आप 15 साल की उम्र में कहां थे? क्या कर रहे थे? नॉर्मली, इस उम्र में लोग स्कूल में पढ़ाई कर रहे होते हैं. बस्ता ढोते-ढोते टाइम मिलने पर पार्क में क्रिकेट, फुटबॉल खेल लेते हैं. खैर अब तो वो समय भी ट्यूशन और कोचिंगों में चला जाता है. और पार्क तो वैसे भी अब कहां ही दिखते हैं? मैं 15 साल की उमर में नौवीं क्लास में पढ़ रहा था. रोज़ सुबह स्कूल जाना और वापस आना. शाम को दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलना. पार्क की बाउंड्री से बाहर डायरेक्ट गेंद जाने पर आउट, मेरे लिए क्रिकेट था. 1988. मेरी पैदाइश के तीन साल पहले, बम्बई में पंद्रह साल का एक लड़का अपना सीवी तैयार कर रहा था. वो पंद्रह का ही था. गणित की सबसे अच्छी बात ये है कि नंबरों के दम पर आप एक स्टेज पर ले जाकर हर किसी को एक बराबर खड़ा कर सकते हैं. हर कोई पंद्रह की उमर में उतना ही बड़ा होता है जितना कोई और पंद्रह वाला. उस लड़के ने अपना सीवी भेजा. हर्षा भोगले को. देश के सबसे बड़े डोमेस्टिक टूर्नामेंट में कदम रखने से ठीक पहले. इस सीवी की सबसे पहली लाइन. उस घटना का ज़िक्र करती है जिसने शायद इस लड़के की ज़िन्दगी को सिरे से उलट दिया. 11 साल की उम्र में सीज़न बॉल से क्रिकेट खेलना शुरू किया. सीज़न बॉल जिसे हम लेदर की गेंद से संबोधित करते हैं. 11 साल. मुझे याद भी नहीं है कि तब मैं क्या कर रहा था. हां, ग्यारहवें बर्थडे पर एक क्रिकेट का बैट ज़रूर मिला था. ये ज़रूर याद है. और ये भी याद है कि उससे टेनिस वाली गेंद से क्रिकेट खेलता था. वही क्रिकेट जिसमें पार्क की बाउंड्री से बाहर जाने पर आउट दिया जाता था.
'मैं दाहिने हाथ का मिडल ऑर्डर बैट्समैन हूं और दाहिने हाथ से मीडियम पेस बॉलिंग भी करता हूं.' सीवी की अगली लाइन. सब कुछ कितना नॉर्मल. कितना सौम्य. कितना ऐवरेज.
'अपने स्कूल शारदाश्रम विद्यामंदिर (इंग्लिश मीडियम) के लिए इंटर-स्कूल क्रिकेट टूर्नामेंट खेलता हूं.' अगली लाइन में कुछ वजन था.
'मैं अपने क्लब क्रिकेट क्लब ऑफ़ इंडिया, बॉम्बे के लिए ए-डिवीज़न क्लब क्रिकेट खेलता हूं.' यहां सीसीआई की बात की जा रही थी. एक नम्बर क्लब. बड़े लोग खेलते थे यहां. वहां ये पंद्रह साल का लड़का भी क्रिकेट खेलता था. जो अपना सीवी देने जा रहा था. लेकिन ये भारी बात पहले पन्ने की आखिरी लाइन थी. अक्सर सीवी में बड़ी-बड़ी बातें ऊपर ऊपर तैरती मिलती हैं. लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं था. सब कुछ वैसा जैसा होना चाहिए था. इस वक़्त ये सब कुछ उस हद तक नहीं समझाया जा सकता था. लेकिन आने वाले सालों में इस पंद्रह साल के लड़के ने सभी को सब कुछ समझा दिया. शायद उसने अपना आगे का क्रिकेट, इस सीवी को समझाने के लिए खेला होगा. कि क्यूं पहली लाइन में सीज़न बॉल का ज़िक्र और आखिर में उस बड़े क्लब का नाम. ये लड़का अपनी प्रायॉरिटी जानता था. साथ ही हद दर्जे का विनम्र भी था. गुरूर नाम मात्र का भी नहीं. न तब और न सौ सेंचुरी मारने के बाद. हाल ये है कि रिटायर हुआ तो अपने घर की पिच को अपने हाथों से छुआ (हालांकि सारी दुनिया की पिचें उसके घर की पिच ही थीं), उसकी मिट्टी को सर से लगाया और आंसू छुपाते हुए, सर झुकाए, आखिरी बार मैदान से पवेलियन का रास्ता तय किया. उस सीवी को तैयार करने के 25 साल बाद. लोगों ने अपनी सफ़लताओं को पचाने की लाख कोशिशें की लेकिन वो कहीं जाके हल्के पड़ गए, और उसका नशा उनके सर चढ़ बैठा. मात्र पंद्रह के हुए इस लड़के में ऐसा कुछ भी नहीं था, और न ही आगे होने वाला था. इस बात का अंदाज़ा वहीँ से लगाया जा सकता था जब उसकी वर्ल्ड रिकॉर्ड 664 रन की पार्टनरशिप का ज़िक्र उसके सीवी के पांचवें पन्ने पर दिखा. सचिन तेंदुलकर. 24 साल दुनिया के लिए क्रिकेट खेलने वाला लड़का. और उसका पंद्रह की उम्र में बनाया गया सीवी: