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इधर काले धन पर लगाम, उधर माल्या समेत 63 लोगों का 7 हजार करोड़ कर्जा माफ

SBI ने जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले 63 डिफॉल्टर्स का कर्ज माफ कर दिया है.

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फोटो - thelallantop

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले 63 डिफॉल्टर्स का कर्ज माफ करते हुए 7016 करोड़ रुपए की नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स (NPA) को अपने खाते से हटा दिया है. NPA मतलब बैंक का दिया हुआ ऐसा कर्ज, जिस पर उसे ब्याज मिलना तो दूर, मूलधन भी वापस नहीं आना है. 7,016 करोड़ के इस कर्ज के बारे में SBI ने ये मान लिया है कि अब ये पैसा उन्हें वापस नहीं मिलने वाला.

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बुधवार को आई डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक जिनका कर्ज माफ किया गया है, उसमें विजय माल्या की डिफॉल्टर कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस भी शामिल है. किंगफिशर एयरलाइंस का 1201 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया है, जबकि ये कंपनी जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाली लिस्ट में टॉप पर थी.

हालांकि, इस मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली और खुद SBI ने सफाई देते हुए कहा है कि माल्या का कर्ज माफ नहीं किया गया है, बल्कि राइट ऑफ किया गया है. उनके मुताबिक बैंक इस लोन की रिकवरी के लिए प्रयास जारी रखेगा.

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दस्तावेजों के मुताबिक 63 खाते ऐसे हैं, जिनका सारा का सारा कर्ज माफ कर दिया गया है. 31 खाते ऐसे हैं, जिनका थोड़ा कर्ज माफ किया गया है और 6 खातों को NPA कटेगरी में डाल दिया गया है. SBI ने 7,016 करोड़ रुपए एडवांस अंडर कलेक्शन अकाउंट (AUCA) में डालते हुए अपनी बैलेंस शीट एडजस्ट की है. जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों की लिस्ट में केएस ऑयल (596 करोड़ रु.), सूर्या फार्मास्यूटिकल्स (526 करोड़ रु.), जीईटी पॉवर (400 करोड़ रु.) और साई इन्फो सिस्टम (376 करोड़ रु.) टॉप पर हैं.

विजय माल्या की संपत्ति को सीज करने की गुजारिश लेकर बैंक सुप्रीम कोर्ट के पास गए थे, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने माल्या को 'भगोड़ा अपराधी' घोषित कर दिया था. किंगफिशर एयरलाइन पर 17 बैंकों का कुल 6,963 रुपए बकाया है. वैसे बैंकों द्वारा कर्ज माफ करने के बारे में सबसे पहले इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था.

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फरवरी में आई इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 2013 से 2015 के वित्तीय वर्षों के बीच राज्य सरकारों के 29 बैंकों ने 1.14 लाख करोड़ रुपए के बैड लोन को माफ कर दिया था. बैड लोन वो लोन होता है, जिसके वापस आने की उम्मीद बैंक छोड़ देता है और आखिर में रो-गाकर उसे माफ कर दिया जाता है. इस मामले में SBI सबसे आगे रहा, जिसने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 40,084 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया. एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए इसे 'एक बड़ा धोखा' करार दिया था और RBI को बड़े डिफॉल्टर्स के नाम सामने लाने का आदेश दिया था.

बैंकिंग सेक्टर में सभी NPAs को समझने के लिए बनाई गई संसदीय सलाहकार समिति ने मंगलवार को सुझाव दिया कि राज्य सरकारों वाले बैंकों ने जितने डिफॉल्टर्स का कर्ज माफ किया है, सरकार को उन सभी के नाम सार्वजनिक करने चाहिए. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक, 'कमिटी के सदस्यों ने सुझाव दिया है कि सिस्टम में ज्यादा पारदर्शिता लाने की जरूरत है. जिन डिफॉल्टर्स का लोन बैंकों ने माफ किया है, उनके नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए. उनके खिलाफ सख्त ऐक्शन लिया जाना चाहिए, ताकि दूसरे ऐसी हरकतें न करें.'


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