऐसे दो शिक्षकों की मौत हो गई. बाद में गंगा गुरुकुलम स्कूल की एक शिक्षिका की मौत की भी खबर आई थी. इन सभी की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई थी.
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बीती 13 अप्रैल को मिर्जापुर के चुनाव कार्यालय में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते उम्मीदवार और उनके समर्थक. (तस्वीर- पीटीआई)
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी कोरोना संकट के बावजूद उत्तर प्रदेश में जिस तरह पंचायत चुनाव कराए जा रहे हैं, उसे लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोमवार (19 अप्रैल) को कड़ी टिप्पणी की थी. इसमें उसने शिक्षकों की तैनाती को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की थी. अदालत ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग और सरकार को पता था कि कोरोना संकट बढ़ सकता है, इसके बाद भी इस बारे में कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई. कोर्ट ने कहा कि चुनाव के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क जैसे नियमों का पालन नहीं हो रहा है. साथ ही अध्यापकों और सरकारी कर्मचारियों को मजबूर कर दूर-दराज के इलाकों में तैनात किया जा रहा है.

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