मीटिंग चल्लई है. नागपुर में. सीनियर जर्नलिस्ट राहुल कंवल ने ट्वीटिया के बताया है.

गणवेश लगभग एक शताब्दी से चला आ रहा है और संघ में अनुशासन और गर्व का सिम्बल है. लेकिन कहा जा रहा था कि संघ के नए बने मेम्बर्स को ढीली फ़िटिंग की हाफ़ पैंट पहनने में कुछ शर्मिंदगी सी महसूस होती थी. वैसे भी हाफ़ पैंट अब या तो एथलीट पहनते दिखते हैं या केप्री पहने कूल लौंडे. ख़ाकी की ढीली हाफ़ पैंट तो सचमुच एलियन कॉन्सेप्ट बन चुका है.

मनमोहन वैद्य जो कि संघ के प्रचारक हैं, कहते हैं कि "ये कहना कि डिसीज़न अभी ले लिया जायेगा या मामले पर वोटिंग होगी, अभी बहुत जल्दबाजी होगी. अगर इस मुद्दे पर सभी का अग्रीमेंट नहीं होगा तो इस मामले को अगले पांच सालों के लिए टाल दिया जायेगा."
कन्हैया की जेल से जेएनयू वापसी के बाद वाले स्पीच को हम रिवाइंड करें तो याद आएगा कि उसमें उसने गोलवलकर और मसूलिनी की दोस्ती और मसूलिनी की काली टोपी जो संघ का एक हिस्सा बन पड़ी, की बात की थी. नयी ड्रेस में ये वाली काली टोपी भी शामिल होगी.

मसूलिनी और संघ के टोपे
नयी जनरेशन को दिमाग में रखकर खाकी निक्कर की जगह नीली या ग्रे पैंट आएगी. नीली वाली के आने की ज़्यादा संभावना है. आरएसएस ने आईटी प्रोफेशनल्स के लिए ट्रैक पैंट्स पहनने की छूट दे रखी है.















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