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नक्सली लड़के ने किया शादी के लिए सरेंडर, लड़की का एनकाउंटर

दोनों नक्लसलवादी थे. लड़के ने इस शर्त पे सरेंडर किया कि पुलिस लड़की को भी निकाल लेगी. पर पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया.

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फोटो - thelallantop
किरण और ज़रीना नक्सलवादी थे, एकदूसरे से प्यार करते थे. दोनों शादी करना चाहते थे. खून-खराबे की जिंदगी से बाहर निकलकर अपना घर बसाना चाहते थे. अपने प्यार को पाने के लिए किरण ने पिछले साल मई में सरेंडर कर दिया. लेकिन इस शर्त पर कि पुलिस ज़रीना को भी सेफली बाहर निकाल लेगी. लेकिन सरेंडर करने के 6 महीने बाद किरण को खबर मिली कि पुलिस ने ज़रीना का एनकाउंटर कर दिया है. दोनों CPI (Maoist)  के मेम्बर थे. किरण मलंगिर एरिया कमेटी का कमांडर था. ज़रीना डिप्टी कमांडर थी. किरण का सरेंडर पुलिस के लिए बड़ी सफलता थी क्योंकि उस पर 2013 में हुए झीरम घाटी हमले में शामिल होने का आरोप था.
झीरम घाटी हमले में 27 लोग मारे गए थे. इसमें कॉन्ग्रेस के फॉर्मर स्टेट मिनिस्टर महेंद्र कर्मा और छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस चीफ नंद कुमार पटेल की मौत हो गई थी.  
इस हमले में ज़रीना भी शामिल थी. पुलिस पर आरोप है कि ज़रीना का एनकाउंटर फ़ेक था. पुलिस वाले उसे उसके घर से निहत्थे उठा कर ले गए थे. इस एनकाउंटर के बारे में कोई भी अधिकारी खुल के जवाब नहीं दे रहा है. उस समय के एडीजी आरके विज कहते हैं कि उन्हें इसके बारे में कुछ नहीं पता है. एंटी नक्सल ऑपरेशन के स्पेशल डीजी डीएम अवस्थी का जवाब है कि उन्होंने 30 जनवरी को चार्ज लिया था जबकि ये एनकाउंटर 20 जनवरी को हुआ था. एसडीएम सीडी वर्मा छुट्टी पर थे. एसपी और एंटी नक्सल ऑपरेशन के एएसपी किसी दूसरे ऑपरेशन के लिए महराष्ट्र से सटे जंगलों में थे. उन्हें ये सब दो दिन बाद पता चला जब वो वापस लौटकर आए. इंडियन एक्सप्रेस ने मामले की इंवेस्टिगेशन की है. इंवेस्टिगेशन में जो कुछ सामने आया है उससे ज़रीना के एनकाउंटर पर कई सवाल खड़े होते हैं. ज़रीना के गांव वाले मानते हैं कि वो नक्सलवादी थी. लेकिन 19 जनवरी को वो अपने घर में ही थी. वो निहत्थी और बीमार थी. ज़रीना के भाई नरेश वक्को ने इस फ़ेक एनकाउंटर की पूरी कहानी बताई है. ज़रीना 2006 से नक्सलवादियों से जुड़ी थी. वक्को ने बताया कि ज़रीना को ‘उठाने’ करीब सौ पुलिस वाले आए थे. वो बिना कुछ बोले सीधा घर में घुस आए. उसकी बहन खाना बना रही थी. चारों तरफ इतने सारे पुलिस वालों को देखकर वो कुछ बोल नहीं पाई. घर वालों को लगा कि वो उसे बद्रे थाने ही ले जाएंगे. इसके दस घंटे बाद ही उन्हें खबर मिली कि बद्रे थाने में ज़रीना की डेडबॉडी लाई गई है. उधर, थाने के इंस्पेक्टर मनोज सिंह ने कहा कि एनकाउंटर फ़ेक नहीं था. वो अपने दस्ते के साथ आ रहे थे तभी नक्सलियों ने उनपर हमला कर दिया. दोनों पक्षों में फायरिंग हुई. बाद में उन्हें वहां ज़रीना की लाश और उसकी राइफल मिली. किरण ने बताया कि कमेटी की मीटिंग में ज़रीना से बातें होतीं थीं. वहीं दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया. ज़रीना बहुत हंसमुख लड़की थी. उसको लड़ना अच्छा नहीं लगता था. पर, अगर साथ में लोग हों तो लड़ लेती थी. गांव वालों ने कहा है कि उन लोगों ने ज़रीना के फ़ेक एनकाउंटर की कम्प्लेन इसलिए नहीं की क्योंकि बेद्रे थाने के ही लोग तो उसे उठाकर ले गए थे. तो शिकायत किससे करें?
स्टोरी दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रही आकांक्षा ने एडिट की है.  

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