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"संभल हिंसा सोची-समझी साजिश", अखिलेश यादव ने संसद में किसका नाम लिया?

अखिलेश यादव ने कहा है कि Sambhal Violence की घटना को लेकर हत्या का मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

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अखिलेश यादव ने संभल की शाही जामा मस्जिद में सर्वे का जिक्र करते हुए इस तरह की घटनाओं के लिए BJP पर निशाना साधा. (फाइल फोटो: PTI)

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के संभल में पिछले दिनों हुई हिंसा को 'सोची-समझी साजिश' करार दिया है. मंगलवार, 3 दिसंबर को लोकसभा में अखिलेश यादव ने मांग की कि इस घटना के लिए जिम्मेदार पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को निलंबित किया जाए, उन पर हत्या का मुकदमा चलाया जाए.

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कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने निचले सदन में शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए कहा,

“संभल जो इसलिए जाना जाता था कि वहां लोग भाईचारे के साथ रहते हैं, वहां अभी से नहीं सदियों पुराना भाईचारा (है). हजारों साल से (वहां लोग) इसी तरह रहते आए हैं. लेकिन अचानक ये जो घटना (हिंसा) हुई है, ये सोची-समझी रणनीति के तहत (हुई) और वहां के भाईचारे को गोली मारने का काम हुआ है.”

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सपा प्रमुख ने संभल की शाही जामा मस्जिद में सर्वे का जिक्र करते हुए इस तरह की घटनाओं के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा. यादव ने कहा,

"देश के कोने-कोने में भाजपा और उसके सहयोगी, समर्थक और शुभचिंतक बार-बार 'खुदाई' की बात करते हैं. इससे हमारे देश का सौहार्द्र, भाईचारा और गंगा-जमुनी तहजीब खो जाएगी."

अखिलेश यादव ने दावा किया कि स्थानीय कोर्ट के आदेश पर संभल की शाही जामा मस्जिद का सर्वे एक बार हो गया था. उनके मुताबिक पुलिस और प्रशासन के अधिकारी कुछ दिन बाद बिना कोर्ट के आदेश के दोबारा सर्वे के लिए पहुंच गए. अखिलेश यादव ने कहा कि इस दौरान सूचना मिलने पर मस्जिद पहुंचे स्थानीय लोगों ने सर्वे का कारण जानना चाहा.

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यूपी के पूर्व सीएम ने पुलिस-प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा,

“लोगों ने सर्वे का कारण जानना चाहा, तो सर्कल ऑफिसर ने उनके साथ गाली-गलौज की और लाठीचार्ज करवा कर बुरी तरह जख्मी कर दिया. इसका विरोध करते हुए चंद लोगों ने पत्थर चलाए, इसके बदले में पुलिस के सिपाही से लेकर अधिकारियों तक ने अपने सरकारी और प्राइवेट हथियारों से गोलियां चलाईं, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग है. इसमें दर्जन लोग गोलियों से घायल हो गए. 5 मासूम जो कि अपने घर से सामान लेने के लिए निकले थे, उनकी मृत्यु हो गई.”

उन्होंने कहा,

"संभल का माहौल बिगाड़ने में याचिका दायर करने वाले लोगों के साथ पुलिस और प्रशासन के लोग जिम्मेदार हैं. इनको निलंबित किया जाना चाहिए और हत्या का मुकदमा चलाया जाना चाहिए, जिससे कि लोगों को इंसाफ मिल सके."

कांग्रेस के उज्ज्वल रमण सिंह ने भी शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि संभल को इंसाफ मिलना चाहिए. उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवारत जज के नेतृत्व में कराने की मांग की. बता दें कि शून्य काल से पहले सपा सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने संभल में हिंसा की घटना के विरोध में प्रश्नकाल के दौरान सदन से वॉकआउट किया था.

वीडियो: "पुलिस ने नईम को..." संभल हिंसा पर अखिलेश यादव का बयान

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