कश्मीर में आतंकवादियों की गोली के शिकार यूपी के व्यक्ति के परिवार ने सरकार से मांगा मुआवजा-फोटो-ANI
कश्मीर में आतंकवादियों ने शनिवार 16 अक्टूबर को 2 आम नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. एक पर श्रीनगर में तो दूसरे पर पुलवामा में हमला किया गया. एक मृतक की पहचान 30 साल के अरविंद कुमार के रूप में हुई. अरविंद कुमार बिहार के रहने वाले थे. वह श्रीनगर में ठेला लगाकर अपना व्यवसाय चला रहे थे. वहीं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले सागिर अहमद पर पुलवामा में हमला हुआ था. वह कारपेंटर का काम करते थे. न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए मृतक के भाई मोहम्मद नईम ख़ान ने कहा,
"हमारे पास फोन आया कश्मीर से कि आप तीन चार आदमी घर के, गाड़ी करके आ जाओ. आपके भाई को गोली लगी है. हम कैसे जाएं? हमारे पास कोई साधन नहीं है. सरकार ही कोई इंतज़ाम कर दे कि हमारे भाई का शव हमारे पास आ जाए."
सागिर अहमद की चार बेटियां और एक बेटा है. परिवार ने बताया कि बेटा राजस्थान में कोई छोटा मोटा काम करता है. पत्नी का 6 महीने पहले देहांत हो गया था.
आरोपियों के बारे में पूछने पर नईम ने कहा,
"यह तो हमको पता नहीं कि आतंकवादियों ने मारा या मिलिट्री ने. वे काम से छुट्टी करके जैसे ही घर गए, बर्तन मांज रहे थे तब गोली लगी. अब गोली आतंकवादियों की थी या मिलिट्री की, ये मालूम नहीं. हमें तो आगे का कुछ पता ही नहीं लगा! लेकिन जिन्होंने भी उनको मारा है उन्हें सख़्त से सख़्त सज़ा देनी चाहिए."
सागिर अहमद के भाई मोहम्मद नईम खान ने कहा कि उनके भाई के छोटे-छोटे बच्चों हैं. उनके पास पैसे का कोई इंतज़ाम नहीं है. कोरोना में कारोबार बंद हो जाने की वजह से पिछले एक साल से उनके भाई ही काम कर रहे थे. सागिर के परिवार वालों ने आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य के लिए नौकरी की मांग की है. नईम ख़ान ने कहा-
"उनके पीछे उनका बेटा, बहू, पोता और चार बेटियां हैं. हम सरकार से 1 करोड़ के मुआवजे की मांग करते हैं."
नईम के मुताबिक, उनके भाई ने बताया है कि वह पिछले डेढ़ साल से काम के लिए आते-जाते रहते थे. अभी आख़री बार ढाई महीने पहले गए थे. तीन-चार दिन पहले उनसे बात हुई थी. एकदम ठीक थे, और अभी 1:30 घंटे पहले ख़बर आई कि उनका इंतकाल हो गया. वहीं स्किल इंडिया पर तंज़ कसते हुए स्थानीय पार्षद ने कहा कि किस बात का स्किल इंडिया! एक व्यक्ति अपने घर का पालन पोषण करने के लिए 1000 किलोमीटर दूर जाता है और वहां उसे गोली मार दी जाती है. अगर वो व्यक्ति यहीं कोई ठीक-ठाक रोज़गार पा जाता, तो उसके जीवन यापन हो पाता. क्षेत्र के कई दस्तकार और कारीगर हैदराबाद, कश्मीर पंजाब जैसे दूरदराज़ इलाक़ों में जाते हैं. स्थानीय पार्षद ने परिवार के एक सदस्य के लिए सरकारी नौकरी की भी मांग की है.